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अमेरिका से बातचीत के खिलाफ सड़कों पर उतरीं ईरानी महिलाएं! कर रहीं ये मांग

तेहरान में 'डिवोटेड डॉटर्स ऑफ ईरान' रैली में हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया. इस रैली में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध जताया गया. रैली में शामिल महिलाओं ने कहा कि अमेरिका के साथ शांति वार्ता का विरोध किया.

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ईरान में हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरी हैं (Photo: Reuters)
ईरान में हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरी हैं (Photo: Reuters)

ईरान की राजधानी तेहरान में शुक्रवार (17 अप्रैल) को आयोजित 'डिवोटेड डॉटर्स ऑफ ईरान' रैली में हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरानी महिलाओं की इस रैली में अमेरिका के साथ जारी बातचीत पर संदेह जताया गया.

यह मार्च इमाम हुसैन सेरेमोनियल स्क्वायर से शुरू हुआ और एंगेलाब स्ट्रीट होते हुए वालियासर इंटरसेक्शन तक पहुंचा. रैली के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ईरानी शासन ने कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे रास्ते पर निगरानी रखी.

रैली में शामिल कुछ महिलाओं ने अमेरिका के साथ बातचीत का विरोध किया. कई महिलाओं का कहना था कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और पिछले अनुभवों को देखते हुए वार्ता से ठोस नतीजे निकलना मुश्किल है. वहीं कुछ महिलाओं ने कहा कि देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं होना चाहिए.

ईरान युद्ध खत्म होने के बढ़े आसार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस वीकेंड पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान के साथ वार्ता हो सकती है. उन्होंने विश्वास जताया है कि ईरान युद्ध खत्म करने के लिए समझौता जल्द हो जाएगा.

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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने की घोषणा कर दी है. एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता में हुए 10 दिन के युद्धविराम की अवधि तक होर्मुज स्ट्रेट सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला रहेगा. यह युद्धविराम इजरायल और लेबनान के बीच लड़ाई रोकने के लिए कराया गया था, जहां इजरायल की सेना और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह आमने-सामने थे.

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम मार्ग माना जाता है. ऐसे में इसके खुले रहने की घोषणा को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का युद्ध शुरू होने से पहले ईरान में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए थे. ईरानी अधिकारियों की सख्त कार्रवाई में हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं. हालांकि, युद्ध के बाद ईरान में हवा का रुख बदला और सरकार के प्रति लोगों का समर्थन बढ़ता देखा गया है.

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