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Nepal Financial Crisis: ताश की गड्डियों पर फूंक डाले 100 करोड़! श्रीलंका के बाद नेपाल में आर्थिक मंदी

Nepal Financial Crisis: नेपाल में विदेशी मुद्रा में भारी कमी को देखते हुए कई वस्तुओं के आयात पर रोक लग गई है. नेपाल को डर है कि कहीं उसका भी हाल श्रीलंका जैसा ना हो जाए. इस बीच सामने आया है कि नेपाल में पिछले 5 साल के अंदर 100 करोड़ से ज्यादा के ताश आयात हुए.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मंदी से उबरने के लिए नेपाल ने कई वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया
  • विदेशी मुद्रा में भारी कमी और उच्च व्यापार घाटे से जूझ रहा नेपाल

श्रीलंका के बाद अब नेपाल भी आर्थिक मंदी (Nepal Economic Crisis) के खतरे से जूझ रहा है. आशंका जताई जा रही है कि कहीं नेपाल की हालत भी श्रीलंका जैसी ना हो जाए. आर्थिक मंदी से उबरने के लिए नेपाल ने कई वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसका कारण विदेशी मुद्रा में भारी कमी और उच्च व्यापार घाटा है. लेकिन आर्थिक मंदी के बीच नेपाल के कई गैर जरूरी चीजों के विदेशों से आयात करने की बात भी सामने आई है. नेपाल ने पिछले 5 साल में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की ताश की गड्डी विदेशों से आयात की है. 

दरअसल, नेपाल में सिर्फ कैसीनो में ही नहीं, बल्कि दशहरा, दिवाली जैसे मौके पर घर-घर में ताश खेलने की परंपरा है. नेपाल के आर्थिक मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक सिर्फ दिवाली के मौके पर ही देश के लोगों ने 9 करोड़ रुपए से अधिक के ताश आयात किए थे. यहां कम कीमत की ताश से लेकर हजारों रुपए की कीमत वाली गोल्ड प्लेटेड ताश का आयात भी किया जाता है. ताश का ज्यादातर आयात चीन से होता है, जबकि लग्जरियस ताश दुबई सहित तमाम यूरोपीय देशों से मंगाई जाती है. 

कोरोनाकाल में भी कम नहीं हुई ताश की दीवानगी

पिछले 21 महीनों में जब दुनिया कोरोना महामारी से त्रस्त थी. निम्न आयवर्ग के लोगों को खाने तक की किल्लत हो गई थी. ऐसे दौर में भी नेपाल ने करीब ढाई करोड़ पैकेट ताश आयात किए. इसके लिए देश के विदेशी मुद्रा भण्डार से 90 करोड़ रुपए खर्च किए गए. वहीं, जिस समय कोविड महामारी चरम पर थी, उस साल भी नेपाल ने 28 करोड़ 62 लाख 27 हजार रुपए के ताश आयात किए. पिछले साल के आखिरी महीने में ही 5 करोड़ की ताश का आयात किया गया था.

विदेश में रहते हैं नेपाल के 50 लाख लोग

नेपाल की जनसंख्या 2 करोड़ 65 लाख के आसपास है. इनमें से 50 लाख विदेशों में रहते हैं. ऐसे में अगर देश में 21 महीनों में ही 2 करोड़ 26 लाख 87 हजार 700 पैकेट ताश का आयात हो रहा है तो सरकार की चिन्ता स्वाभाविक है. 

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