संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के झूठे दावों पर पलटवार करते हुए उसे 'आतंकवाद का वैश्विक केंद्र' करार दिया है. उन्होंने कहा कि मई 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सेना के पराक्रम के आगे पाकिस्तानी सेना ने 10 मई को फोन कर लड़ाई रोकने की गुहार लगाई थी.
हरीश ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा स्टेट पॉलिसी के रूप में आतंकवाद का लगातार इस्तेमाल करने की वजह से भारत ने 'सिंधु जल संधि' को निलंबित रखने का फैसला किया. भारत ने दोटूक कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था है और रहेगा.
इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान में 27वें संशोधन के जरिए हुए संवैधानिक तख्तापलट और सेना प्रमुख को आजीवन प्रतिरक्षा देने पर भी गंभीर सवाल उठाए. भारत ने साफ कर दिया कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंध मुमकिन नहीं हैं.
'ऑपरेशन सिंदूर' और पाकिस्तान की हार...
परवथनेनी हरीश ने बताया कि 9 मई तक पाकिस्तान, भारत पर हमले की धमकियां दे रहा था, लेकिन भारतीय ऑपरेशन ने उसके एयरबेस, रनवे और हैंगर को तबाह कर दिया. इसकी तस्वीरें पब्लिक डोमेन में मौजूद हैं. हार से घबराकर 10 मई को पाकिस्तानी सेना ने सीधे भारतीय सेना को फोन किया और जंग रोकने की गुजारिश की. भारत ने पाकिस्तान के उस 'न्यू नॉर्मल' को खारिज कर दिया, जहां आतंकवाद को सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही थी.
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सिंधु जल संधि का निलंबन और आतंकवाद
भारत ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि 65 साल पहले यह संधि दोस्ती की भावना से की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने तीन युद्धों और हजारों आतंकी हमलों के जरिए इसकी भावना का उल्लंघन किया. भारत अब आतंकवाद और बातचीत को साथ लेकर चलने को तैयार नहीं है. इसीलिए भारत ने यह ऐलान किया है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान का समर्थन अपरिवर्तनीय रूप से खत्म नहीं होता, तब तक सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी.
संवैधानिक तख्तापलट पर आत्मनिरीक्षण की सलाह
भारत ने पाकिस्तान को कानून के शासन पर प्रवचन देने के बजाय खुद के गिरेबान में झांकने को कहा है. हरीश ने सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के 27वें संशोधन का जिक्र करते हुए पूछा कि कैसे वहां सशस्त्र सेनाओं को संवैधानिक तख्तापलट करने और रक्षा प्रमुख को आजीवन इम्युनिटी देने की अनुमति दी गई. उन्होंने कहा कि यह पवित्र सदन पाकिस्तान के लिए आतंकवाद को वैध बनाने का मंच नहीं बन सकता.
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