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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का बड़ा कूटनीतिक फेरबदल, भारत सहित 5 देशों से वापस बुलाए अपने राजदूत

राजदूतों को वापस बुलाए जाने के पीछे का कारण अभी पता नहीं चल सका है. लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि अंतरिम सरकार का यह कदम संकट से जूझ रहे देश की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को फिर से तैयार करने के प्रयासों का हिस्सा हो सकता है.

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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस

बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक फेरबदल करते हुए विदेशों में तैनात अपने पांच राजदूतों को वापस बुला लिया है. इसमें भारत में तैनात उसके उच्चायुक्त मुस्तफिजुर रहमान भी शामिल हैं. इसकी जानकारी गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने दी.

विदेश मंत्रालय ने बताया कि ब्रुसेल्स (बेल्जियम), कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया), लिस्बन (पुर्तगाल), नई दिल्ली और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के स्थायी मिशन में तैनात राजदूत इसमें शामिल हैं और सभी को तुरंत राजधानी ढाका लौटने का आदेश दिया गया है.

क्यों उठाया यह कदम?

यह कदम बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनावों से पहले उठाया गया है. हालांकि वापस बुलाए जाने के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि अंतरिम सरकार का यह कदम संकट से जूझ रहे देश की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को फिर से तैयार करने के प्रयासों का हिस्सा हो सकता है.

यह भी पढ़ें: 'बांग्लादेश इंटरनेशनल कोर्ट में...' तीस्ता जल बंटवारे पर मोहम्मद यूनुस की सरकार ने कही ऐसी बात

रहमान 2020 से भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत थे. उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग में अहम रोल अदा किया, विशेष रूप से व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को लेकर उनकी भूमिका अहम रही. उन्हें वापस बुलाए जाने के पीछे की वजह बांग्लादेश-भारत के नाजुक दौर से गुजर रहे संबंधों को भी माना जा रहा है.

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शेख हसीना के जाने के  बाद बदलाव से गुजर रहा है बांग्लादेश

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दक्षिण एशियाई देश में कई तरह के बदलाव हुए हैं. विरोध प्रदर्शनों के कारण शेख हसीना को इस्तीफा देकर भारत भागना पड़ा था, जिसके बाद मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में पदभार संभाला है. हसीना को हटाने के लिए देशभर में हिंसक प्रदर्शन हुए. वाले छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान 700 से अधिक लोग मारे गए. 

हसीना के पद छोड़ने के बाद देश में हिंदुओं और उनके धार्मिक स्थलों पर भी हमले की खबरें आई. 5 अगस्त को हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों पर कम से कम 205 हमले हुए हैं.

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