वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का पॉलिटिकल करियर 40 साल पहले शुरू हुआ था. 1986 में वह एक साल की आइडियोलॉजिकल ट्रेनिंग लेने के लिए क्यूबा गए. ये हाई स्कूल के बाद उनकी एकमात्र फॉर्मल एजुकेशन थी. क्यूबा से लौटने के बाद मादुरो की जिंदगी ने मोड लिया और राजधानी काराकस के सबवे सिस्टम में वे बस ड्राइवर बन गए.
क्यूबा की कम्युनिस्ट व्यवस्था में ट्रेनिंग लेने वाले अपने देश आकर जल्द ही एक यूनियन लीडर बन गए. 1990 के दशक में वेनेजुएला की इंटेलिजेंस एजेंसियों ने उन्हें क्यूबा सरकार से करीबी संबंध रखने वाले एक लेफ्टिस्ट रेडिकल के तौर पर पहचानती थी.
बात आगे बढ़ती है. वेनेजुएला में वाम लहर चल रही थी. आंदोलन और अनशन आम बातें थी. इसी दौरान 4 फरवरी 1992 को लेफ्टिनेंट कर्नल ह्यूगो शावेज ने कार्लोस आंद्रेस पेरेज की सरकार के खिलाफ तख्तापलट किया. ह्यूगो शावेज वेनेजुएला के एक और 'क्रांतिकारी' थे.
सरकार बदलने की ये कोशिश असफल रही और शावेज गिरफ्तार कर लिए गए.
मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई...
मादुरो पर लेफ्ट का प्रभाव था और वे शावेज की विचारधारा के समर्थक थे. उन्होंने ह्यूगो शावेज की रिहाई के लिए अभियान चलाया और वामपंथी विचारधारा के प्रखर आवाज बनकर उभरे. तब उनकी भावी पत्नी सिलिया फ्लोरेस शावेज की लीगल टीम में थीं और युवा वकील थी.
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1994 में मादुरो और सिलिया जेल में शावेज से मिले. मादुरो खुद कहते हैं – "मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई जब मैं ह्यूगो शावेज से मिला." वो शावेज के करीबी हो गए बोलिवेरियन मूवमेंट में शामिल हुए.
शावेज 1998 में राष्ट्रपति बने तो मादुरो वेनेजुएला की नेशनल असेंबली में पहुंचे. इसके बाद विदेश मंत्री बने, पार्टी के वाइस प्रेसिडेंट बने और 2013 में शावेज की मौत के बाद राष्ट्रपति.
मादुरो खुद को मार्क्सवादी, ईसाई और बोलिवेरियन बताते हैं. वे खुद को साइमन बोलिवर की स्वतंत्रता की भावना से प्रेरित बताते हैं. लेकिन इसे वे आधुनिक समाजवाद के साथ मिलाकर वेनेजुएला में प्रयोग कर रहे थे.
मादुरो की विचारधारा एंटी-इंपीरियलिस्ट है, जिसमें अमेरिका को मुख्य दुश्मन माना जाता है. वे गरीबों के लिए सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों, जैसे मिशन बोलिवरियनो पर जोर देते हैं, लेकिन आलोचक इसे पॉपुलिस्ट बताते हैं.
शावेज ने आखिरी भाषण में मादुरो बनाया उत्तराधिकारी
शावेज़ ने 2013 में अपनी मौत से पहले देश को दिए अपने आखिरी भाषण में मादुरो को अपना उत्तराधिकारी बनाया और अपने समर्थकों से कहा कि अगर उनकी मौत हो जाती है तो वे तत्कालीन विदेश मंत्री मादुरो को वोट दें. इस चुनाव से समर्थक और विरोधी दोनों हैरान रह गए.
फर्स्ट लेडी नहीं फर्स्ट लड़ाकू
मादुरो ने जुलाई 2013 में राष्ट्रपति बनने के कुछ ही समय बाद अपनी लगभग दो दशक पुरानी पार्टनर फ्लोरेस से शादी की. उन्होंने उन्हें फर्स्ट लेडी के बजाय "पहली लड़ाकू" कहा, और उन्हें एक महत्वपूर्ण सलाहकार माना.
मादुरो के पूरे राष्ट्रपति कार्यकाल में एक सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संकट रहा. नीतियों में खामियां, प्रतिबंध और मनमानी फैसलों ने वेनेजुएला में लाखों लोगों को गरीबी में धकेल दिया. 77 लाख से ज़्यादा वेनेज़ुएला के लोग पलायन करने पर मजबूर हुए. मादुरो ने उन सभी संस्थानों से ऐसे लोगों को हटाकर दमनकारी तंत्र को और मज़बूत किया, जिन्होंने भी उनका विरोध करने की हिम्मत की.
मादुरो ने अवाम को रोटी के लिए सड़क पर खड़ा कर दिया
मादुरो तमाम कोशिशों के बावजूद आर्थिक गिरावट को रोक नहीं पाए. महंगाई और खाने-पीने की चीज़ों और दवाओं की भारी कमी ने पूरे वेनेजुएला के लोगों को प्रभावित किया. पूरे-पूरे परिवार भूखे रहने लगे और पैदल ही पड़ोसी देशों में जाने लगे. जो लोग वहीं रह गए, वे चावल, बीन्स और दूसरी ज़रूरी चीज़ें खरीदने के लिए घंटों लाइन में लगे रहते थे. कुछ लोग तो आटे के लिए सड़कों पर लड़ने लगे.
मादुरो के शासन में वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था 2012 और 2020 के बीच 71% सिकुड़ गई, जबकि महंगाई 130,000% से ज़्यादा हो गई. देश की लाइफलाइन कही जाने वाली तेल उत्पादन, घटकर रोज़ाना 400,000 बैरल से भी कम हो गया.
वेनेजुएला का राजनीतिक इतिहास
वेनेजुएला ने 1830 में ग्रैन कोलंबिया से अलग होकर स्वतंत्रता प्राप्त की. 19वीं सदी में इस देश में सैन्य तानाशाही का दौर रहा और राजनीतिक अस्थिरता बनी रही. लेकिन 20वीं सदी में तेल की खोज से अर्थव्यवस्था बदली. पैसा आया लेकिन लोकतंत्र नहीं आ सका. इस देश में
1958 तक तानाशाही चली. 1958 से लोकतंत्र का आगमन हुआ और दो मुख्य पार्टियां सत्ता में रहीं.
1990s में आर्थिक संकट से ह्यूगो शावेज उभरे और 1999 में राष्ट्रपति बने. उन्होंने देश में बोलिवेरियन क्रांति शुरू की. जो समाजवाद और एंटी-अमेरिकन नीति पर आधारित थी.