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Wheat Crisis: मोदी सरकार ने गेहूं निर्यात पर बैन के बावजूद इस देश को भेजा 2.5 लाख टन गेहूं

यूक्रेन युद्ध के बाद से यमन गेहूं संकट से जूझ रहा है. ऐसे में भारत, यमन में गेहूं का निर्यात कर रहा है. बीते तीन महीनों में भारत ने यमन में 2,50,000 टन से अधिक गेहूं का निर्यात किया है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूक्रेन युद्ध के बाद से यमन में गेहूं संकट
  • यमन में गेहूं का निर्यात कर रहा भारत
  • तीन महीनों में यमन में 2,50,000 टन से अधिक गेहूं भेजा

यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर गेहूं संकट से जूझ रहे यमन की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र ने भारत की सराहना की है. संयुक्त राष्ट्र की डिप्टी रिलीफ चीफ जॉयसे सूया का कहना है कि भारत ने यमन में गेहूं निर्यात कर बड़ी मदद की है.

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव प्रकाश गुप्ता ने सोमवार को यमन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि वैश्विक कमोडिटी बाजारों में सप्लाई में बदलाव और खाद्य सुरक्षा पर इसके प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए भारत जरूरतमंद देशों को वित्तीय मदद और खाद्यान्न मुहैया करा रहा है.

यमन को तीन महीनों में 2.50 लाख टन से अधिक गेहूं का निर्यात

उन्होंने कहा, भारत ने बीते तीन महीनों में यमन में 2,50,000 टन से अधिक गेहूं निर्यात किया है.

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र में मानवीय मामलों की सहायक महासचिव और डिप्टी इमरजेंसी रिलीफ कॉर्डिनेटर जॉयसे सूया ने माना कि भारत से भेजी जा रही गेहूं की खेपें यमन में सप्लाई का अहम स्रोत बन रही हैं, विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर.

उन्होंने कहा, हम गेहूं के निर्यात को लेकर भारत और यमन की सरकारों के बीच हाल में हुई सकारात्मक बातचीत से भी प्रोत्साहित हैं. यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर भारत से वाणिज्यिक गेहूं का निर्यात यमन के लिए सप्लाई का प्रमुख स्रोत बना है.

गुप्ता ने सुरक्षा परिषद की बैठक में यमन को गेहूं मुहैया कराने के भारत के योगदान का जिक्र करने के लिए आभार भी जताया.

हुदैदा बंदरगाहों के इस्तेमाल पर जोर

सूया ने कहा कि यह भी जरूरी है कि खाद्य सुरक्षा को लेकर हुदैदा में बंदरगाहों का इस्तेमाल किया जाए क्योंकि ये बंदरगाह यमन में खाद्य और अन्य जरूरी कमोडिटी  के आयात के लिए मुख्य प्रवेशद्वार हैं.

उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध से खाद्य सामानों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. यमन में लगभग 90 फीसदी खाद्यान्न का आयात किया जाता है.

सूया ने कहा कि पिछले साल यमन में आयात हुए कुल गेहूं में से लगभग आधा रूस और यूक्रेन से आया था. फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से रूस और यूक्रेन से गेहूं आना बंद हो गया. इसके बाद यमन ने जल्द ही अन्य स्रोत ढूंढने शुरू किए.

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों और अन्य चुनौतियों की वजह से यमन में खाद्यान्न की उस सप्लाई चेन का सुचारू ढंग से काम करते रहना मुश्किल हो गया.

बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी से हो रहे युद्ध की वजह से यमन गेहूं संकट का सामना कर रहा है. यमन में लगभग 90 फीसदी खाद्यान्न का आयात किया जाता रहा है.

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