ईरान की जंग से सुलग रहे पश्चिम एशिया में अभी शांति आई भी नहीं है कि युद्ध का एक और मोर्चा खुलता दिख रहा है. उत्तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया को ललकारते हुए समंदर की ओर 10 बैलेस्टिक मिसाइल फायर किए हैं. समंदर के किनारे ही उत्तर कोरिया और जापान स्थित है. दक्षिण कोरियाई सेना ने पत्रकारों को दिए एक संदेश में बताया कि यह प्रोजेक्टाइल उत्तर कोरिया के पूर्वी तट से दूर समुद्र की ओर दागा गया. उन्होंने इसके बारे में और कोई जानकारी नहीं दी गई.
उत्तर कोरिया की ओर से यह कदम तब उठाया गया है जब उत्तर कोरिया के 18 हजार सैनिक अमेरिकी सैनिकों के साथ मिलकर युद्ध अभ्यास कर रहे हैं. उत्तर कोरिया के इस कदम को जंग भड़काने वाली कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है.
साउथ कोरिया के जॉइंट चीफ़्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि ये लॉन्च दोपहर करीब 1:20 बजे प्योंगयांग के पास के सुनान इलाके से डिटेक्ट किए गए.
दक्षिण कोरिया ने कहा कि उसने निगरानी बढ़ा दी है और अमेरिका और जापान के साथ जानकारी बारीकी से शेयर कर रहा है, जबकि साउथ कोरिया और अमेरिका की इंटेलिजेंस एजेंसियां इन मिसाइलों की खासियत और उड़ान की रेंज का एनालिसिस कर रही हैं. चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार दक्षिण कोरिया की सेना पूरी तरह से तैयार है और अतिरिक्त लॉन्च के खिलाफ कड़ी निगरानी रखते हुए, अमेरिका और जापान के साथ उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलों से जुड़ी जानकारी साझा कर रही है.
इसमें कहा गया, "हमारी सेना पूरी तरह से तैयार है और अतिरिक्त लॉन्च के खिलाफ कड़ी निगरानी रखते हुए, अमेरिका और जापान के साथ उत्तर कोरिया की बैलिस्टिक मिसाइलों से जुड़ी जानकारी साझा कर रही है।"
यह लॉन्च 27 जनवरी को हुए लॉन्च के 47 दिन बाद नॉर्थ कोरिया का पहला बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट था. यह इस साल नॉर्थ का तीसरा मिसाइल लॉन्च भी है.
10 मिसाइलें दागना असामान्य
एक ही बार में 10 से ज़्यादा मिसाइलें दागना असामान्य माना जाता है और इसे आम तौर पर अपनी ताकत का प्रदर्शन समझा जाता है.
यह लॉन्च अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नॉर्थ कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ बातचीत में दिलचस्पी दिखाने की संकेतों के एक दिन बाद हुआ है.
जापान के कोस्ट गार्ड ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह प्रोजेक्टाइल समुद्र में गिर गया है.
खबरों के मुताबिक ट्रंप ने उत्तर कोरिया के प्रधानमंत्री किम मिन-सियोक से कहा कि उनके किम के साथ अच्छे संबंध हैं, और उन्होंने पूछा कि क्या उत्तर कोरियाई नेता वॉशिंगटन के साथ बातचीत फिर से शुरू करने को तैयार हैं.
जानकारों का कहना है कि यह लॉन्च दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास 'फ्रीडम शील्ड' के विरोध में भी हो सकता है. ये बड़े पैमाने के अभ्यास 9 मार्च को शुरू हुए थे और 19 मार्च तक चलने वाले हैं.
इस हफ्ते की शुरुआत में नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग-उन की ताकतवर बहन किम यो-जोंग ने अमेरिका-उत्तर कोरिया के बीच चल रहे फोजी अभ्यासों की निंदा की और उत्तर कोरिया की सुरक्षा को नुकसान पहुंचने पर "अकल्पनीय रूप से भयानक नतीजों" की चेतावनी दी थी.
क्या है ऑपरेशन फ्रीडम शील्ड
ऑपरेशन फ्रीडम शील्ड दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच होने वाला वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है. यह रक्षा-उन्मुख ट्रेनिंग है, जो कोरियाई थिएटर ऑफ ऑपरेशंस को दर्शाता है. यह संयुक्त अभ्यास न सिर्फ जल थल और नभ में अंजाम दिया जाता है बल्कि इसका विस्तार साइबर और स्पेस डोमेन भी है. इसमें Combined Forces Command, USFK, UNC और ROK JCS शामिल होते हैं.
इसका उद्देश्य संयुक्त रक्षा क्षमता मजबूत करना, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना और उत्तर कोरिया जैसे खतरों के खिलाफ तैयार रहना है. अभी ऑपरेशन फ्रीडम शील्ड का मौजूदा सेशन चल रहा है.
रणनीतिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण
प्योंगयांग के सरकारी मीडिया के अनुसार नॉर्थ कोरिया ने हाल ही में डिस्ट्रॉयर 'चो ह्योन' से रणनीतिक क्रूज़ मिसाइलों का परीक्षण भी किया, जिसमें नॉर्थ कोरियाई नेता ने "ताकतवर और भरोसेमंद परमाणु युद्ध निवारक" को बनाए रखने और उसका विस्तार करने की जरूरत पर जोर दिया.
नॉर्थ कोरिया ने पिछली बार 27 जनवरी को पूर्वी सागर की ओर कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिसके बारे में उसने कहा था कि इसका मकसद एक नए बड़े कैलिबर वाले मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का परीक्षण करना था.
उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच दुश्मनी क्यों है?
उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच अदावत की जड़ें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही है. जब कोरिया प्रायद्वीप को अमेरिका और सोवियत संघ ने विभाजित कर दिया. इसके बाद उत्तर में कम्युनिस्ट शासन (किम इल-सुंग) और दक्षिण में अमेरिका समर्थित गणतंत्र (सिंगमन री) स्थापित हुआ.
1950 में उत्तर कोरिया ने दक्षिण पर आक्रमण कर कोरियाई युद्ध शुरू किया, जिसमें अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के तहत दक्षिण का साथ दिया. चीन ने उत्तर का समर्थन किया. ये युद्ध 1953 में सीजफायर के साथ समाप्त हुआ, लेकिन शांति संधि कभी नहीं हुई. आज भी DMZ (डिमिलिटराइज्ड ज़ोन) पर तनाव बना रहता है. इसमें अमेरिका की भूमिका निर्णायक रही है. वह दक्षिण कोरिया का प्रमुख सैन्य सहयोगी है. म्यूचुअल डिफेंस ट्रीटी के तहत लगभग अमेरिका ने अपने हजारों सैनिक दक्षिण कोरिया में तैनात कर रखे हैं.
उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल परीक्षणों के खिलाफ अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगा रखे हैं. इसके अलावा THAAD जैसे सिस्टम तैनात किए और दक्षिण कोरिया की रक्षा का वादा किया।. अमेरिका की मौजूदगी उत्तर कोरिया के लिए खतरा बनी हुई है, जबकि दक्षिण कोरिया के लिए सुरक्षा की गारंटी. यह विभाजन और शत्रुता शीत युद्ध की विरासत है, जो आज भी परमाणु खतरे और क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बनी हुई है.