
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर पूरे मिडिल ईस्ट की हवाई सेवाओं पर साफ दिख रहा है. कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द होने से हजारों यात्री एयरपोर्ट्स पर फंसे हुए हैं. एयरलाइंस और सरकारें लगातार राहत अभियान चला रही हैं ताकि यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा सके.
मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के चलते ज्यादातर हवाई क्षेत्र अभी भी बंद हैं. कुछ लोग निजी जेट का सहारा ले रहे हैं, जबकि सीमित चार्टर और कमर्शियल उड़ानों के जरिए हजारों यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश जारी है.
कई यात्री मिडिल ईस्ट से निकलने के लिए भारी कीमत चुका रहे हैं. कुछ सीधे एयरपोर्ट पहुंच रहे हैं, तो कुछ सड़क मार्ग से अपेक्षाकृत सुरक्षित हब की ओर जा रहे हैं. कई मामलों में यात्री विमानों को लड़ाकू विमानों की एस्कॉर्ट भी दी जा रही है.
इस बीच खाड़ी देशों से अमीरों के पलायन के चलते ओमान के मस्कट एयरपोर्ट ने प्राइवेट जेट उड़ानों पर सीमा तय कर दी है.
ओमान के मस्कट इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने प्राइवेट जेट ऑपरेटरों से कहा है कि वे फिलहाल अतिरिक्त उड़ानें न चलाएं. एयरपोर्ट प्रशासन ने मौजूदा हालात में सरकारी और नियमित कमर्शियल उड़ानों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है.
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केवल पहले से तय सेवाएं चलेंगी
जंग की हालातों के चलते एयरपोर्ट प्रशासन ने शुक्रवार को चार्टर विमान कंपनियों को भेजे ईमेल में कहा, कि मस्कट इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों की आवाजाही फिलहाल केवल पहले से तय सीजनल शेड्यूल वाली सेवाओं तक सीमित रखी गई है.
एयरपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला भीड़ और दबाव को संभालने और एयरपोर्ट की क्षमता को तय सीमा के भीतर बनाए रखने के लिए लिया गया है.
ईमेल में एयरलाइंस और ऑपरेटरों से कहा गया है कि वे स्वीकृत सीजनल शेड्यूल से बाहर मिलने वाले सभी स्लॉट रद्द कर दें और अगली सूचना तक नई उड़ानों के लिए अनुरोध न भेजें.
जानकारी के मुताबिक ईमेल में यह भी कहा गया है कि इस दौरान केवल एम्बेसी-स्पॉन्सर्ड रिपैट्रिएशन फ्लाइट्स पर विचार किया जा सकता है.
इसके लिए पहले कूटनीतिक माध्यमों से अनुमति लेना जरूरी होगा और इन उड़ानों में सीटों की व्यावसायिक बिक्री नहीं की जा सकेगी.