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'बच्चों की पढ़ाई पर असर', फ्रांस में 15 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया पर लगा बैन

ऑनलाइन बुलिंग और बच्चों की मानसिक सेहत पर बढ़ती चिंता के बीच फ्रांस की नेशनल असेंबली ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल को मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों चाहते हैं कि यह कानून सितंबर से लागू हो.

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ऑस्ट्रेलिया ने भी 16 साल से कम के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन किया है. (सांकेतिक तस्वीर)
ऑस्ट्रेलिया ने भी 16 साल से कम के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन किया है. (सांकेतिक तस्वीर)

फ्रांस में बच्चों और नाबालिग की डिजिटल सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया गया है. देश की नेशनल असेंबली ने सोमवार को एक ऐसे कानून को मंजूरी दी है, जिसके तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा. यह फैसला ऑनलाइन बुलिंग, हिंसा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े खतरों को देखते हुए लिया गया है.

प्रस्तावित कानून के तहत न केवल फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगेगी, बल्कि उन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद "सोशल नेटवर्किंग फीचर्स" को भी प्रतिबंधित किया जाएगा, जो बच्चों को ऑनलाइन जुड़ने की सुविधा देते हैं. यह कदम नाबालिगों को डिजिटल नुकसान से बचाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है.

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राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पहले भी सोशल मीडिया को युवाओं में बढ़ती हिंसा और आक्रामक व्यवहार के लिए जिम्मेदार ठहरा चुके हैं. उन्होंने फ्रांस से ऑस्ट्रेलिया के मॉडल को अपनाने की अपील की थी. ऑस्ट्रेलिया में दिसंबर से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर दुनिया का पहला प्रतिबंध लागू किया गया है. मैक्रों चाहते हैं कि फ्रांस में भी यह कानून अगले शैक्षणिक सत्र यानी सितंबर से पहले लागू हो जाए.

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'बच्चे पहले की तुलना में कम पढ़ाई कर रहे'

कानून पेश करते हुए सेंट्रिस्ट पार्टी की सांसद लॉर मिलर ने संसद में कहा कि इस कानून के जरिए समाज में एक स्पष्ट सीमा तय की जा रही है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कोई नुकसान न पहुंचाने वाला माध्यम नहीं है. उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे पहले की तुलना में कम पढ़ रहे हैं, कम सो रहे हैं और लगातार खुद की तुलना दूसरों से कर रहे हैं. यह आजाद सोच की लड़ाई है."

ऑस्ट्रेलिया के बाद कई देश सोशल मीडिया पर बैन की तैयारी में

ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले का असर अब वैश्विक स्तर पर दिख रहा है. ब्रिटेन, डेनमार्क, स्पेन और ग्रीस जैसे देश भी इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं. वहीं यूरोपीय संसद ने यूरोपीय संघ से सोशल मीडिया इस्तेमाल की न्यूनतम उम्र तय करने की मांग की है, हालांकि अंतिम फैसला सदस्य देशों पर छोड़ा गया है.

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फ्रांस में हर कोई कर रहा फैसले का समर्थन

फ्रांस में इस कानून को लेकर राजनीतिक दलों और आम जनता का व्यापक समर्थन देखने को मिला है. दक्षिणपंथी सांसद थिएरी पेरेज़ ने इसे "स्वास्थ्य आपातकाल" बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया ने सबको बोलने का मंच दिया, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कीमत बच्चों को चुकानी पड़ रही है.

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