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लीबिया के तानाशाह रहे मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की गोली मारकर हत्या

लीबिया के पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे और कभी देश के सबसे ताकतवर शख्स रहे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की हत्या कर दी गई है. उनके कार्यालय के मुताबिक, अज्ञात बंदूकधारियों ने उनके घर में घुसकर इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया, जिससे लीबिया में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.

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हत्या के वक्त सैफ अल-इस्लाम अपने बगीचे में मौजूद थे. (Photo: ITG)
हत्या के वक्त सैफ अल-इस्लाम अपने बगीचे में मौजूद थे. (Photo: ITG)

लीबिया के पूर्व नेता मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की उनके घर पर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है. सैफ अल-इस्लाम के कार्यालय द्वारा मंगलवार को जारी एक बयान के मुताबिक, उनके घर में घुसे चार अज्ञात बंदूकधारियों के साथ हुई "सीधी मुठभेड़" के दौरान वे मारे गए. 

अल अरबिया के मुताबिक, गद्दाफी परिवार ने बताया कि यह हत्या उस वक्त हुई, जब सैफ अल-इस्लाम अपने बगीचे में मौजूद थे, हमलावरों ने उन पर गोलियां चलाईं और तुरंत मौके से फरार हो गए. मुअम्मर गद्दाफी के उत्तराधिकारी माने जाने वाले सैफ अल-इस्लाम ने एक दशक तक कैद और गुमनामी में रहने के बाद राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की कोशिश की थी. 

हालांकि, वे किसी आधिकारिक पद पर नहीं थे, लेकिन अपने पिता के चार दशक लंबे शासन के दौरान उन्हें देश का सबसे ताकतवर शख्स माना जाता था. फिलहाल, इस हत्याकांड की ज्यादा जानकारी पब्लिक नहीं की गई है.

बगीचे में हुआ हमला, फरार हुए हत्यारे

सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की हत्या की खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. गद्दाफी परिवार के सदस्यों ने मीडिया को जानकारी दी है कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे. जब सैफ अल-इस्लाम अपने घर के गार्डन में थे, तभी चार लोगों ने उन पर हमला बोल दिया. गोलीबारी के तुरंत बाद हत्यारे वहां से भागने में सफल रहे. इस घटना के बाद लीबिया के राजनीतिक हलकों में तनाव बढ़ गया है क्योंकि सैफ अल-इस्लाम एक बार फिर सियासत में एक्टिव होने की कोशिश कर रहे थे.

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पावरफुल उत्तराधिकारी से गुमनामी तक का सफर

लीबिया के तेल समृद्ध देश में सैफ अल-इस्लाम का रसूख कभी उनके पिता मुअम्मर गद्दाफी के बराबर था. साल 2011 में पिता की सत्ता जाने के बाद, उन्हें एक दशक तक एक दूरदराज के पहाड़ी शहर में कैद और गुमनामी में रहना पड़ा. कैद से रिहा होने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी पेश की थी, जिससे देश में चुनाव कराने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा था. लंबे वक्त तक सार्वजनिक नज़रों से ओझल रहने के बाद उनकी इस तरह अचानक हत्या होना कई सवाल खड़े करता है.

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