अमेरिका मध्य पूर्व में लगातार अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है. हाल के दिनों में अतिरिक्त युद्धपोत, फाइटर जेट और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती ने संकेत दिए हैं कि अगर कूटनीतिक वार्ता विफल होती है, तो सैन्य विकल्प अपनाया जा सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी इस बात को लगातार दोहरा रहे हैं.
अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमले का आदेश देते हैं, तो इसका असर सिर्फ ईरान तक ही सीमित नहीं रहेगा. सुप्रीम लीडर अली खामेनेई कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि ऐसी स्थिति में पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है.
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माना जाता है कि अगर हमले होते भी हैं तो यूएस के संभावित टारगेट क्या होंगे ये तय है लेकिन इसके नतीजे को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं. यहां सात संभावित हालात हैं जो इस संकट की दिशा तय कर सकते हैं.
1. ईरान पर सीमित हमले और राजनीतिक बदलाव
अमेरिका ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े ठिकानों, मिसाइल साइट्स और परमाणु कार्यक्रम के हिस्सों पर टारगेटेड हवाई और नौसैनिक हमले कर सकता है. संभावना भी यही जताई जा रही है कि अमेरिकी गठबंधन के टारगेट पर ईरानी लीडरशिप ही होगा. इस स्थिति में ईरानी नेतृत्व कमजोर पड़ सकता है और सत्ता परिवर्तन की राह खुल सकती है. हालांकि, इराक और लीबिया के उदाहरण बताते हैं कि शासक हटने के बाद भी लंबे समय तक अस्थिरता बनी रह सकती है.
2. मौजूदा शासन के नेतृत्व में बदलाव
दूसरी संभावना यह है कि सैन्य दबाव के बावजूद ईरान का नेतृत्व सत्ता में बना रहे, लेकिन अपनी नीतियों में बदलाव करे. इसमें क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को समर्थन कम करना, मिसाइल और परमाणु गतिविधियों को सीमित करना. आंतरिक सख्ती में ढील देना शामिल हो सकता है.
कुछ विश्लेषण इसे "वेनेजुएला मॉडल" से जोड़ते हैं, जहां बाहरी दबाव सत्ता परिवर्तन नहीं कर पाया लेकिन लीडरशिप में बदलाव होते ही नीतियों में बदलाव हुए. हालांकि, ईरान की मौजूदा व्यवस्था दशकों से बदलाव के दबाव का सामना करती रही है, इसलिए बड़े सुधार की संभावना कम मानी जाती है.
3. व्यवस्था कमजोर पड़े और सैन्य शासन उभरे
अगर अमेरिकी हमलों से ईरान में सत्ता ढांचा कमजोर होता है, लेकिन विरोध प्रदर्शन नियंत्रण नहीं संभाल पाते, तो सुरक्षा बल सीधे सत्ता में आ सकते हैं. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का राजनीति और अर्थव्यवस्था में गहरा प्रभाव है. हमले के बाद की अव्यवस्था में सैन्य नेतृत्व वाली सरकार उभर सकती है. अब तक के विरोध प्रदर्शनों में राज्य तंत्र के भीतर बड़े पैमाने पर टूट देखने को नहीं मिली है.
4. ईरान की जवाबी कार्रवाई
ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा. खामेनेई शासन ने साफ कहा है कि अमेरिकी ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं. ईरान बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन के जरिए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना सकता है, जिनमें कतर जैसे देश शामिल हैं. इसके अलावा वह उन देशों पर भी हमला कर सकता है जिन्हें वह अमेरिका का सहयोगी मानता है, जैसे इजरायल या जॉर्डन. खाड़ी के कई अरब देश आशंकित हैं कि अमेरिकी कार्रवाई का जवाब उनकी जमीन पर मिल सकता है.
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5. होर्मुज स्ट्रेट को किया जा सकता है बंदॉ
ईरान ओमान और अपने तट के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा सकता है या शिपमेंट्स में बाधा डाल सकता है. दुनिया की लगभग पांचवां हिस्सा तेल और गैस इसी मार्ग से गुजरता है. किसी भी हस्तक्षेप का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा. ऐसा कदम ईरान की अपनी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि वह भी तेल निर्यात पर निर्भर है.
6. शासन का पतन और अराजकता
संभावना यह भी है कि नेतृत्व गिर जाए, लेकिन उसके बाद स्पष्ट सत्ता संरचना उभरकर सामने न आए. करीब 9 करोड़ से अधिक आबादी वाले ईरान में आंतरिक संघर्ष छिड़ सकता है. कुर्द, बलूच और अजरबैजानी जैसे जातीय समूह नेतृत्व न होने की स्थिति में अपने इलाकों की सुरक्षा के लिए कदम उठा सकते हैं.