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क्या होता है इस्लामोफोबिया और इस्लामिक कट्टरवाद में अंतर?

फ्रांस के राष्ट्रपति का कहना है कि उन्होंने अपने देश में इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ जंग छेड़ी है. लेकिन मुस्लिम देशों के नेताओं का कहना है कि फ्रांस, इस्लामोफोबिया फैला रहा है.

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फ्रांस की घटना को लेकर विश्व विभाजित (फोटो- पीटीआई)
फ्रांस की घटना को लेकर विश्व विभाजित (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों का विरोध
  • कई देशों में फ्रांस के खिलाफ हुए प्रदर्शन
  • भारत दे रहा है फ्रांस का साथ

फ्रांस ने इस्लामिक कट्टरवाद और अलगाववाद के खिलाफ जिस तरह आक्रामक होकर कार्रवाई की शुरुआत की है, उसने पूरी दुनिया का सियासी और मजहबी तापमान बढ़ गया है. इस टकराव में तमाम देश अपना-अपना पक्ष चुन रहे हैं. इस्लामिक देशों में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों को पेरिस का शैतान कहा जा रहा है. इस्लामिक कट्टरपंथियों के खिलाफ उनके कड़े बयानों की वजह से भारत में भी कई शहरों में फ्रांस के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. भारत ने आधिकारिक रूप से फ्रांस का साथ दिया है.

हालांकि दुनिया इस मुद्दे पर पूरी तरह विभाजित, हिंसक और आक्रामक दिखाई दे रही है. वहीं सवाल ये भी है कि कट्टरपंथ पर अगर प्रहार हो रहा है तो फिर तकरार किस बात की है? इस बीच कट्टरवाद और इस्लामोफोबिया में फर्क की भी जानकारी होनी चाहिए.

फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों की कट्टरवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति ने मुस्लिम देशों के दिलों में जो आग लगाई है, वो अब बढ़ती ही जा रही है. ईरान, इराक, तुर्की, पाकिस्तान, सीरिया, सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देशों के बाद अब भारत में भी फ्रांस और वहां के राष्ट्रपति मैक्रों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं. इन्हें लेकर राजनीति का खुला प्रदर्शन भी हो रहा है.

कट्टरवाद के खिलाफ फ्रांस की लड़ाई को मुस्लिम देशों ने अपनी पर्सनल लड़ाई बना लिया है. दुनियाभर के मुसलमानों की तरह, भारत के मुसलमानों को भी ये बर्दाश्त नहीं हो रहा है कि कोई पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी करे. वो गुस्सा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की तस्वीरों पर उतार रहे हैं. मुंबई के भिंडी बाजार और नागपाड़ा इलाके में सड़क पर मैक्रों की तस्वीरें चिपका दी गईं, जिन्हें वाहनों के पहिए रौंदते चले गए.

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दुनियाभर में मैक्रों की तस्वीरों के साथ ऐसी बदसलूकी हो रही है. इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ जंग लड़ रहे मैक्रों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन खासकर महाराष्ट्र में मैक्रों की ये बेइज्जती बीजेपी को खल गई. बीजेपी महाराष्ट्र सरकार से पूछ रही है कि उसके राज में ये क्या हो रहा है? भारत फ्रांस के साथ खड़ा है. जो फ्रांस में हो रहा है, उस आतंकवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के साथ मिलकर लड़ने की प्रतिज्ञा ली है, फिर मुंबई की सड़कों पर फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष का अपमान क्यों?

फ्रांस और मैक्रों के खिलाफ ऐसे ही प्रदर्शन गुजरात के वडोदरा में भी हुए, जहां मैक्रों की तस्वीरों को कुचलते हुए लोगों ने अपना विरोध जताया. ऐसे ही प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के देवबंद और अलीगढ़ में भी हुए. हर प्रदर्शन में भीड़ अलग थी, लोग अलग थे, लेकिन डिमांड सिर्फ एक थी.

फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन

देश के और भी कई शहरों में फ्रांस और मैक्रों के खिलाफ छिटपुट प्रदर्शन की खबरें और तस्वीरें आईं लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बात बढ़ गई. भोपाल में जहां मैक्रों की तस्वीरों को सड़कों पर लगाकर बाकायदा जूतों से कुचला गया. फ्रांस और मैक्रों के विरोध में जमकर प्रदर्शन और नारेबाजी भी हुई. मैक्रों पर पैगंबर मोहम्मद का जानबूझकर अपमान करने का आरोप लगाया गया.

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वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति का कहना है कि उन्होंने अपने देश में इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ जंग छेड़ी है. लेकिन मुस्लिम देशों के नेताओं का कहना है कि फ्रांस, इस्लामोफोबिया फैला रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस्लामोफोबिया क्या होता है और ये इस्लामिक कट्टरवाद से कितना अलग है.

क्या है इस्लामोफोबिया?

दरअसल, इस्लामोफोबिया दो शब्दों से मिलकर बना है- इस्लाम और फोबिया. जिसका हिंदी में अर्थ होता है- इस्लाम का भय. जबकि इस्लामिक कट्टरवाद दो अलग-अलग शब्द हैं. कट्टरवाद का मतलब होता है- कड़ा रुख अपनाने वाला. फ्रांस की लड़ाई इसी कट्टरवाद के खिलाफ है.

इस्लामिक कट्टरवादी सोच से पीड़ित फ्रांस में पिछले 15 दिनों में दो आतंकवादी घटनाएं हो चुकी हैं और इसी कट्टरवाद के खिलाफ फ्रांस ने अब कड़े कदम उठाने का फैसला किया है. यही वजह है कि इस्लामिक कट्टरवाद के समर्थक मुस्लिम देशों के नेताओं की नींद उड़ी हुई है. अब उन्होंने इसे अपनी पर्सनल लड़ाई बना लिया है.

 

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