ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय नहीं रहीं. गुरुवार को स्कॉटलैंड के बोल्मोरल किले में 96 साल की उम्र में महारानी ने अंतिम सांस ली. महारानी के निधन के बाद ब्रिटेन की शाही गद्दी को उनके बेटे किंग चार्ल्स संभालेंगे. महारानी के निधन के बाद भारत समेत विश्व के सभी देशों में शोक की लहर है.
भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने भी क्वीन के निधन पर शोक जताया है. इसी बीच एक अमेरिकी पत्रिका में महारानी के निधन को लेकर भारत से जुड़ी ऐसी खबर छपी है, जिस पर विवाद हो गया है. इस खबर में कहा गया है कि क्वीन एलिजाबेथ की निधन को लेकर भारत और आयरलैंड में कुछ लोग खुशी मना रहे हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर भारतीय कड़ी आपत्ति जता रहे हैं. भारतीय यूजर्स इसे भारत के खिलाफ पश्चिमी मीडिया का प्रोपेगैंडा करार दे रहे हैं.
अंग्रेजी पत्रिका न्यूजवीक की खबर में कहा गया कि क्वीन एलिजाबेथ ने अपने शासन के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य में काफी बदलाव किए, उसके बाद भी पूर्व में ब्रिटिश शासित रहे कई देशों में कुछ लोग क्वीन को अपने लोगों के साथ बर्बरता के लिए जिम्मेदार समझते हैं.
'कभी नहीं डूबेगा ब्रिटिश राज का सूर्य'
पत्रिका में कहा गया कि साल 1913 में ब्रिटिश राज्य चरम पर था. उस समय कहा जाने लगा था कि ब्रिटिश साम्राज्य का सूरज कभी नहीं डूबेगा. उस समय दुनिया के करीब 23 फीसदी लोगों पर ब्रिटिश राज का नियंत्रण था.
दरअसल, उस समय ब्रिटिश राज का सभी महाद्वीपों के कई देशों पर नियंत्रण था, जिसमें एशिया से संपूर्ण भारत आता था. आज भी 14 संप्रभु क्षेत्र ब्रिटिश संप्रभुता के अंतर्गत हैं.
सोशल मीडिया पर क्वीन के निधन पर खुशी ?
अंग्रेजी पत्रिका ने बिना किसी ट्विटर यूजर्स का नाम लिए क्वीन के निधन को लेकर उनका बयान लिखा है. अंग्रेजी पत्रिका के अनुसार, एक ट्विटर यूजर ने क्वीन के निधन को लेकर कहा कि क्वीन एलिजाबेथ के एक व्यक्ति विशेष, मां और दादी होने के नाते उनके निधन पर दुख है. लेकिन वो एक ऐसे साम्राज्य की अध्यक्ष भी रही हैं जिसने सदियों तक भारत और आयरलैंड को प्रताड़ित कर अपना फायदा उठाया.
वहीं पत्रिका के अनुसार, महारानी के निधन को लेकर एक अन्य यूजर ने कहा कि क्वीन का निधन हो चुका है. इस मौके पर अफ्रीका, भारत, आयरलैंड और भी कई देशों के उन सभी लाखों लोगों को याद किया जाए, जो ब्रिटिश गुलामी के दौरान मारे गए हैं.
खबर पर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
पत्रिका में छपी खबर को लेकर रैंड कॉरपोरेशन से जुड़े डेरेक ग्रॉसमैन ने तीखी प्रतिक्रिया दी. डेरेक ने कहा कि ऐसा मत कीजिए. किसी भी तरह से भारत क्वीन के निधन से खुश नहीं है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी क्वीन के निधन पर भावुक संदेश लिखा है.
डेरेक ने आगे कहा कि ये भी ध्यान में रखिए कि क्वीन ने उपनिवेशवाद के बाद के अभूतपूर्व और व्यवस्थित दौर पर शासन किया है. इस तरह की हेडलाइंस सिर्फ यह माहौल बनाती हैं कि पश्चिमी मीडिया भारत के खिलाफ है.
Please don’t do this. In no way is India happy about Queen’s passing. Modi posted a very heartening message. Also keep in mind she reigned over an unprecedented & systemic period of *de-colonization*. These types of headlines just feed narrative that Western media are anti-India. pic.twitter.com/jfcJMcoxh5
— Derek J. Grossman (@DerekJGrossman) September 9, 2022
डेरेक के ट्वीट पर भी कई लोगों ने प्रतिक्रियाएं दीं
एक यूजर ने कहा कि हां वाकई कोई भी क्वीन के निधन पर खुशियां नहीं मना रहा है. बल्कि क्वीन एलिजाबेथ की विचारशीलता, गरिमा और अनुग्रह को लेकर सम्मान है.
Yes. Absolutely nobody is celebrating.
— Saamaanya Jeevi ಸಾಮಾನ್ಯ ಜೀವಿ Shivakumar (@SaamaanyaJ) September 9, 2022
There is, in fact, respect for the grace, dignity & thoughtfulness with which she has conducted herself. There is a quiet respect for her.
Any criticism one sees is a criticism of our own who have an excessive servitude towards the Raj.
वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि क्वीन एलिजाबेथ के निधन पर हम बेशक दुख नहीं मना रहे हैं, लेकिन हम उनके निधन को सेलिब्रेट भी नहीं कर रहे हैं. इस दुख की घड़ी में हम सब यूके के साथ खड़े हैं.
We r not mourning but we r not celebrating at all. We stand with UK at their loss.
— ashok razdan (@ashok099) September 9, 2022
वहीं महारानी एलिजाबेथ के निधन पर एक यूजर ने कहा कि वेस्टर्न मीडिया वास्तव में एंटी इंडिया और एंटी हिंदुत्व है. जितना मैं वेस्टर्न मीडिया को पढ़ता हूं, उतना मुझे इससे नफरत हो जाती है.
Western media are indeed anti-India, anti-Hinduism. The more I read them, the more I hate West.
— मराठी 🇮🇳 (@marathi_boyz) September 9, 2022
क्वीन के निधन पर क्या बोले पीएम नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्वीन के निधन पर दुख जताते हुए अपनी और उनकी मुलाकात की दो तस्वीरें भी शेयर की, जो साल 2015 और साल 2018 की हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट में कहा कि यूके की अपनी यात्राओं के दौरान महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के साथ यादगार मुलाकात रहीं.
पीएम मोदी ने ट्वीट में आगे कहा कि वे उनकी गर्मजोशी और दयालुता को कभी नहीं भूल पाऊंगा. एक मीटिंग के दौरान उन्होंने मुझे वह रूमाल दिखाया जो महात्मा गांधी ने उन्हें उनकी शादी में उपहार के तौर पर दिया था.
I had memorable meetings with Her Majesty Queen Elizabeth II during my UK visits in 2015 and 2018. I will never forget her warmth and kindness. During one of the meetings she showed me the handkerchief Mahatma Gandhi gifted her on her wedding. I will always cherish that gesture. pic.twitter.com/3aACbxhLgC
— Narendra Modi (@narendramodi) September 8, 2022
कब-कब भारत आईं क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय
क्वीन एलिजाबेथ ने अपने शासन के दौरान तीन बार भारत का दौरा किया. क्वीन का पहला दौरा साल 1961 में था, इस दौरान उनके साथ उनके पति दिवंगत प्रिंस फिलिप भी मौजूद थे.
भारत के पहली बार दौरे पर क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने मुंबई, चेन्नई और कोलकाता की यात्रा की. साथ ही आगरा में ताज महल देखने पहुंची. वहीं अपनी इस यात्रा के दौरान वे दिल्ली राजघाट भी गईं और महात्मा गांधी को श्रद्धाजंलि अर्पित की थी.
वहीं क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय साल 1961 के बाद साल 1983 में एक बार फिर भारत दौरे पर पहुंची. इस दौरान भी प्रिंस फिलिप उनके साथ रहे. जिसके बाद साल 1997 में क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय भारत दौरे पर रहीं, यह वह साल था, जिस साल भारत ने अपनी आजादी के पचास वर्ष पूरे किए थे.
क्वीन एलिजाबेथ ने तीसरी यात्रा के दौरान भारत से मिली गर्मजोशी और स्वागत की खूब तारीफ भी की थी. उन्होंने अपनी भारत यात्रा को लेकर एक संबोधन में कहा था कि भारतीयों की गर्मजोशी और आतिथ्य भाव के अलावा भारत की समृद्धि और विविधता हम सभी के लिए एक प्रेरणा रही है.
ब्रिटेन की शाही गद्दी को अब संभालेंगे किंग चार्ल्स
ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद यूके के राजशाही साम्राज्य का एक युग समाप्त हो गया है. हालांकि, गद्दी का शासन चलता रहेगा, जिसपर अब क्वीन की जगह उनके बड़े बेटे चार्ल्स विराजमान होंगे.
राजशाही नियमों के अनुसार, क्वीन एलिजाबेथ के निधन के तुरंत बाद ही चार्ल्स को ब्रिटेन का नया राजा घोषित कर दिया गया था. ब्रिटेन का राजा बनते ही 73 वर्षीय चार्ल्स ऑस्ट्रेलिया, कनाडा समेत 14 अन्य क्षेत्रों के भी प्रमुख बन गए हैं.