अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट के बाहर तनाव देखा जा रहा है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका ने हिंद महासागर में ईरान से जुड़े एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया है. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को नए सैन्य हमलों की चेतावनी दे रहे हैं और तेहरान पर दबाव बढ़ा रहे हैं.
जब्त किए गए जहाज की पहचान 'स्काईवेव' के रूप में हुई है. अमेरिका ने इस टैंकर पर आरोप लगाया है कि यह ईरानी तेल की ढुलाई में शामिल था. इसी आरोप के चलते मार्च में इस जहाज पर अमेरिकी प्रतिबंध भी लगाए गए थे. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह जहाज ईरान के "शैडो फ्लीट" यानी उन जहाजों के नेटवर्क का हिस्सा था, जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचकर तेल निर्यात करने के लिए किया जाता है.
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शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, यह जहाज मंगलवार को मलेशिया के पश्चिमी इलाके से गुजरते हुए मलक्का स्ट्रेट पार कर चुका था. समुद्री कारोबार से जुड़े सूत्रों और लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के आंकड़ों के मुताबिक, जहाज में करीब 10 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद हो सकता है. बताया जा रहा है कि यह तेल फरवरी में ईरान के खार्ग द्वीप से लादा गया था, जो ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र माना जाता है.
अमेरिका ने पहले भी ईरानी जहाजों को किया जब्त
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ईरान से जुड़े तेल जहाजों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की हो. अप्रैल में भी अमेरिका ने हिंद महासागर में दो अन्य जहाजों 'मेजेस्टिक एक्स' और 'टिफानी' को जब्त किया था. अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि ये जहाज भी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ईरानी तेल की ढुलाई कर रहे थे.
दरअसल, अमेरिका लंबे समय से ईरान के तेल कारोबार और उसके परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. वॉशिंगटन का आरोप है कि ईरान तेल निर्यात से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल अपनी मिसाइल क्षमताओं और क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क को मजबूत करने में करता है. इसी वजह से ट्रंप प्रशासन लगातार नए प्रतिबंध और समुद्री कार्रवाई कर रहा है.
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अरब सागर में अमेरिका ने लगा रखी है नाकेबंदी
मौजूदा ऑपरेशन को ओमान की खाड़ी और अरब सागर में चल रही अमेरिकी नाकेबंदी से अलग बताया जा रहा है. अमेरिका पहले से ही ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी रख रहा है. इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता भी बढ़ी है, क्योंकि दुनिया के बड़े तेल मार्ग इसी क्षेत्र से गुजरते हैं.
इसी बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह ईरान पर नए सैन्य हमले का फैसला लेने से "सिर्फ एक घंटे दूर" थे, लेकिन खाड़ी देशों के अनुरोध पर उन्होंने फैसला टाल दिया. ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ईरान परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अमेरिकी शर्तें नहीं मानता, तो आगे और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं.