ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर जारी हिंसक कार्रवाई और अमेरिका की संभावित दखलअंदाजी को लेकर हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं. इसी बीच ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को कड़ी चेतावनी दी है, जिसके बाद कतर में मौजूद अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य एयरबेस से कुछ कर्मियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
रॉयटर्स के मुताबिक, वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि अगर वॉशिंगटन ने ईरान में चल रहे प्रदर्शनों के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला किया जाएगा. ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि सऊदी अरब, यूएई, तुर्की और कतर जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे भी इसके दायरे में आएंगे.
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तीन राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, कतर स्थित अमेरिकी अल-उदीद एयरबेस से कुछ सैन्य और गैर-सैन्य कर्मियों को बुधवार शाम तक वहां से हटने की सलाह दी गई है. हालांकि, इसे पूरी तरह से 'निकासी आदेश' नहीं बल्कि एक "पोश्चर चेंज" यानी सतर्कता के स्तर में बदलाव बताया गया है. अभी बड़े पैमाने पर सैनिकों को हटाने जैसे संकेत नहीं मिले हैं, जैसा पिछले साल ईरान के मिसाइल हमले से पहले देखने को मिला था.
ट्रंप ईरान को लगातार दे रहे धमकी
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को धमकी दे रहे हैं. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई या हिंसा जारी रही, तो अमेरिका “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेगा. एक टीवी इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "अगर उन्होंने लोगों को फांसी दी, तो आप कुछ ऐसा देखेंगे जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी.” ट्रंप ने ईरानियों से सड़कों पर डटे रहने और संस्थानों पर कब्जा करने की भी अपील की है और कहा है कि “मदद रास्ते में है."
ईरान प्रदर्शनों में 2600 लोगों की मौत
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ईरान में हालिया प्रदर्शनों के दौरान अब तक करीब 2600 लोगों की मौत हो चुकी है. ये पिछले कई वर्षों में इस्लामिक शासन के खिलाफ सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन माने जा रहे हैं.
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ट्रंप ने कर लिया ईरान में हस्तक्षेप का फैसला
एक इजरायली अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने हस्तक्षेप का फैसला कर लिया है, हालांकि उसकी समय-सीमा और दायरा अभी साफ नहीं है. वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच चल रही सीधी बातचीत भी फिलहाल रोक दी गई है, जिससे तनाव और बढ़ गया है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुरक्षा कैबिनेट को भी हालात की गंभीरता को लेकर ब्रीफ किया गया है. पिछले साल ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन तक चली जंग में अमेरिका भी शामिल हुआ था.