एक वक्त पर टीकाकरण में दुनिया को पछाड़ने वाला बांग्लादेश इन दिनों खसरा (Measles) की सबसे घातक लहर से जूझ रहा है. बांग्लादेश में 15 मार्च से अब तक खसरे और उसके जैसे लक्षणों के कारण 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस अवधि के दौरान खसरे के 7,500 मामले दर्ज किए हैं, जिसके बाद रविवार से पूरे देश में आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है. इसके साथ ही संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मोहम्मद यूनुस और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों के विदेश जाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बांग्लादेश के सभी आठ डिवीजनों में फैले 64 जिलों में से 58 जिलों में खसरे का प्रकोप फैल चुका है. संगठन ने कहा कि लगभग 79% मामले पांच साल से कम उम्र के बच्चों में देखे गए हैं, जबकि द डेली स्टार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूरे देश में खसरे के कम से कम 91% मामले एक से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों में पाए गए हैं. साथ ही मरने वालों में भी सबसे बड़ी संख्या पांच साल से कम उम्र के बच्चे शामिल हैं.
बांग्लादेश संगबाद संगस्था ने 26 अप्रैल को बताया कि इस साल 15 मार्च के बाद से खसरे से 43 मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि 216 अन्य मौतें संदिग्ध खसरे के कारण मानी जा रही हैं.
टीकाकरण अभियान में लापरवाही
बांग्लादेश में हर चार साल में खसरे के खिलाफ विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जाता है. पिछला अभियान 2020 में हुआ था, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और कोविड महामारी के कारण अगला चरण वक्त पर पूरा नहीं हो सका. वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री सरदार सखावत हुसैन ने आरोप लगाया कि यूनुस सरकार के दौरान टीकाकरण की दर 2025 में गिरकर 59.6% रह गई थी, जबकि 2017 से 2023 के बीच ये हमेशा 89% से ऊपर रही थी.
मोहम्मद यूनुस के खिलाफ कार्रवाई
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील एम. अशरफुल इस्लाम ने सरकार को कानूनी नोटिस भेजकर मोहम्मद यूनुस और उनकी सरकार के सलाहकारों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की मांग की है. नोटिस में आरोप लगाया गया है कि अंतरिम सरकार ने खसरे के टीकाकरण अभियान को सरकारी क्षेत्र से हटाकर निजी क्षेत्र को सौंपने की 'दुर्भावनापूर्ण' कोशिश की थी. इस फैसले ने वैक्सीन के स्टॉक में भारी कमी पैदा की और टीकाकरण प्रक्रिया को बाधित कर दिया.
HC ने सरकार से मांगा जवाब
उधर, खसरे के प्रकोप को रोकने में विफलता को लेकर हाईकोर्ट ने सोमवार को बांग्लादेश सरकार को नोटिस जारी किया है. अदालत ने पूछा है कि इस विफलता को अवैध क्यों न घोषित किया जाए. साथ ही अधिकारियों को दो हफ्ते के अंदर टीकों, सीरिंज और अन्य लॉजिस्टिक्स की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है.
राजनीतिक उथल-पुथल से बढ़ा संकट
बांग्लादेश की राजनीति में 2024 से जारी उथल-पुथल को इस स्वास्थ्य संकट का मूल कारण माना जा रहा है. शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बनी 15 महीने की यूनुस सरकार के दौरान लिए गए फैसलों ने टीकाकरण के मजबूत बुनियादी ढांचे को कमजोर कर दिया. अब फरवरी 2026 में सत्ता में आई बीएनपी सरकार खसरे की इस लहर के लिए पिछली सरकारों के खराब फैसलों को जिम्मेदार बता रही है.
आपको बता दें कि बांग्लादेश कभी अपने व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम (EPI) के लिए दुनिया भर में जाना जाता था. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि बांग्लादेश में उच्च टीकाकरण कवरेज का एक लंबा इतिहास रहा है, लेकिन छोटे से व्यवधान ने भी प्रतिरक्षा के स्तर में एक बड़ा अंतर पैदा कर दिया. वर्तमान में 58 जिलों का इस संक्रमण की चपेट में होना देश का सार्वजनिक स्वास्थ्य सिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.