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'अब हमला किया, तो अमेरिका को देंगे खुली छूट', सऊदी ने ईरान को दी चेतावनी

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सऊदी अरब ने तेहरान को सख्त संदेश दिया. रियाद ने कहा कि वह कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन अगर सऊदी क्षेत्र या ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रहे तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी और अमेरिका को जमीन का इस्तेमाल करने की छूट दी जाएगी.

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ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान. (Photo- ITG)
ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान. (Photo- ITG)

अमेरिका और ईरान में जारी युद्ध के बीच सऊदी अरब ने तेहरान को साफ संदेश दिया है कि वह तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन अगर सऊदी अरब या उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रहे तो वे जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे. सऊदी अरब की तरफ से यह मैसेज उस बयान से पहले दिया गया था जिसमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने खाड़ी देशों से माफी मांगी थी.

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का कहना था कि ईरान की सैन्य कार्रवाई से पड़ोसी देशों में जो नुकसान हुआ, उसके लिए उन्हें खेद है. इसे क्षेत्र में बढ़ते गुस्से को शांत करने की कोशिश माना जा रहा था. हालांकि, उनके इस बयान पर नए अंतरिम शासन के बीच दरार पैदा हो गई. आईआरजीसी से लेकर अन्य धार्मिक नेता उनके विरोध में गए. बाद में राष्ट्रपति पेजेशकियान को अपना बयान वापस लेना पड़ा.

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि दो दिन पहले सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की थी. सूत्रों के अनुसार इस बातचीत में सऊदी अरब ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी. प्रिंस फैसल ने कहा था, "सऊदी अरब तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की हर कोशिश का समर्थन करता है."

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... तो US को दे सकते हैं जमीन के इस्तेमाल की इजाजत!

इस बातचीत में मंत्री ने यह भी कहा था कि न तो सऊदी अरब और न ही अन्य खाड़ी देशों ने अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए अपने हवाई क्षेत्र या जमीन का इस्तेमाल करने दिया है. हालांकि इसके साथ ही सऊदी अरब ने कड़ा संदेश भी दिया. सूत्रों के अनुसार प्रिंस फैसल ने कहा कि अगर ईरान की तरफ से सऊदी क्षेत्र या उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रहते हैं, तो रियाद को मजबूर होकर अमेरिकी सेना को अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति देनी पड़ सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस फैसल ने यह भी कहा था कि अगर देश की महत्वपूर्ण ऊर्जा सुविधाओं पर हमले जारी रहे तो सऊदी अरब जवाबी कार्रवाई करेगा. 28 फरवरी को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत टूटने के बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इसके बाद से सऊदी अरब अपने राजदूत के जरिए तेहरान के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है. इस पूरे मामले पर सऊदी अरब और ईरान के विदेश मंत्रालयों की ओर से आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है.

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सऊदी से लेकर कुवैत-कतर तक में ड्रोन-मिसाइल दाग रहा ईरान

पिछले एक हफ्ते में संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब पर ईरान की तरफ से ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं. युद्ध के पहले दिन ही ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया था.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अपने एक बयान में स्पष्ट किया था, "सऊदी अरब ने हमें भरोसा दिलाया है कि वह अपनी जमीन, समुद्र या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा."

राष्ट्रपति पेजेशकियान ने मांगी माफी, लेकिन...

इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि देश की अंतरिम नेतृत्व परिषद ने तब तक पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का फैसला किया है, जब तक कि उन देशों की ओर से ईरान पर हमला न किया जाए. उन्होंने कहा, "मैं व्यक्तिगत रूप से उन पड़ोसी देशों से माफी मांगता हूं जो ईरान की कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं." इस बयान पर विरोध के बाद उन्होंने अपना बयान वापस लिया और दूसरे बयान से माफी शब्द हटा दिए.

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