नेपाल एक बार फिर से नए नेतृत्व के लिए तैयार है. नेपाल में जेन Z की क्रांति के बाद भारत के इस पड़ोसी देश में एक बार फिर से चुनाव की सरगर्मी है. इस बार नेपाल में ओल्ड गार्ड वर्सेज न्यूज ब्लड के बीच का चुनाव है. यह नेपाल की राजनीति में युवा पीढ़ी और पुरानी नेतृत्व वाली पार्टियों के बीच पीढ़ियों के संघर्ष का निर्णायक दौर है.
इस चुनाव में 74 साल के केपी शर्मा ओली, 35 साल के बालेन्द्र शाह और 49 साल के गगन थापा के बीच टक्कर देखने को मिल रहा है.
सितंबर की क्रांति के बाद नए प्रधानमंत्री को चुनने के लिए 5 मार्च को वोट डालने जा रहा है. सितंबर 2025 में Gen Z आंदोलन ने पूरे देश में हलचल मचा दी. भ्रष्टाचार, खराब शासन और पुराने नेताओं की सत्ता पर पकड़ ने युवा में तीव्र गुस्सा भर दिया और वे सड़कों पर उतर आए. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा.
इसके बाद पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, संसद भंग हुई और नए चुनाव की घोषणा हुई.नेपाल के युवा इसे "पुरानी व्यवस्था" को उखाड़ फेंकने का सुनहरा मौका मान रहे हैं. आंदोलन के दौरान चर्चित चेहरा बने काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह बालेन ने पीएम बनने के लिए मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है और पूरी ताकत के साथ चुनाव में कूद गए हैं.
पूर्व पीएम ओली को सीधे टक्कर दे रहे हैं बालेन शाह
पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा देने के बाद बालेन रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल हो गए हैं. इस पार्टी ने उन्हें अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है.
बालेन के करीबी सूत्रों के अनुसार, वह पूर्वी नेपाल के कोशी प्रांत के झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से आम चुनाव लड़ रहे हैं, ये वही सीट है जहां से नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के अध्यक्ष और हाल ही में पद से हटाए गए प्रधानमंत्री के पी शर्मा चुनाव लड़ते हैं.
इस तरह झापा-5 एक वीवीआईपी सीट हो गया है, जहां के मतदाता नेपाल का भावी पीएम चुनेंगे.
ओली के इस्तीफे के बाद, जेन Z युवाओं ने बालेन से केयरटेकर सरकार का कार्यभार संभालने के लिए कहा था. लेकिन 35 साल के रैपर से नेता बने बालेन ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने से मना कर दिया था, और कहा था कि वह इसके बजाय पूरे कार्यकाल के लिए संसदीय चुनाव लड़कर सरकार का नेतृत्व करना चाहेंगे.
74 के ओली बनाम 35 के बालेन
बालेंद्र शाह ने एक इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर मेयर का चुनाव जीता था. उन्होंने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया ताकि 20 जनवरी को संसदीय चुनाव के लिए नॉमिनेशन फाइल कर सकें, यह तारीख चुनाव आयोग ने नॉमिनेशन पेपर दाखिल करने के लिए तय की थी.
CPN-UML के चेयरमैन ओली को बालेन चुनौती देंगे, जिनकी उम्र ओली से आधी है, क्योंकि दोनों ने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से संसदीय चुनाव लड़ने की घोषणा की है, जिससे कोशी प्रांत का यह पूर्वी नेपाल जिला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है.
ओली पिछले तीन दशकों में 2008 में पहले संविधान सभा चुनाव को छोड़कर, छह बार झापा जिले से संसद के लिए चुने गए हैं.
नेपाली कांग्रेस ने 49 वर्ष के थापा को बनाया पीएम फेस
नेपाल में सर्दियों की ठंड के बावजूद चुनाव की गर्मी है. नेपाल की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) ने आधिकारिक तौर पर हाल ही में हटाए गए प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली, 74, को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है.
वहीं नेपाल की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने 49 साल से कम उम्र के गगन थापा को अपना पीएम कैंडिडेट घोषित किया है.
49 साल के गगन थापा पिछले हफ़्ते नेपाली कांग्रेस (NC) के अध्यक्ष चुने गए. उनके चुने जाने के तुरंत बाद पार्टी के उपाध्यक्ष बिश्व प्रकाश शर्मा ने घोषणा की कि थापा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे.
वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता चरण प्रसाई ने कहा, "नेपाली कांग्रेस के एक डायनामिक नेता गगन थापा, जो Gen Z युवाओं की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं, के अध्यक्ष पद पर चुने जाने से मौजूदा चुनावी परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है."
ओली के सामने युवाओं का गुस्सा
जेन Z के युवाओं ने पिछले साल सितंबर में अपने आंदोलन को दबाने के लिए जरूरत से ज़्यादा बल प्रयोग करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली और नेपाली कांग्रेस के तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक को ज़िम्मेदार ठहराया है. इस आंदोलन में 77 लोगों की जान चली गई थी.
ओली पहले ही चार बार प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले चुके हैं. अपने पिछले कार्यकाल में ओली को जेन Z के विरोध प्रदर्शनों के दूसरे दिन एक आर्मी हेलीकॉप्टर से भागना पड़ा था.
नेपाल समाचारपत्र की वरिष्ठ पत्रकार सरस्वती कर्माचार्य ने कहा, "ओली के लिए जिन्होंने चतुराई से पार्टी के अंदर अपने विरोधियों को किनारे कर दिया और इसके निर्विवाद नेता के रूप में उभरे, इस बार संसदीय चुनाव न केवल एक कठिन चुनौती होगी, बल्कि उनके प्रतिद्वंद्वी पूर्व मेयर बालेन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, यह उनके पांच दशक से ज़्यादा लंबे राजनीतिक करियर के लिए भी खतरा बन सकता है."
यह चुनाव नेपाल की राजनीति में "पुराना vs नया" का सबसे बड़ा टेस्ट है. अगर नई पीढ़ी जीतती है तो नेपाल की राजनीति पूरी तरह बदल सकती है, लेकिन अगर ओली फिर से जनता का विश्वास जीतने में कायम होते हैं तो जेन Z को का कथित आंदोलन सवालों के घेरे में आएगा.