
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने सत्ताधारी लिबरल पार्टी का नेता पद भी छोड़ दिया है. हालांकि, पार्टी का नया नेता चुने जाने तक वे प्रधानमंत्री बने रहेंगे. लंबे समय तक विवादों में रहे ट्रूडो के इस्तीफे को लेकर कनाडा में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. वहां की मीडिया में ट्रूडो के इस्तीफे और लिबरल पार्टी का नया नेता कौन होगा, इसे लेकर बड़ी कवरेज देखने को मिल रही है. ट्रूडो के पद छोड़ने को लेकर उनके विरोधी और कनाडा के प्रतिष्ठित लोग भी खुश दिखाई दे रहे हैं.
क्या कह रही कनाडा की मीडिया?
सोमवार को जस्टिन ट्रूडो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री पद छोड़ने की घोषणा की. इस दौरान उन्होंने जो भाषण दिया, उसकी कनाडाई मीडिया में काफी चर्चा है. ट्रूडो भाषण के दौरान अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए सरकार की विफलताओं के लिए दूसरों पर दोष मढ़ने से नहीं चूके.
ट्रूडो ने कहा कि 2015 में जब उन्होंने पद संभाला था, तब की तुलना में कनाडा अब बेहतर स्थिति में है. इसी के साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी के लोग अंदरूनी लड़ाई लड़ते रहेंगे तो कनाडा के लोगों के लिए वोटिंग के दौरान वो सर्वश्रेष्ठ विकल्प नहीं हो सकते.
'ट्रूडो ने वोटर्स को फंसा दिया है'
स्थानीय अखबार नेशनल पोस्ट में कनाडा की वकील, स्तंभकार और राजनीतिक विश्लेषक ताशा खैरिद्दीन का एक लेख छपा है जिसमें वो ट्रूडो के भाषण पर सवाल उठा रही हैं.
लेख में ताशा ने लिखा, 'ट्रूडो ने कहा कि- मैं पार्टी नेता और प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देने जा रहा हूं जब पार्टी अपने अगले नेता का चयन कर लेगी. ट्रूडो को पूरी तरह पद छोड़ने में कितना समय लगेगा? सुनने में तो ऐसा लग रहा है कि दो महीने से भी ज्यादा समय लगेगा क्योंकि अपने इस्तीफे की घोषणा से पहले प्रधानमंत्री ने गवर्नर जनरल से 24 मार्च तक संसद को स्थगित करने के लिए भी कहा था.'

राजनीतिक विश्लेषक ताशा आगे लिखती हैं, 'ये बात कहकह ट्रूडो ने अपनी पार्टी को फिर से संगठित होने का समय दे दिया है, उन्होंने विपक्ष और मतदाताओं को फंसा दिया है. अब ढाई महीने तक अविश्वास मत और चुनाव का कोई मौका नहीं होगा.'
कनाडाई अखबार टोरंटो स्टार में भी 24 मार्च तक देश की संसद के स्थगन को लेकर खबरें चल रही हैं. अखबार लिखता है कि सत्र का स्थगन एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है जो संसद को पूर्व निर्धारित समय तक रोक देती है.
राजनीतिक विश्लेषक और क्वीन्स यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर कैथी ब्रॉक के हवाले से अखबार ने लिखा कि सत्र के स्थगन का इस्तेमाल सरकार अपने एजेंडे को रीसेट करने और दोबारा सत्ता में आने के लिए करती है.
अखबार ने लिखा, 'सत्र के स्थगन के कारण सभी संसदीय काम रुक जाते हैं, सांसदों को घर भेज दिया जाता है, कोई समिति नहीं बैठ सकती और जिन विधेयकों को अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है, उन्हें रद्द कर दिया जाता है, उन्हें अगले सत्र में दोबारा प्रस्तुत करना पड़ता है. संसद के सत्र को स्थगित करने का ट्रूडो का फैसला लिबरल पार्टी को और वक्त देना है और विवादों को शांत करना है ताकि अगले चुनाव में उन्हें बढ़त मिल सके.'
एक्सपर्ट ब्रॉक के हवाले से अखबार ने लिखा कि ट्रूडो का फैसला चतुराई भरा है लेकिन इसमें जोखिम भी है क्योंकि कनाडा के लोग अब थक चुके हैं और वो सत्र के स्थगित होने की बात से बेहद नाराज होंगे. कनाडा के लोग वर्तमान सरकार से नाराज हैं और वो समस्या का समाधान चाहते हैं.
कनाडा के न्यूज ब्रॉडकास्टर सीबीसी ने अपने एक विश्लेषणात्मक लेख को शीर्षक दिया है- ट्रूडो ने समीकरण से खुद को बाहर कर लिया है लेकिन सवाल की जटिलता कम नहीं हुई है (Trudeau removes himself from the equation, but the math doesn't get much easier).

अखबार ने लिखा, 'जिस दिन उन्होंने आखिरकार इस्तीफा देने की बात मान ली, उस दिन जस्टिन ट्रूडो उचित रूप से विनम्र दिखे. शायद पहली बार, वे बूढ़े दिखे. और उनके सार्वजनिक बयानों में अक्सर दिखने वाला दिखावा भी खत्म हो गया. कई महीनों तक धीमी गति से चल रही असहमति और बेचैनी के बाद "आंतरिक लड़ाइयों" ने ट्रूडो को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया.'
अखबार ने आगे लिखा कि अपने इस्तीफे की घोषणा कर ट्रूडो ने दो लोगों के लिए चुनौती खड़ी की है- एक तो अपने लिए और दूसरा अपने उत्तराधिकारी के लिए.
अखबार लिखता है, 'जब तक पार्टी कोई नया नेता नहीं चुन लेती, ट्रूडो प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे. इसका मतलब ये हुआ कि जब डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे तब वो पद पर होंगे. मतलब ट्रंप पद ग्रहण करने के बाद जो फैसले लेंगे, ट्रूडो उन्हें संबोधित करेंगे. ऐसे में बहुत संभव है कि ट्रंप ने कनाडा को टैरिफ की जो धमकी दी है, उसे लागू करने के लिए कदम बढ़ाया जाए. '
ट्रूडो के विरोधी और समर्थक क्या बोले?
पूर्व सहयोगी खालिस्तान समर्थक नेता गुरमीत सिंह- न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के नेता खालिस्तान समर्थक गुरमीत सिंह ट्रूडो के सहयोगी हुआ करते थे. उन्होंने ढाई सालों तक ट्रूडो की सरकार को समर्थन दिया जिससे वो सत्ता पर काबिज रहे. लेकिन एनडीपी ने पिछले साल लिबरल पार्टी से अपना समर्थन वापस ले लिया था.
अब ट्रूडो के इस्तीफे पर गुरमीत सिंह खुश दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने ट्रूडो के इस्तीफे का स्वागत किया और कहा कि प्रधानमंत्री ने उन कनाडाई लोगों को निराश किया है जिनकी सेवा के लिए उन्हें चुना गया था.
उन्होंने कहा, 'जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी ने कनाडाई लोगों को निराश किया है. उन्होंने घरों की कीमतों के मामले में आपको निराश किया है. उन्होंने स्वास्थ्य देखभाल के मामले में आपको निराश किया है. उन्होंने कॉर्पोरेट लालच को बेलगाम होने की अनुमति देकर आपको निराश किया है. लिबरल्स को एक और मौका नहीं मिलना चाहिए, चाहे नेता कोई भी हो.'
विपक्षी पार्टी कंजर्वेटिव नेता पियरे पोलिवरे-
कंजर्वेटिव नेता पियरे पोलिवरे ट्रूडो के सबसे बड़े विरोधी माने जाते हैं. कनाडा में हुए कई पोल्स में यह देखा गया है कि पियरे प्रधानमंत्री पद के लिए कनाडाई लोगों की पहली पसंद है.
जस्टिन ट्रूडो ने अपने भाषण में कहा था कि वो एक फाइटर हैं. इसे लेकर पोलिवरे ने कहा कि अगर ट्रूडो सच में फाइटर हैं तो चुनाव की घोषणा कर उनका सामना क्यों नहीं करते.
उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, 'जस्टिन ट्रूडो दावा करते हैं कि वो एक फाइटर हैं. तो फिर वो अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए अभी चुनाव की घोषणा करें और मेरा सामना करें. क्योंकि वो बहुत कमजोर और डरे हुए हैं इसलिए देश एक कमजोर, लंगड़े प्रधानमंत्री के कंट्रोल से बाहर आ गया है और लिबरल्स सत्ता के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे हैं. यह कायरतापूर्ण अराजकता है.'
पियरे पोलिवरे ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि ट्रूडो के इस्तीफे के बावजूद, "कुछ भी नहीं बदला है, हर लिबरल सांसद और नेता पद के दावेदार ने ट्रूडो के पद पर रहते हुए किए गए हर काम का समर्थन किया है.'
पियरे ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, 'अब वे एक और लिबरल नेता को लाकर वोटर्स को धोखा देना चाहते हैं ताकि वे अगले चार सालों तक कनाडावासियों को लूटते रहें...लिबरल्स ने जो नुकसान किया है, उसकी भरपाई का एकमात्र तरीका चुनाव है जिसमें कंजर्वेटिव्स को चुना जाए जो कनाडा के वादों को पूरा करेंगे.'
ग्रीन पार्टी की नेता एलिजाबेथ मे- कनाडा की ग्रीन पार्टी की नेता एलिजाबेथ मे ने ट्रूडो के इस्तीफे पर कहा, 'आज सुबह, प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आखिरकार इस बात को स्वीकार लिया उन्हें नए नेता के लिए जगह बनानी होगी, पद छोड़ना होगा. उनकी इस घोषणा से किसी को हैरानी नहीं हुई.. पिछले साल, खासतौर से 16 दिसंबर क बाद से पिछले कुछ हफ्तों में उनके समर्थन में भारी गिरावट देखने को मिली जिसे देखना बहुद दुखद था. यह ऐसा था जैसे धीमी गति से चल रही कोई ट्रेन दुर्घटना का शिकार हो गई हो.'
एलिजाबेथ ने हालांकि, ट्रूडो के लिए कुछ अच्छे शब्द भी कहे. उन्होंने कहा, 'आज, मैं जस्टिन ट्रूडो को देश के प्रति की गई सेवा के लिए धन्यवाद देना चाहती हूं. उनके और उनके परिवार के लिए आने वाले सालों में सुख और शांति की कामना करती हूं.'
कैनेडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख कैंडेस लैंग- ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर वो सत्ता में आते हैं तो कनाडा से अमेरिका आने वाले सामानों पर 25% की टैरिफ लगाएंगे. उनकी इस धमकी से कनाडा के व्यापारी डरे हुए हैं.
अब इस्तीफे को लेकर कनाडा के वाणिज्य चैंबर कैनेडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख कैंडेस लैंग ने ट्रूडो को धन्यवाद दिया है.
लैंग ने एक बयान में कहा, 'प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने माहौल को समझा और आज अपने इस्तीफे की घोषणा करके सही फैसला किया. उनका इस्तीफा एक महत्वपूर्ण मोड़ है, क्योंकि कनाडा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपट रहा है. एकता जरूरी है: राजनीतिक नेताओं, व्यापारियों और सभी लोगों को एक साथ आना चाहिए. कनाडा के अगले प्रधानमंत्री को जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए और कनाडा-अमेरिका व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए.'
विदेश मंत्री मेलानी जोली- ट्रूडो के बाद जिन लिबरल नेताओं को पार्टी नेता बनाने पर बात चल रही है, उनमें एक नाम मेलानी जोली भी हैं. ट्रूडो के लगभग एक दशक के सत्ता में रहने के दौरान जोली उनकी अहम सहयोगी रहीं. ट्रूडो के इस्तीफे पर जोली ने उनके “नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और बलिदान” के लिए धन्यवाद दिया है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, 'पिछले दस सालों में, प्रधानमंत्री ने इस देश को सभी कनाडाई लोगों के लिए एक बेहतर जगह बनाने के लिए खुद को समर्पित किया है.'