मिडिल ईस्ट में शांति की जो थोड़ी-बहुत उम्मीद दिख रही थी, अब उस पर फिर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने के बाद लोगों को लगा था कि शायद अब हालात संभल जाएंगे. लेकिन अब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं, जिसने एक बार फिर दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है. अमेरिकी मीडिया का दावा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फेल हुई, तो आने वाले दिनों में हालात फिर विस्फोटक हो सकते हैं. यानी जिस जंग पर फिलहाल ब्रेक लगा दिख रहा है, वह फिर भड़क सकती है. दरअसल, दोनों देशों के बीच पेंच ईरान की उन 5 शर्तों पर आकर फंसा है, जिसे मानने से अमेरिका कतरा रहा है.
इस महायुद्ध की आहट को हवा दी है खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने. उन्होंने एक AI तस्वीर शेयर की, जिसमें वह 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' वाली लाल टोपी पहने एक अमेरिकी नौसेना अधिकारी के साथ युद्धपोत पर खड़े दिखे. पीछे समुद्र में तनाव का माहौल और ईरानी जहाज नजर आ रहे थे. इस तस्वीर के साथ ट्रंप ने लिखा, 'तूफान से पहले की शांति'. इसके बाद चर्चा तेज हो गई कि क्या अमेरिका किसी बड़े एक्शन की तैयारी में है.
उधर, ट्रंप लगातार ईरान को चेतावनी भी दे रहे हैं. उनका कहना है कि अगर ईरान जल्द समझौते पर राजी नहीं होता, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जरूर चल रही है, लेकिन भरोसे की कमी अब भी सबसे बड़ी दीवार बनी हुई है.
इस बीच इजरायल में भी एक बड़ा धमाका चर्चा में है. यरुशलम के पास एक सरकारी डिफेंस कंपनी के टेस्टिंग ग्राउंड में जोरदार विस्फोट हुआ. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आसमान में आग की लपटें और धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया. इजरायल इसे एक तकनीकी परीक्षण बता रहा है, लेकिन कुछ अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ मान रहे हैं कि मामला इतना सीधा नहीं हो सकता.
क्या फिर शुरू होने वाला है बड़ा युद्ध?
न्यूयॉर्क टाइम्स के दावों के मुताबिक, व्हाइट हाउस और अमेरिकी सेना के भीतर ईरान को लेकर कई विकल्पों पर चर्चा हो रही है. कहा जा रहा है कि एक प्लान ईरान के सैन्य ठिकानों और जरूरी ढांचे पर बड़े हवाई हमले का है. वहीं दूसरा विकल्प ज्यादा बड़ा और खतरनाक माना जा रहा है, जिसमें ईरान के यूरेनियम स्टोरेज सेंटर को निशाना बनाया जा सकता है.
हालांकि, ईरान ने भी संयुक्त राष्ट्र में सख्त चेतावनी दी है. ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो उसका समर्थन करने वाले देशों को भी इसके नतीजों की जिम्मेदारी उठानी होगी. साथ ही खबरें ये भी हैं कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने सैनिकों और सैन्य सामान की तैनाती को लेकर नई तैयारी कर रहा है.
ईरान की इन 5 शर्तों की वजह से नहीं बन रही बात