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ईरान के मिसाइल हमलों के कुछ घंटे बाद नेतन्याहू सार्वजनिक रूप में नजर आए, बोले- बदलाव जरूरी

ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय और अन्य सैन्य स्थलों पर मिसाइल हमले किए. इस दावे के कुछ घंटे बाद नेतन्याहू सार्वजनिक रूप से बीत शमेश में दिखाई दिए और कहा कि अमेरिकी-इजराइली अभियान का मकसद नागरिकों की रक्षा और ईरान में बदलाव लाना है. हमले और संघर्ष अब लेबनान तक फैल गए हैं.

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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Photo: Screengrab)
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Photo: Screengrab)

ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सोमवार को दावा किया कि उसने इजरायल के सरकारी और सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं. इसमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कार्यालय, तेल अवीव के सुरक्षा स्थल, हाइफा और ईस्ट जेरूसलम शामिल हैं. गार्ड्स ने बयान में कहा कि “ज़ायोनिस्ट शासन के अपराधी प्रधानमंत्री का कार्यालय और एयर फोर्स कमांडर का मुख्यालय निशाना बनाया गया.

ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी-इजराइली हमलों के जवाब में की गई है. संयुक्त अमेरिकी-इजराइली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अभियान कानूनी आत्मरक्षा के तहत किया गया है और इजरायल के ठिकानों और अमेरिकी बेस पर लगातार हमले हो रहे हैं.

नेतन्याहू सार्वजनिक रूप से बीत शमेश में दिखाई दिए
 

दावे के कुछ घंटे बाद, नेतन्याहू बीत शमेश में हुए मिसाइल हमले के स्थल पर सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए, जिसमें नौ लोग मारे गए. उन्होंने कहा कि ईरान का आतंकवादी शासन नागरिकों पर हमला करता है और हम नागरिकों की रक्षा के लिए आतंकवादी शासन पर हमला कर रहे हैं. इसमें बड़ा अंतर है.

 

ईरान ने अब तक दस चरणों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घोषणा की है. इजरायली सेना ने कहा कि ईरान से मिसाइलें दागी गई हैं और उनकी रक्षात्मक प्रणालियां सक्रिय हैं. जेरूसलम में भी नई विस्फोट सुनाई दिए.

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नागरिकों की सुरक्षा और ईरान में बदलाव की जरूरत बताई
 

संपर्क और तनाव अब लेबनान तक फैल गया है. हिजबुल्लाह ने ईरान के समर्थन में हमले शुरू किए. इजरायल ने जवाबी कार्रवाई में बीरुत के हिजबुल्लाह-नियंत्रित क्षेत्रों और वरिष्ठ कमांडरों पर हवाई हमले किए. लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी ने कम से कम 31 लोगों की मौत और 149 घायल होने की जानकारी दी.

ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं. अमेरिकी-इजराइली हमलों का मकसद अस्तित्वगत खतरे को समाप्त करना और ईरान में बदलाव की परिस्थितियां बनाना बताया जा रहा है. इस बीच ईरान के भीतर भी विरोध और समर्थन के बीच विभाजन नजर आ रहा है.

मध्य पूर्व में बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति और वैश्विक प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है. तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्ग प्रभावित हो रहे हैं. इजरायल और ईरान दोनों ने अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ा दिया है और हवाई हमले लगातार जारी हैं.
 

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