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ईरान-कतर की ये डील अगर हो जाती तो घर-घर में मच जाता हाहाकार! लेकिन नहीं माना तेहरान

ईरान-इजरायल जंग के दौरान कतर ने तेहरान के सामने एक खास प्रस्ताव रखा था. कतर चाहता था कि ईरान उसके सबसे बड़े गैस कॉम्प्लेक्स को निशाना न बनाए. बदले में वह ऐसा कदम उठाने को तैयार था जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट और गहरा सकता था.

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कतर ने ईरान से गैस फील्ड पर हमले न करने की अपील की थी. (Photo- ITG)
कतर ने ईरान से गैस फील्ड पर हमले न करने की अपील की थी. (Photo- ITG)

ईरान-इजरायल और अमेरिका की जंग के दौरान कतर ने ईरान के साथ एक ऐसी डील करने की कोशिश की थी, जो पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को हिला सकती थी. रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने इस प्रस्ताव को नहीं माना और बाद में कतर के उन अहम ठिकानों पर हमले भी किए.

वॉशिंगटन पोस्ट का दावा है कि जंग की शुरुआत में कतर ने ईरान से संपर्क किया था. कतर चाहता था कि ईरान उसके सबसे अहम ऊर्जा केंद्र रस लाफान गैस कॉम्प्लेक्स को निशाना न बनाए. इसके बदले में कतर अपनी गैस उत्पादन को रोकने पर विचार कर रहा था.

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रिपोर्ट के मुताबिक, कतर का मानना था कि अगर गैस उत्पादन बंद हो जाता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी. इससे अमेरिका और इजरायल पर युद्ध खत्म करने का दबाव बढ़ सकता था. लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी. रिपोर्ट की मानें तो 18 मार्च को ईरान ने रस लाफान और फारस की खाड़ी के अन्य गैस क्षेत्रों पर हमला कर दिया था. यह कार्रवाई इजरायल द्वारा ईरान के एक बड़े गैस क्षेत्र को निशाना बनाए जाने के जवाब में की गई थी.

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जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर कर दिया हमला

जंग 28 फरवरी को शुरू हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए. साथ ही उसने होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी भी कर दी, जिससे दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल कारोबार पर असर पड़ा और ऊर्जा कीमतों में उछाल आ गया.

रिपोर्ट में दावा किया गया कि कतर की तरफ से ईरान को भेजा गया संदेश एक खुफिया एजेंसी ने इंटरसेप्ट कर लिया था. इस एजेंसी ने ईरानी नेताओं की बातचीत पर नजर रखी हुई थी. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान ने कभी औपचारिक रूप से इस डील को स्वीकार नहीं किया.

कतर ने गैस फील्ड पर हमले को लेकर दी थी गलत जानकारी

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, जंग के तीसरे दिन कतर ने रस लाफान गैस कॉम्प्लेक्स को बंद कर दिया था और यह जानकारी फैली कि ईरानी हमले में उसे नुकसान पहुंचा है. लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों में शुरुआती दिनों में किसी बड़े नुकसान के स्पष्ट संकेत नहीं मिले. इसी वजह से रिपोर्ट में सवाल उठाए गए कि क्या कतर ने नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था.

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हालांकि, कतर ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. कतर के इंटरनेशनल मीडिया ऑफिस ने कहा कि युद्ध के दौरान ऊर्जा उत्पादन को लेकर ईरान के साथ किसी तरह का कोऑर्डिनेशन नहीं किया गया था. उसने यह भी कहा कि रस लाफान प्लांट को नुकसान पहुंचाने या उसे बंद करने को लेकर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं.

कतर का कहना है कि उस समय वह खुद ईरानी मिसाइल हमलों से अपने क्षेत्र की रक्षा कर रहा था. साथ ही उसने आरोप लगाया कि ऐसी खबरें उन लोगों द्वारा फैलाई जा रही हैं जो युद्ध खत्म कराने की कोशिशों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं और कतर-अमेरिका संबंधों को कमजोर करना चाहते हैं. फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.

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