चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इंटरनेशनल इकोनॉमी में डॉलर के प्रभुत्व को सीधी चुनौती दी है. उन्होंने चीन की करेंसी युआन को 'मजबूत करेंसी' बनाने का आह्रवान किया. जिनपिंग ने कहा है कि युआन को इस स्तर तक मजबूत किया जाए कि इसे दूसरे देश 'इंटरनेशनल रिजर्व' की तरह जमा करें. बता दें कि अभी ये रुतबा डॉलर को हासिल है. जिनपिंग के इस बयान को डॉलर की बादशाहत को चुनौती माना जा रहा है.
दुनिया की पहली और दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्थाओं के बीच का ये टकराव दुनिया के लिए गहरे मायने रखता है.
अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी चीन अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए इंटरनेशनल ट्रेड में युआन का इस्तेमाल बढ़ा रहा है. पिछले साल उसने अपने 6.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के विदेशी व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अपनी लोकल करेंसी में सेटल किया था.
शनिवार को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख सैद्धांतिक जर्नल 'किउशी' में छपे एक आर्टिकल में शी ने कहा कि चीन को एक "मजबूत करेंसी" बनाने की ज़रूरत है जिसका इस्तेमाल इंटरनेशनल ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में बड़े पैमाने पर किया जा सके, और जो ग्लोबल रिज़र्व का दर्जा हासिल कर सके.
ग्लोबल रिजर्व क्या होता है?
ग्लोबल रिजर्व ऐसी मुद्रा होती है जिसे दुनिया भर की सरकारें, केंद्रीय बैंक और वैश्विक वित्तीय संस्थान बड़े पैमाने पर अपने विदेशी मुद्रा भंडार में रखते हैं. यह मुद्रा अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश, कर्ज चुकाने और वैश्विक लेन-देन के लिए इस्तेमाल होती है. सरल शब्दों में कहें तो यह दुनिया की "सबसे विश्वसनीय और सबसे ज्यादा स्वीकार्य" मुद्रा होती है, जिसे लगभग सभी देश सुरक्षित समझकर स्टॉक करते हैं.
अमेरिकी डॉलर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही दुनिया की प्रमुख ग्लोबल रिजर्व करेंसी है. IMF के अनुसार वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी अभी भी लगभग 58-60% के आसपास रहती है.
हालांकि शी ने इस लेख में सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर का ज़िक्र नहीं किया, जिसके कुछ अंश यहां कई मीडिया आउटलेट्स ने छापे थे. 2012 में सत्ता संभालने के बाद से चीनी राष्ट्रपति युआन को डॉलर के मुकाबले एक इंटरनेशनल करेंसी बनाने के लिए ज़ोर दे रहे हैं.
हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार शी ने कहा कि बैंकिंग एसेट्स, फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व और कैपिटल मार्केट के साइज़ के मामले में चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन कुल मिलाकर यह "बड़ा है पर मज़बूत नहीं" है. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक फाइनेंशियल पावरहाउस बनाना एक लंबा काम होगा.
CIPS बनाम SWIFT
चीन, रूस के साथ मिलकर SWIFT इंटरनेशनल बैंक नेटवर्क के विकल्प के तौर पर क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम (CIPS) को बढ़ावा दे रहा है.
रूस के तेल और गैस का सबसे बड़ा खरीदार होने के नाते चीन ने रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार में युआन के इस्तेमाल को भी बढ़ाया है.
रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को आसान बनाने के लिए लगभग 50 देशों के साथ करेंसी स्वैप समझौते पहले ही कर लिए हैं.
पिछले एक साल में युआन आम तौर पर डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है, हालांकि इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट बैंकों का कहना है कि यह अभी भी अपनी लॉन्ग-टर्म कीमत से नीचे है.
गोल्डमैन सैक्स के एनालिस्ट्स ने 5 जनवरी की एक रिपोर्ट में कहा कि युआन डॉलर के मुकाबले अपनी सही कीमत से लगभग 25 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहा हो सकता है.
SWIFT को समझिए
अगर SWIFT की बात करें तो SWIFT पेमेंट सिस्टम में दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय भुगतान मैसेजिंग नेटवर्क है. SWIFT का फुलफॉर्म Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication है. यह 1973 में बेल्जियम में स्थापित एक कोऑपरेटिव (सहकारी संगठन) है, जो बैंकों द्वारा ही संचालित होता है.
जानकारों का कहना है कि चीनी सेंट्रल बैंक एक मजबूत करेंसी पसंद करता है, लेकिन तेजी से वैल्यू बढ़ने देने को लेकर सावधान रहता है.
बीजिंग और मॉस्को BRICS में भी एक कॉमन BRICS करेंसी और SWIFT को टक्कर देने के लिए एक वैकल्पिक BRICS Pay पेमेंट सिस्टम के लिए ज़ोर दे रहे हैं. BRICS अब 10 सदस्यों का ग्रुप है, जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ पांच नए सदस्य भी शामिल हैं.
उम्मीद है कि यह मुद्दा इस साल भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में उठाया जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर BRICS देश डॉलर के दबदबे को चुनौती देने की योजनाओं पर आगे बढ़ते हैं, तो वे भारी टैरिफ लगाएंगे.
सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ ने किउशी में छपे लेख का हवाला देते हुए बताया कि शी ने कहा कि चीनी विशेषताओं वाला चीन का वित्तीय विकास न केवल आधुनिक वित्त के विकास के रास्ते पर चलता है, बल्कि इसमें ऐसी खास विशेषताएं भी हैं जो चीन की राष्ट्रीय परिस्थितियों के हिसाब से हैं, जो पश्चिमी वित्तीय विकास मॉडल से अलग है.
राष्ट्रपति शी ने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक रूप से मजबूत देश की बुनियादी खासियतें एक मज़बूत आर्थिक नींव पर आधारित होनी चाहिए, जिसमें दुनिया की अग्रणी आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और कुल राष्ट्रीय शक्ति हो.
उन्होंने कहा कि देश के पास कई प्रमुख फाइनेंशियल तत्व भी होने चाहिए, जैसे कि एक मज़बूत करेंसी और सेंट्रल बैंक, मज़बूत फाइनेंशियल संस्थान और अंतर्राष्ट्रीय फाइनेंशियल केंद्र, ठोस फाइनेंशियल निगरानी, और फाइनेंशियल टैलेंट की एक उच्च-स्तरीय टीम.