ईरान में गिरती करेंसी को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों को दो हफ्ते हो गए हैं. ईरान में 28 दिसंबर को तेहरान के बाजार से प्रदर्शन शुरू हुए थे. इन दो हफ्तों में कइयों की मौत हो चुकी है और हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बीच जुबानी जंग भी देखने को मिल रही है.
इंटरनेट बंद होने और फोन लाइनें कटी होने के कारण ईरान में विरोध प्रदर्शनों क अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो गया है. हालांकि, अमेरिका स्थित ह्यूमन राइटस एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, दो हफ्तों के विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या कम से कम 72 पहुंच गई है और 2,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं, ईरान के सरकारी टीवी सुरक्षाबलों की कैजुअल्टी के बारे में रिपोर्ट कर रही है और बताने की कोशिश कर रही है कि हालात नियंत्रण में हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार धमकी दे चुके हैं कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को मारा जाता है तो अमेरिका उन्हें बचाने के लिए आगे आएगा. इन धमकियों के बावजूद सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने कड़े कदम उठाने का संकेत दिया है.

इसी बीच शनिवार को ईरान के अटॉर्नी जरनल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी कि विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वालों को 'अल्लाह का दुश्मन' माना जाएगा, जो मौत की सजा का आरोप है. ईरानी सरकारी टीवी ने एक बयान में कहा है कि जो लोग दंगाइयों की मदद करेंगे, उन्हें भी इसी आरोप का सामना करना पड़ेगा.
वहीं, अमेरिका ने एक बार फिर चेतावनी दी है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए X पर लिखा, 'अमेरिका, ईरान के बहादुर लोगों का समर्थन करता है.' विदेश विभाग ने अलग से चेतावनी देते हुए कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप के साथ खेल मत खेलो. जब वह कहते हैं कि वह कुछ करेंगे, तो उनका मतलब वही होता है.'
ईरान क्या दिखाने की कोशिश कर रहा?
ईरान में 50 से ज्यादा शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. जबकि, ईरान की सरकारी टीवी में एक अलग तस्वीर दिखाने की कोशिश की जा रही है.
प्रदर्शन के कारण ईरान में इंटरनेट और टेलीफोन लाइनें बंद कर दी गई हैं. आम देशों की तुलना में ईरान में काम का हफ्ता शनिवार से शुरू होता है. प्रदर्शनों के कारण स्कूल-कॉलेज बंद हैं और ऑनलाइन क्लासेस चल रहीं हैं.
सरकारी टीवी पर ईरानी संगीतकार माजिद एंतेजामी का 'एपिक ऑफ खोर्रमशहर' का गाना बजाया जा रहा है और सरकार समर्थक प्रदर्शन दिखाए जा रहे हैं. यही गाना तब भी बजाया जा रहा था, जब पिछले साल जून में 12 दिन तक ईरान और इजरायल के बीच युद्ध चला था. इसका इस्तेमाल महसा अमीनी की 2022 में हुई मौत के बाद विरोध में अपने बाल काट रहीं प्रदर्शनकारी महिलाओं के वीडियो में भी किया गया था.

टीवी पर प्रदर्शनकारियों के सुरक्षाबलों पर गोली चलाने के वीडियो बार-बार दिखाए जा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों की तुलना 'दंगाइयों' और 'आतंकवादियों' से की जा रही है. सरकारी टीवी ने अपनी रिपोर्ट में शनिवार को कहा, 'कल रात कई हथियारबंद आतंकवादियों ने कई जगहों पर हमला किया और लोगों की निजी संपत्ति में आग लगा दी. लेकिन इसके बाद तेहरान और ज्यादातर प्रांतों में किसी भी तरह की अराजकता की कोई खबर नहीं थी.'
हालांकि, न्यूज एजेंसी एपी ने इन बातों का खंडन किया है और कई वीडियो दिखाए जिसमें उत्तरी तेहरान के सआदत आबाद इलाके में प्रदर्शन करते लोग दिख रहे हैं. प्रदर्शनकारी 'खामेनेई मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे हैं.
टीवी पर यह दिखाया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और सुरक्षाबलों पर हमला कर रहे हैं.
अभी भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन जारी
ईरान में 28 दिसंबर को प्रदर्शन शुरू हुए थे. तेहरान से शुरू हुए प्रदर्शन धीरे-धीरे देशभर में फैल गए. इस हफ्ते ईरान से निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की ओर से गुरुवार और शुक्रवार को इस्लामिक रिपब्लिक का विरोध करने के लिए घरों से बाहर निकलने की अपील की गई थी. इसके बाद बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, कई जगहों पर आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं.
रजा पहलवी अब भी अमेरिका से अपने वीडियो जारी कर रहे हैं और लोगों से सड़कों पर उतरने को कह रहे हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से ईरान का पुराना शेर और सूरज वाला झंडा और शाह के समय इस्तेमाल किए जाने वाले राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर प्रदर्शन करने की अपील की है.
कुछ प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों ने शाह के समर्थन में नारेबाजी की है और राजशाही का समर्थन किया है. ईरान में शाह के समर्थन में नारेबाजी करने पर मौत की सजा मिलती है लेकिन ताजा प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों पर इसका असर नहीं दिख रहा है. बताया जा रहा है कि ये विरोध प्रदर्शन अब ईरान के सभी 31 प्रांतों में 100 से ज्यादा शहरों में हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि अस्पतालों में लाशें एक के ऊपर एक पड़ी हुई हैं.
इससे पहले ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान की सरकार प्रदर्शनकारियों को मारती है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा. वहीं, खामेनेई ने ट्रंप को अपने देश पर ध्यान देने की सलाह दी थी.
ईरान में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
ईरान की करेंसी कई सालों में लगातार कमजोर हुई है. दुकानदारों का दावा है कि एक डॉलर की कीमत 14 लाख ईरानी रियाल तक पहुंच गई है. इसी के खिलाफ तेहरान के दुकानदारों ने 28 दिसंबर को प्रदर्शन शुरू किया था. प्रदर्शनकारियों ने खराब अर्थव्यवस्था के लिए इस्लामिक रिपब्लिक और खामेनेई को जिम्मेदार ठहराया है. प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारी 'खामेनेई मुर्दाबाद', 'इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद' और 'मुल्लाओं को जाना होगा' जैसे नारे लगा रहे हैं.
इस बीच, इस बात की चिंता भी जताई जा रही है कि इंटरनेट बंद होने से ईरान के सुरक्षाबलों को खूनी कार्रवाई करने का मौका मिलेगा. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी के बेटे अली रहमानी ने कहा कि 2019 के विरोध प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों को मार डाला था, इसलिए हम केवल सबसे बुरे की आशंका जता सकते हैं. उन्होंने कहा, 'वे एक तानाशाही शासन के खिलाफ लड़ रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं.'