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नेपाल: बालेन सरकार के खिलाफ जनाक्रोश, छात्र संघ भंग करने और गृहमंत्री के 'काले कारोबार' पर बवाल

नेपाल में बालेन शाह के नेतृत्व वाली दो-तिहाई बहुमत की सरकार को बने अभी एक महीना भी नहीं हुआ कि पूरे देश में विरोध शुरू हो गया है. छात्र संघों को खारिज करने के फैसले और गृहमंत्री सुदन गुरुंग पर मनी लॉन्ड्रिंग व अवैध संपत्ति के गंभीर आरोपों ने जनता को सड़कों पर उतार दिया है.

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नेपाल में फिर विरोध प्रदर्शन (File Photo: ITG)
नेपाल में फिर विरोध प्रदर्शन (File Photo: ITG)

नेपाल में बालेन शाह सरकार के नीतिगत फैसलों के खिलाफ जनसैलाब उमड़ पड़ा है. काठमांडू की सड़कों से लेकर सत्ता के केंद्र सिंहदरबार तक विरोध की गूंज सुनाई दे रही है. इस जनाक्रोश की सबसे बड़ी तस्वीर तब दिखी, जब हजारों स्कूली छात्र अपनी यूनिफॉर्म में ही प्रोटेस्ट करने निकल पड़े. छात्र संगठनों ने सरकार पर संवाद के बजाय दमनकारी रवैया अपनाने और छात्र संघों को खारिज करने का आरोप लगाया है. 

इसके अलावा, भारत से 100 रुपये से ज्यादा का सामान लाने पर अनिवार्य कस्टम ड्यूटी लगाने के फैसले ने सीमावर्ती इलाकों के लोगों में भारी गुस्सा भर दिया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह पॉलिसी आम जनता पर गैर-जरूरी आर्थिक बोझ है. 

विरोध का एक प्रमुख केंद्र गृहमंत्री सुदन गुरुंग भी हैं, जिनकी अवैध संपत्ति और संदिग्ध कारोबार को लेकर इस्तीफे की मांग तेज हो गई है. सियासी दलों और नागरिक समूहों का आरोप है कि सरकार जनविरोधी नीतियों को थोप रही है.

मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप

विरोध प्रदर्शनों के बीच गृहमंत्री सुदन गुरुंग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं. नेपाल की मीडिया में प्रकाशित दस्तावेजों के मुताबिक, गुरुंग पर आय से ज्यादा संपत्ति और शेयर बाजार में बिचौलियों के साथ मिलकर संदिग्ध कारोबार करने का आरोप है. दावा किया गया है कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद दीपक भट्ट के साथ आर्थिक लेनदेन किया और कई कंपनियों में 50 लाख रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे. इसके अलावा, उनके आईएनजीओ (INGO) 'हामी नेपाली' में मिली रकम को व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर करने के प्रमाण भी सामने आए हैं, जिसके बाद उनके इस्तीफे की मांग को लेकर दबाव बढ़ गया है.

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इस आंदोलन का सबसे प्रभावी पहलू स्कूली छात्रों की भागीदारी है. बड़ी तादाद में छात्र-छात्राएं हाथों में प्लेकार्ड लेकर सरकार के फैसलों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि सरकार छात्र संगठनों की आवाज दबा रही है, जिससे शिक्षा क्षेत्र में असंतोष फैल गया है. यह विरोध अब सियासी लेवल तक सीमित न रहकर एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें युवा वर्ग सरकार की नीतियों को भविष्य के लिए खतरा मान रहा है.

यह भी पढ़ें: 100 रुपये से ज्यादा सामान पर लगा टैक्स... भारत-नेपाल सीमा पर नए नियम से मचा बवाल, व्यापारियों में चिंता

भारत से व्यापार और कस्टम ड्यूटी का तनाव

नेपाल सरकार ने भारत से आने वाले छोटे-मोटे सामानों पर भी कस्टम ड्यूटी लगा दी है, जिससे डेली लाइफ प्रभावित हो रही है. अपनी जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिक इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, बालेन सरकार का यह फैसला भारत के साथ व्यापारिक संबंधों और आम नागरिकों की जेब पर सीधा हमला है.

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