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एयरस्ट्राइक से बौखलाए पाकिस्तान ने ईरान से राजदूत को बुलाया, अब चीन का भी आया बयान

पाकिस्तान ने कहा कि बीती रात ईरान ने पाकिस्तान की संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाते हुए उकसावे हुई कार्रवाई की है. ईरान का ये गैरकानूनी कदम बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है और इसे किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता.

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ईरान के हमले से भड़का पाकिस्तान
ईरान के हमले से भड़का पाकिस्तान

पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश अल-अदल के ठिकानों पर ईरान की एयरस्ट्राइक से पाकिस्तान भड़का हुआ है. इस हमले के बाद पाकिस्तान ने ईरान में मौजूद अपने राजदूत को वापस बुला लिया है.

इतना ही नहीं पाकिस्तान में ईरान के राजदूत जो फिलहाल ईरान में ही हैं. उन्हें दो टूक कह दिया गया है कि फिलहाल उन्हें पाकिस्तान लौटने की जरूरत नहीं है.

बता दें कि इससे पहले मंगलवार को ईरान ने बलूचिस्तान में जैश अल-अदल के दो ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. पाकिस्तान ने बाद में इन हमलों की पुष्टि करते हुए दो बच्चों के मारे जाने और तीन के घायल होने का दावा किया था.

ईरान पर भड़का पाकिस्तान

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जारी बयान में कहा कि बीती रात ईरान ने पाकिस्तान की संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाते हुए उकसावे हुई कार्रवाई की है. ईरान का ये गैरकानूनी कदम बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है और इसे किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता. पाकिस्तान के पास किसी भी तरह की अवैध गतिविधि का मुंहतोड़ जवाब देने का अधिकार है. ईरान को अपने इस कदम का खामियाजा भुगतने के लिए तैयार हो जाना चाहिए. 

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बयान में कहा गया कि हमने इस घटना पर ईरान सरकार को अपना संदेश दे दिया है. हमने उन्हें बता दिया है कि पाकिस्तान ने वहां से अपने राजदूत को वापस बुलाने का फैसला किया है और पाकिस्तान में ईरान के राजदूत जो फिलहाल ईरान में ही हैं, उन्हें भी कह दिया है कि फिलहाल यहां लौटने की जरूरत है. हमने ईरान के साथ सभी तरह के उच्चस्तरीय दौरे सस्पेंड कर दिए हैं. 

चीन ने दी ईरान और पाकिस्तान को नसीहत

ईरान और पाकिस्तान के इस मौजूदा घटनाक्रमों पर अब चीन की एंट्री भी हो गई है. चीन ने दोनों देशों से संयम बरतने को कहा है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि हम दोनों पक्षों से संयम बरतने, तनाव और उकसावे वाली किसी भी कार्रवाई से बचने और शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए काम करने को कहा.  

उन्होंने कहा कि हम ईरान और पाकिस्तान दोनों को करीबी पड़ोसी समझते हैं और दोनों ही बड़े इस्लामिक देश हैं, ऐसे में उकसावे वाली कार्रवाई से दोनों देश दूर रहें. निंग ने कहा कि ईरान और पाकिस्तान दोनों ही चीन के करीबी हैं और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य हैं.

बता दें कि ईरान का ये हमला ऐसे समय पर हुआ है, जब मिडिल ईस्ट में संकट गहराया हुआ है. इजरायल और हमास के बीच संघर्ष जारी है. ईरान ने जिस आतंकी संगठन को निशाना बनाया है उसके दहशतगर्द आए दिन ईरान-पाकिस्तान बॉर्डर पर पाकिस्तानी सैनिकों को निशाना बनाते आए हैं.  ईरान की समाचार एजेंसी ने इस हमले की जानकारी देते हुए कहा कि इस हमले में आतंकी ग्रुप जैश-अल-अद्ल को बिशेष रूप से टारगेट किया गया. ईरान का दावा है कि उसने आतंकियों को दो गढ़ को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया. 

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क्या है जैश-अल-अद्ल?

जैश-अल-अद्ल यानी कि "न्याय की सेना" 2012 में स्थापित एक सुन्नी आतंकवादी समूह है जो बड़े पैमाने पर पाकिस्तान में ऑपरेट होता है. पाकिस्तान के सिस्तान-बलूचिस्तान से ऑपरेट करना वाला ये आतंकी संगठन ईरान और पाकिस्तान की सीमा पर काफी एक्टिव है. यही वजह है कि ये संगठन दोनों ही सरकारों के लिए सिरदर्द बना हुआ है.

अमेरिका और ईरान दोनों ही इस संगठन को आतंकी घोषित किया हुआ है. इस सुन्नी संगठन में 500 से 600 आतंकी हैं. ईरान के मंत्री अहमद वाहिदी के अनुसार, पिछले महीने, दक्षिणपूर्वी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान के एक पुलिस स्टेशन पर रात को हुए हमले में कम से कम 11 ईरानी पुलिस अधिकारी मारे गए थे. ईरान ने इस घटना के लिए जैश-अल-अद्ल को दोषी ठहराया था. 

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