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भारत-चीन को तेल पर भारी डिस्काउंट दे रहा रूस, अब दोगुनी छूट देने पर मजबूर हुआ ये देश

रूस ने यूक्रेन युद्ध के बाद खुद पर लगे प्रतिबंधों के बीच चीन और भारत जैसे देशों को भारी छूट पर तेल बेचना शुरू किया. इससे रूस के सहयोगी देश ईरान से उसकी प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. अब ईरान ने चीन को रूस की तुलना में दोगुनी छूट पर तेल बेचने का फैसला किया है.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चीन, रूस से भारी छूट पर कच्चा तेल खरीद रहा
  • ईरान दोगुनी छूट पर चीन को तेल बेचेगा

यूक्रेन युद्ध के बाद से चीन भारी छूट पर रूस का कच्चा तेल खरीद रहा है. ऐसे में ईरान को अपने तेल की कीमतों में दोगुनी कटौती करनी पड़ी है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पहले से ही सस्ते दाम पर तेल बेचता आया है, ऐसे में चीन को रूस की तुलना में दोगुनी छूट पर तेल बेचने को मजबूर होना पड़ा है.

यूक्रेन युद्ध की वजह से अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं. यही वजह है कि रूस को भारी छूट पर अपना तेल चीन और भारत जैसे देशों को बेचना पड़ रहा है लेकिन इससे रूस के सहयोगी देश ईरान से उसकी प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. 

अमेरिका ने ईरान पर भी प्रतिबंध लगा रखे हैं और ईरान के पास अपना तेल बेचने के लिए ज्यादा बाजार भी नहीं है. यही कारण है कि ईरान को रूस की तुलना में दोगुनी छूट पर चीन को अपना तेल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

रूस ने जून में रिकॉर्ड मात्रा में चीन में कच्चे तेल की खेप का निर्यात किया था. ऐसा करने में रूस ने सऊदी अरब को भी पीछे छोड़ दिया.

चीन के बाजार में बने रहने के लिए दी भारी छूट

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने चीन के बाजार में प्रतियोगिता में बने रहने के लिए तेल की कीमतों में भारी छूट दी है. दरअसल कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन में ढील के बाद चीन में तेल की मांग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. 

तेल बाजारों का विश्लेषण करने वाली सिंगापुर की फर्म वंदा इनसाइट्स की संस्थापक वंदना हरि का कहना है, खाड़ी के तेल उत्पादक देश यह देखकर काफी असहज महसूस करेंगे कि भारी छूट वाले कच्चे तेल की वजह से उनके तेल बाजारों को नजरअंदाज किया जा रहा है.

चीन के आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि चीन ने 2020 के बाद से सिर्फ तीन महीने ही ईरान के कच्चे तेल का आयात किया है. ईरान ने जनवरी और मई में चीन में कच्चे तेल का निर्यात किया था लेकिन कैपलर जैसे थर्ड पार्टी सूत्रों का कहना है कि चीन में ईरान के तेल की लगातार सप्लाई हुई है. 

कैपलर का कहना है कि चीन ने मई और जून में प्रतिदिन की दर से सात लाख बैरल तेल का आयात किया है. इंडस्ट्री कंसल्टेंट फैक्ट्स एंड ग्लोबल एनर्जी (एफजीई) का कहना है कि ईरान के कच्चे तेल के बजाय रूस के यूरल्स तेल का चीन में आयात किया गया. 

ब्रेंट फ्यूचर्स पर ईरान के तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल

ट्रेडर्स के मुताबिक, बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स पर ईरान के तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जो रूस के यूरल्स तेल के समान है. यूक्रेन पर हमले से पहले ईरान के तेल पर लगभग चार से पांच डॉलर तक की छूट थी.

चीन की कुछ स्वतंत्र रिफाइनरी रूस और ईरान के कच्चे तेल के सबसे बड़ी खरीदार हैं. इन रिफाइनरीज के लिए सस्ता तेल जरूरी है क्योंकि तेल के निर्यात को लेकर नियमों में बदलाव से इन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

इन रिफाइनरी को विदेशी बाजारों में तेल का निर्यात नहीं करने दिया जाता. इन्हें घरेलू बाजार में तेल की सप्लाई करने को मजबूर होना पड़ता है. चीन में कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन के कारण हाल के महीनों में इन तेल रिफाइनरीज को काफी नुकसान उठाना पड़ा है.

चीन, रूस से भारी छूट पर मिल रहे कच्चे तेल का खूब फायदा उठा रहा है. ऐसे में वाजिब है कि चीन भारी छूट का लाभ उठाने के लिए अन्य तेल सप्लायर्स से तेल की मात्रा घटा रहा है. 

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