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कर्ज में डूबे पाकिस्तान ने छटपटाहट में जिससे मांगी मदद, उसी ने दिया झटका

पाकिस्तान को डिफॉल्ट होने के खतरे को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ऋण कार्यक्रम के तहत लोन की सख्त जरूरत है. इसलिए पाकिस्तान ने आईएमएफ से लंबित नौवीं समीक्षा को पूरा करने के लिए इस्लामाबाद में अपनी रिव्यू टीम भेजने का अनुरोध किया था. IMF ने टीम भेजने के अनुरोध को ठुकराते हुए वित्त मंत्रालय से कहा है कि वह पहले आईएमएफ की ओर से हाल के दिनों में दिए गए सभी निर्देशों को पूरा करे.

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (फोटो- रॉयटर्स)
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (फोटो- रॉयटर्स)

गंभीर आर्थिक संकट और महंगाई झेल रहे पाकिस्तान को एक और झटका लगा है. सऊदी अरब और यूएई की मदद के बावजूद पाकिस्तान पर डिफॉल्ट का खतरा मंडरा रहा है. इससे बचने का एक मात्र उपाय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) है जिसने लोन रिव्यू को पूरा करने के लिए अपनी टीम को पाकिस्तान भेजने से इनकार कर दिया है. 

पाकिस्तान को डिफॉल्ट होने के खतरे को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए शहबाज शरीफ की सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से लोन की सख्त जरूरत है. 

पाकिस्तान की ओर से अपनी टीम भेजने के अनुरोध को ठुकराते हुए आईएमएफ ने वित्त मंत्रालय से कहा है कि वह पहले आईएमएफ की ओर से हाल के दिनों में दिए गए सभी निर्देशों को पूरा करे. उसके बाद टीम भेजी जाएगी.

पाकिस्तान ने हाल ही में आईएमएफ से 7 अरब डॉलर की विस्तारित फंड सुविधा (ईएफएफ) के तहत लंबित नौवीं समीक्षा को पूरा करने के लिए अपनी रिव्यू टीम को इस्लामाबाद भेजने का अनुरोध किया था.

पाकिस्तान के प्रति आईएमएफ का सख्त रुख

लोन कार्यक्रम को लेकर आईएमएफ ने नवंबर 2022 में भी पाकिस्तान सरकार को नसीहत देते हुए कहा था कि सरकार पहले अपना खर्च कम करे, उसके बाद ही आईएमएफ लोन देगा.

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आईएमएफ ने पाकिस्तान को 500 अरब रुपये के अतिरिक्त सर्कुलर लोन को समाप्त करने के साथ-साथ ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और नए करों को लागू करने का सख्त निर्देश दिया था.

अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो पहले से ही आसमान छू रही महंगाई और बढ़ जाएगी. शहबाज सरकार को डर है कि इस कदम से पहले से ही हमलावर पीटीआई प्रमुख और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान सरकार के ऊपर और हमलावर हो सकते हैं. 

शहबाज सरकार के पास क्या है उपाय

सऊदी अरब और यूएई से कर्ज लेने के बाद भी पाकिस्तान के ऊपर डिफॉल्ट होने का खतरा मंडरा रहा है. क्योंकि पाकिस्तान को जनवरी से जून 2023 तक 13 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी कर्ज चुकाना है. यूएई के लोन रोलओवर के बाद भी पाकिस्तान को लगभग 10 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है. इसलिए पाकिस्तान के पास अब एक मात्र उपाय आईएमएफ से आर्थिक मदद ही है.

पाकिस्तान आईएमएफ से कई बार सहायता राशि के लिए अनुरोध कर चुका है. लेकिन आईएमएफ ने सख्त लहजों में पहले सभी निर्देशों को पूरा करने के लिए कहा है. 

शहबाज सरकार के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि 'मिनी बजट' को लागू किया जाए. इस मिनी बजट में ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि के अलावा आईएमएफ की कड़वी गोलियों को थोड़ा मीठा करने का इंतजाम किया गया है. 

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एक आकलन के मुताबिक, अगर मिनी बजट लागू की जाती है तो पाकिस्तान 270 अरब रुपये जुटा सकता है.

आईएमएफ के अलावा कोई विकल्प नहीं

हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पाक आर्थिक (economic) टीम के साथ लगातार दो उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता की है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि आईएमएफ कार्यक्रम को तुरंत बहाल करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं  है. पाकिस्तान कर्ज से जुड़ी सभी शर्तों पर आईएमएफ के साथ सहमति बनाने पर काम कर रहा है.

इमरान खान की पार्टी ने घेरा

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी  ने ट्वीट कर शहबाज सरकार को घेरा है. पीटीआई ने ट्वीट करते हुए लिखा है, 
"अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान सरकार की रिव्यू टीम भेजने के अनुरोध को ठुकरा दिया है." विदेशी ताकतों (Imported government) की मदद से बनी सरकार पूरी तरह से बेखबर है."

 

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