इजरायल की राजधानी तेल अवीव के बॉसम याफो में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार हैं, जो अलग-अलग सेक्टरों में काम करते हैं. मैं यहां इसलिए आया क्योंकि सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें, अफवाहें और वायरल वीडियो सामने आ रहे हैं. इन वीडियो में यह कहा जा रहा है कि खतरे के वक्त शेल्टर लेने के लिए बंकर में जाने को लेकर भारतीयों को भेदभाव का सामना करना पड़ा रहा है और उनको परेशान किया जाता है. इन्हीं दावों की सच्चाई जानने के लिए मैंने यहां मौजूद भारतीयों से सीधा संवाद किया.
यहां रह रहे राजस्थान निवासी रोशन ने कहा, 'ऐसा बिल्कुल नहीं है कि हमें बंकर में जाने से रोका जाता है. जैसे ही सायरन बजता है, लोग हमें खुद बुलाकर अंदर ले जाते हैं. मैं यहां दो साल से रह रहा हूं और हर बार यही अनुभव रहा है कि सबसे पहले हमारी सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है.' उन्होंने यह भी बताया कि अगर कोई व्यक्ति बंकर में नहीं जाता, तो स्थानीय लोग उसे पकड़कर अंदर ले जाते हैं, ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
गुजरात के पोरबंदर निवासी मनसुख वाडा ने कहा कि यहां के लोगों का व्यवहार बेहद सहयोगी है. उन्होंने बताया, 'इतना प्यार मिलता है कि अगर हम बंकर में जाने में देर करें तो लोग नाराज हो जाते हैं और तुरंत अंदर भेजते हैं.' यहां काम करने वाले भारतीयों ने यह भी कहा कि जब भी सायरन बजता है, तो सभी एक-दूसरे की मदद करते हैं. रोशन ने कहा, 'जिसे नहीं पता होता, उसे समझाया जाता है. हम एक-दूसरे का ध्यान रखते हैं.'
घरवालों की चिंता को लेकर रोशन ने बताया कि भारत में परिवार वाले टीवी पर खबरें देखकर परेशान हो जाते हैं और फोन करते हैं. उन्होंने कहा, 'यहां घबराने जैसी कोई बात नहीं है, हर जगह बम शेल्टर बने हुए हैं और सुरक्षा के पूरे इंतजाम हैं.' उन्होंने यह भी अपील की कि अलर्ट मिलने पर लोग वीडियो बनाने के बजाय तुरंत बंकर में जाएं. रोशन ने कहा, 'सबसे पहले अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और आसपास जो भी दिखे, उसे भी साथ लेकर जाएं.'
मनसुख वाडा ने बताया, 'किसी भी साइट पर काम शुरू होने से पहले वहां बंकर बनाए जाते हैं. जब तक सुरक्षा के पूरे इंतजाम नहीं हो जाते, तब तक काम की अनुमति नहीं मिलती.' करीब 12 साल से इजरायल में रह रहे एक भारतीय ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने गाजा युद्ध, लेबनान के साथ संघर्ष और अन्य घटनाओं को करीब से देखा है. उन्होंने कहा, 'यहां मिसाइल हमले गंभीर होते हैं, इसलिए नियमों का पालन बेहद जरूरी है. अगर आप नियमों का पालन करते हैं, तो यहां सुरक्षित रह सकते हैं.'
इजरायल में भारतीयों के लिए रोजगार के अवसरों पर भी उन्होंने बात की और कहा, 'भारत से बड़ी संख्या में लोग यहां आ रहे हैं और आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ेगी. मिनिमम सैलरी एक लाख रुपये से ऊपर है और काम के लिए माहौल भी बेहतर है.' उन्होंने नए लोगों को सलाह दी कि वे डरकर इजरायन न छोड़ें और कहा, 'यहां आकर अपना करियर बनाइए और अपने लक्ष्यों को पूरा कीजिए. सिर्फ युद्ध के डर से वापस जाना सही नहीं है. मेरे अनुभव में इजरायल दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों में से एक है.'
बिहार के बक्सर से इजरायल आए धर्मेंद्र कुमार ड्राइवर हैं. उन्होंने कहा कि वह इजरायल के अलग-अलग शहरों में काम के सिलसिले में जाते हैं और उन्हें कहीं भी कोई बड़ी दिक्कत महसूस नहीं हुई. उन्होंने कहा, 'हम आराम से काम कर रहे हैं और कोई समस्या नहीं है.' इजरायल में मौजूद भारतीय नागरिकों से बात करने के बाद मैं कह सकता हूं कि सोशल मीडिया पर जो दावे किए जा रहे हैं, वे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते. ये सभी लोग भारत के अलग-अलग राज्यों से हैं और उनसे पहली बार बातचीत में यही समझ आया कि उनके अनुभव ही असली सच्चाई को सामने लाते हैं. अब फैसला आपको करना है कि आप अफवाहों पर भरोसा करना चाहते हैं या जमीनी हकीकत पर.