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US ने रूसी कच्चा तेल खरीदने की मोहलत बढ़ाई, भारत बोला- खरीदते थे, खरीदते रहेंगे

अमेरिका ने रूसी तेल पर एक बार फिर से बड़ी राहत दी है. खबर है कि US ने कच्चे रूसी तेल की खरीद पर छूट को 1 महीने के लिए बढ़ा दिया. हालांकि भारत ने दो टूक कहा है कि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के मुताबिक पहले भी रूस से कच्चा तेल खरीदते रहे हैं और आगे भी खरीदते रहेंगे.

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अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की मोहलत एक महीने के लिए बढ़ा दी है. (Photo: ITG)
अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की मोहलत एक महीने के लिए बढ़ा दी है. (Photo: ITG)

भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीदारी पर दो टूक, स्पष्ट और साफ जवाब दिया है. पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट पर विचार किए बिना रूसी तेल खरीदता रहा है, और भारत कमर्शियल फैक्टर पर विचार करते हुए ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपनी जरूरतों के आधार पर आगे भी रूसी तेल खरीदता रहेगा. 

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक मीडिया ब्रीफिंग में पत्रकारों से कहा, "रूस पर अमेरिकी छूट के संबंध में मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूंगी कि हम पहले से ही रूस से खरीदारी करते आ रहे हैं. छूट से पहले भी, छूट के दौरान भी, और अब भी. "

शर्मा ने कहा कि भारत के कच्चे तेल की खरीद के फैसले मुख्य रूप से व्यावसायिक पहलुओं और पर्याप्त सप्लाई की उपलब्धता पर आधारित होते हैं.

अमेरिका ने 30 दिनों के लिए बढ़ाया छूट

इस बीच अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों में दी गई छूट को बढ़ाने का फैसला किया है. अमेरिका की यह समय सीमा शनिवार को खत्म हो गई थी. रॉयटर्स के मुताबिक यह फैसला कई देशों की ओर से रूसी तेल खरीदने के लिए और समय मांगने के बाद लिया गया है. सूत्रों ने बताया है कि अमेरिका इस छूट को 30 दिनों के लिए और बढ़ाएगा. 

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बता दें कि रूसी समुद्री कच्चे तेल की बिक्री और डिलीवरी की अनुमति देने वाली अमेरिका की एक अस्थायी प्रतिबंध छूट 16 मई को खत्म हो गई थी. 

इस सामान्य लाइसेंस का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर दबाव कम करना था. ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़रायल युद्ध के कारण तेल की सप्लाई में अब तक की सबसे बड़ी रुकावट पैदा हो गई थी. इस छूट को पहली बार मार्च के मध्य में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी किया गया था और अप्रैल में बढ़ाया गया था. 

छूट मिले या न मिले उपलब्धता पर असर नहीं: भारत

हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने अमेरिका के इस फैसले से पहले ही कह दिया था कि भारत पहले भी रूस से कच्चा तेल खरीदता रहा है और आगे भी खरीदता रहेगा. 

उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "मूल रूप से, खरीदने के लिए हमारे पास जो व्यावसायिक समझ होनी चाहिए, वही यहां काम करेगी," 

उन्होंने यह भी जोड़ा कि कच्चे तेल की सप्लाई में कोई कमी नहीं है और लंबी अवधि के समझौतों के ज़रिए पर्याप्त मात्रा में तेल की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है.

उन्होंने कहा कि छूट मिले या न मिले, इससे  उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा. 

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रियायती रूसी कच्चा तेल से भारत को राहत

2022 से जब मॉस्को के यूक्रेन पर हमले के कारण पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे और रूस के पारंपरिक निर्यात बाज़ार बाधित हो गए थे तब से रियायती रूसी कच्चा तेल भारत की तेल आयात का मुख्य हिस्सा बन गया है. 

भारत जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता है, ने कम कीमतों का फ़ायदा उठाने के लिए रूसी तेल की खरीद में भारी बढ़ोतरी की, जिससे घरेलू रिफ़ाइनरों को बढ़ती वैश्विक ऊर्जा लागत को संभालने में मदद मिली.

अमेरिका और यूरोपीय देशों ने फरवरी 2022 में रूस के हमले के लिए उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन रूसी तेल पर खुद कभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया.

हाल के महीनों में अमेरिका ने कुछ रूसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए, जिनमें उसके सबसे बड़े कच्चे तेल आपूर्तिकर्ता- रोसनेफ़्ट और लुकोइल शामिल हैं. 

इसके बावजूद रूसी तेल प्रतिबंधों की सूची से बाहर ही रहा. इसका मतलब यह था कि रूस भारत के लिए एक मुख्य आपूर्तिकर्ता बना रहा और खरीद के दौरान इस बात का कड़ाई से ध्यान रखा गया कि इसमें किसी भी प्रतिबंधित विक्रेता या बिचौलिए की कोई भूमिका न हो, प्रतिबंधित जहाज़ों का इस्तेमाल न हो, और सभी वित्तीय, बीमा और व्यापारिक माध्यम पूरी तरह से नियमों के अनुरूप हों. 

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इसकी वजह से पिछले साल खरीद में कुछ समय के लिए थोड़ी कमी आई थी लेकिन प्रतिबंधों में मिली छूट के कारण भारतीय रिफ़ाइनरों ने फिर से खरीद बढ़ा दी. 
 

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