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लाहौर: 80 साल बाद खुला ऐतिहासिक गुरुद्वारा... बंटवारे के बाद पहली बार गूंजी गुरबाणी

कॉलेज के प्रिंसिपल तुराब हुसैन ने इस आयोजन को आध्यात्मिक और ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद पहली बार गुरुद्वारे में प्रार्थना का आयोजन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ की शुरुआत का प्रतीक है. उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य में साम्प्रदायिक सौहार्द, पारस्परिक सम्मान और समझ को बढ़ावा देंगे.

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लाहौर स्थित एचीसन कॉलेज में स्थित गुरुद्वारे में अरदास का आयोजन किया गया. (Photo- Social Media)
लाहौर स्थित एचीसन कॉलेज में स्थित गुरुद्वारे में अरदास का आयोजन किया गया. (Photo- Social Media)

पाकिस्तान के लाहौर स्थित प्रतिष्ठित एचीसन कॉलेज परिसर में लगभग 80 वर्षों बाद ऐतिहासिक गुरुद्वारे में सिखों द्वारा अरदास का आयोजन किया गया. कॉलेज प्रशासन ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह आयोजन संस्थान की 140वीं वर्षगांठ समारोह के तहत किया गया.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कॉलेज के मानद दूत डॉ. तरुणजीत सिंह बुटालिया ने बताया कि बुधवार को कॉलेज परिसर स्थित गुरुद्वारे में विशेष सिख प्रार्थना आयोजित की गई, जिसमें करीब 100 लोग शामिल हुए. उन्होंने इसे भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां विभाजन से पहले इसी गुरुद्वारे में नियमित रूप से प्रार्थना करती थीं.

डॉ. बुटालिया ने कहा कि उनके पिता, दादा और परदादा जब कॉलेज में पढ़ते थे, तब वे प्रतिदिन शाम को इस गुरुद्वारे में अरदास करते थे. उन्होंने बताया कि 1947 के भारत-पाक विभाजन के बाद कॉलेज में सिख छात्रों की संख्या समाप्त होने से यह गुरुद्वारा बंद हो गया था, हालांकि कॉलेज प्रशासन इसकी देखरेख करता रहा.

कॉलेज के प्रिंसिपल तुराब हुसैन ने इस आयोजन को आध्यात्मिक और ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद पहली बार गुरुद्वारे में प्रार्थना का आयोजन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ की शुरुआत का प्रतीक है. उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य में साम्प्रदायिक सौहार्द, पारस्परिक सम्मान और समझ को बढ़ावा देंगे.

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1886 में हुई थी कॉलेज की स्थापना

बता दें कि एचीसन कॉलेज का इतिहास काफी पुराना और गौरवशाली रहा है. कॉलेज की स्थापना 3 नवंबर 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही परिवारों और प्रमुख घरानों के बच्चों को शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी. कॉलेज परिसर में स्थित गुरुद्वारे की डिजाइन प्रसिद्ध सिख वास्तुकार राम सिंह ने तैयार की थी, जो उस समय के मेयो स्कूल ऑफ आर्ट्स से जुड़े थे, जिसे आज नेशनल कॉलेज ऑफ आर्ट्स के नाम से जाना जाता है.

गुरुद्वारे की नींव वर्ष 1910 में महाराजा भूपिंदर सिंह ने रखी थी. महाराजा भूपिंदर सिंह स्वयं 1904 से 1908 के बीच एचीसन कॉलेज के छात्र रह चुके थे. पटियाला राजघराने ने गुरुद्वारे के निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग भी दिया था. अगले एक-दो वर्षों में इसका निर्माण पूरा कर इसे नियमित धार्मिक गतिविधियों के लिए समर्पित कर दिया गया था, जहां सिख छात्र रोज शाम को प्रार्थना किया करते थे.

कॉलेज में मस्जिद और मंदिर भी है मौजूद

डॉ. बुटालिया ने बताया कि वर्तमान में भारत में एचीसन कॉलेज के लगभग 15 सिख पूर्व छात्र मौजूद हैं, जो इस गुरुद्वारे से जुड़ी अपनी यादों को आज भी संजोए हुए हैं. उन्होंने बताया कि गुरुद्वारे की काले-सफेद संगमरमर की फर्श और किले जैसी आंतरिक वास्तुकला इसकी खास पहचान रही है.

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एचीसन कॉलेज परिसर धार्मिक विविधता का प्रतीक भी रहा है. गुरुद्वारे के अलावा यहां विभाजन-पूर्व काल की एक मस्जिद और एक हिंदू मंदिर भी मौजूद है. कॉलेज की मस्जिद का निर्माण वर्ष 1900 में बहावलपुर के नवाब ने कराया था, जबकि हिंदू मंदिर की नींव 1910 में दरभंगा के महाराजा द्वारा रखी गई थी.

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