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'पड़ोसी देशों का सम्मान करते हैं लेकिन...', गर्ल्स स्कूल अटैक पर बोले ईरानी राजदूत

ईरान के राजदूत Mohammad Fathali ने पुष्टि की कि टॉमहॉक मिसाइल से हुए हमले में करीब 170 छात्राओं की मौत हुई, जो अमेरिकी सैन्य अड्डे से दागी गई थी। यह हमला गलती से स्कूल को सैन्य परिसर समझने के कारण हुआ.

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मिनाब स्कूल हमले पर ईरानी राजदूत ने सवालों के जवाब दिए. Photo Credits- Arun Kumar/India Today
मिनाब स्कूल हमले पर ईरानी राजदूत ने सवालों के जवाब दिए. Photo Credits- Arun Kumar/India Today

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में शनिवार को ईरान के भारत में राजदूत Mohammad Fathali ने दावा किया कि जिस टॉमहॉक मिसाइल से एक गर्ल्स स्कूल पर हमला हुआ और करीब 170 छात्राओं की मौत हो गई, वह पश्चिम एशिया के एक देश में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे से दागी गई थी. बताया गया कि पुराने खुफिया इनपुट के कारण गलती से इस स्कूल को पास के एक सैन्य परिसर का हिस्सा समझ लिया गया था, जिसके चलते यह दुखद घटना हुई.  इस घटना में मारी गई स्कूल गर्ल्स की उम्र सात से 12 साल तक की थी. 

'हम पडोसियों का सम्मान करते हैं मगर...'
राजदूत Mohammad Fathali ने तेहरान द्वारा खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों का सम्मान करता है, लेकिन जब उन्हीं देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों से उस पर हमले किए जाते हैं, तो जवाब देना मजबूरी बन जाता है.

उन्होंने कहा, 'हम अपने पड़ोसियों का सम्मान करते हैं, लेकिन जब हमारे स्कूल पर हमला होता है तो हम क्या करें? लगभग 165 लड़कियों की मौत हो गई, जब एक टॉमहॉक मिसाइल स्कूल पर आ गिरी. हम अपने पड़ोसियों का सम्मान करते हैं, लेकिन अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई जरूर करेंगे. यह मिसाइल हमारे एक पड़ोसी देश में मौजूद अमेरिकी बेस से दागी गई थी.' हालांकि उन्होंने उस देश का नाम नहीं बताया.

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स्कूल को समझ लिया सैन्य परिसर
28 फरवरी की सुबह अमेरिका-इज़राइल के सैन्य अभियान Operation Fury against Iran के दौरान दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में स्थित शाजरेह तैय्यबेह गर्ल्स प्राइमरी स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ. इस हमले में करीब 170 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर 7 से 12 साल की स्कूली छात्राएं थीं. प्रारंभिक जांच में अमेरिकी सेना और स्वतंत्र संगठनों ने संकेत दिया कि यह हमला अमेरिकी बलों द्वारा किया गया था. बताया गया कि पुराने खुफिया इनपुट के कारण गलती से इस स्कूल को पास के एक सैन्य परिसर का हिस्सा समझ लिया गया था, जिसके चलते यह दुखद घटना हुई.

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