जंग के बीच ईरान के सत्ताधारी वर्ग में आपसी कलह शुरू हो गई है. वहां, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की माफी पर फूट पड़ गई है. दरअसल, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने खाड़ी देशों पर हुए हमलों के लिए माफी मांगी थी, साथ ही वहां हमला न करने का वादा भी किया था, जिससे कट्टरपंथी नाराज हो गए हैं. इसी वजह से पेजेशकियान के भरोसा दिलाए जाने के बाद भी खाड़ी देशों पर ईरानी अटैक जारी है.
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा था, 'मैं व्यक्तिगत रूप से उन पड़ोसी देशों से माफी मांगता हूं जो ईरान की कार्रवाइयों से प्रभावित हुए हैं.' और उनसे गुजारिश की थी कि वे ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों में शामिल न हों.
पेजेशकियान ने ट्रंप की बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग को 'एक सपना' कहकर खारिज कर दिया था, साथ ही कहा था कि ईरान की अस्थायी नेतृत्व परिषद ने पड़ोसी राज्यों पर हमले निलंबित करने पर सहमति जताई है, जब तक कि ईरान पर हमले उनके इलाके से नहीं किए जाते. बावजूद इसके ट्रंप ने इस 'माफी' को 'आत्मसमर्पण' करार दिया, साथ ही कहा कि शनिवार को 'बहुत कड़ा प्रहार' किया जाएगा और चेतावनी दी कि अमेरिका अपने हमलों का दायरा बढ़ा सकता है.
ईरानी राष्ट्रपति से सीनियर कमांडर्स नाराज
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, पेजेशकियान के माफी वाले बयान ने ईरान में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी, जिसके चलते उनके कार्यालय को यह दोहराना पड़ा कि ईरान की सेना क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों से होने वाले हमलों का तगड़ा जवाब देगी.
कुछ घंटों बाद, राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर अपने बयान को फिर पोस्ट किया, लेकिन अपने भाषण से माफी को हटा दिया, जिसने शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स समेत कट्टरपंथियों को नाराज कर दिया था.
कट्टरपंथी धर्मगुरु और सांसद हामिद रसाई ने X पर लिखा, 'पेजेशकियान, आपका रुख गैर-पेशेवर, कमजोर और अस्वीकार्य था.' एक पूर्व कमांडर ने सोशल मीडिया पर पेजेशकियान के बयान की निंदा की.
न्यायपालिका के प्रमुख मोहसेनी-एजेई, जो सर्वोच्च नेता की शक्तियां अस्थायी रूप से संभालने वाली तीन सदस्यीय परिषद के एक कट्टरपंथी सदस्य हैं, ने कहा कि कुछ क्षेत्रीय देशों की जगह का इस्तेमाल खुले तौर पर और गुप्त रूप से ईरान के खिलाफ हमलों के लिए किया जा रहा है, और जवाबी हमले जारी रहेंगे.
इसी के तुरंत बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का बयान आया. कहा गया कि उनके ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी के पास अल धाफरा एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी एयर कमांड सेंटर पर हमला किया. दुबई में भी अटैक हुआ, जिसमें एक शख्स की मौत भी हो गई. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन, दोहा में भी हमले किए.
खामेनेई के करीबी रहे एक कट्टरपंथी ने, बताया है कि पेजेशकियान की बातों से रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई सीनियर कमांडर नाराज हो गए हैं.