ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है. इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी पूरी तरह वास्तविक है, लेकिन ट्रंप के फैसले किसी "ग्रैंड स्ट्रैटेजी" से नहीं, बल्कि आवेग और निजी सोच से संचालित होते हैं.
इंडिया टुडे से बातचीत में जॉन बोल्टन ने कहा, "ट्रंप ग्रैंड स्ट्रैटेजी के संदर्भ में नहीं सोचते. उनके पास कोई स्पष्ट दर्शन नहीं है." उन्होंने ट्रंप की विदेश नीति को "लेन-देन आधारित, तात्कालिक और एपिसोडिक" बताते हुए कहा कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि ट्रंप को व्यक्तिगत तौर पर क्या फायदेमंद लगता है.
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बोल्टन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान में वर्षों के सबसे बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं. खराब आर्थिक हालात से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सीधे धार्मिक शासन के खिलाफ नारेबाजी तक पहुंच चुका है. मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों से सड़कों पर बने रहने की अपील करते हुए कहा, "मदद रास्ते में है." उन्होंने यह भी कहा कि जब तक प्रदर्शनकारियों की "बेमतलब हत्याएं" नहीं रुकतीं, तब तक उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं.
जब बोल्टन से पूछा गया कि ट्रंप के "सबसे सख्त विकल्पों" से उनका क्या मतलब हो सकता है, तो उन्होंने कहा, "साफ तौर पर सैन्य बल एक विकल्प है." उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका और इजरायल पहले ही पिछले साल ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सैन्य कार्रवाई कर चुके हैं. बोल्टन ने कहा, "सैन्य कार्रवाई की धमकी असली है. वह करेंगे या नहीं, यह अभी कोई नहीं जानता."
बोल्टन ने ट्रंप की ओर से घोषित नए आर्थिक प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाए. ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है. इस पर बोल्टन ने कहा, "यह एक असाधारण आर्थिक बयान है." उन्होंने आगे कहा कि भारत जैसे देशों के लिए यह प्रभावी रूप से टैरिफ को 75 प्रतिशत तक ले जा सकता है.
हालांकि बोल्टन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ट्रंप के पास इन धमकियों के पीछे कोई स्पष्ट लक्ष्य है. उन्होंने कहा, "अच्छा होता अगर ट्रंप के पास कोई उद्देश्य होता." बोल्टन के मुताबिक, अगर लक्ष्य सत्ता परिवर्तन होता, तो रणनीति कुछ और होती. लेकिन सिर्फ प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सीमित हमला बेकार होगा.
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बोल्टन ने साफ कहा, "मैं मानता हूं कि सत्ता परिवर्तन ही लक्ष्य होना चाहिए. बिना किसी बड़े कार्यक्रम के सिर्फ सैन्य हमला करना बेकार है." इस तर्क को खारिज करते हुए कि अमेरिकी हमला ईरानी जनता को सरकार के साथ खड़ा कर देगा, बोल्टन ने कहा, "पिछले साल परमाणु ठिकानों पर हमला हुआ, लेकिन आज ईरान में लोग सड़कों पर 'आयतुल्लाह मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे हैं."
बोल्टन ने दावा किया कि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यह समय ईरानी शासन के लिए सबसे कमजोर है. बोल्टन ने कहा, "यह शासन अब तक के सबसे अलोकप्रिय दौर में है." उन्होंने यह भी जोड़ा कि नए सर्वोच्च नेता की नियुक्ति का समय शासन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है.
ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकियों को बोल्टन ने गंभीरता से नहीं लिया. उन्होंने कहा, "पिछली बार हमले के बाद उन्होंने कुछ नहीं किया." उनके मुताबिक, इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है.
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ट्रंप के टैरिफ ऐलान पर बोल्टन ने यह भी कहा कि अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट इसे असंवैधानिक ठहरा सकती है. उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को अवैध तेल शिपमेंट और 'घोस्ट शिप्स' पर सख्ती करनी चाहिए.
अंत में बोल्टन ने कहा, "ट्रंप को लेकर कुछ भी अनुमान लगाना मुश्किल है." लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ईरान वह मुद्दा है जिस पर ट्रंप हमेशा से आक्रामक रहे हैं. बोल्टन ने कहा, "यह ऐसा वक्त हो सकता है जब ट्रंप सरकार के खिलाफ बहुत कड़ा कदम उठाना अपने फायदे में समझें." उन्होंने कहा, "मुझे लगता है अगले कुछ दिनों में सब साफ हो जाएगा."