ऑस्ट्रेलिया में एक ऐसे शख्स की कहानी का अंत हुआ जिसने 7 महीने पहले दो पुलिसकर्मियों को मार डाला था और तब से जंगलों में छिपकर पुलिस को चकमा देता रहा. सोमवार को ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने तीन घंटे की लंबी मुठभेड़ के बाद इस संदिग्ध को गोली मार दी.
बात पिछले साल 26 अगस्त की है. विक्टोरिया राज्य के मेलबर्न से उत्तर-पूर्व में एक दूरदराज के जंगली इलाके में पोरेपुंका के पास पुलिस अधिकारी 56 साल के डेजी फ्रीमैन के घर एक वारंट तामील करने पहुंचे थे. फ्रीमैन ने अचानक पुलिस पर गोलियां चला दीं. दो पुलिस अधिकारी मारे गए और एक गंभीर रूप से घायल हो गया. इसके बाद फ्रीमैन जंगल में फरार हो गया.
7 महीने तक कहां रहा?
फ्रीमैन के बारे में बताया जाता है कि वह "सॉवरेन सिटीजन" यानी खुद को सरकार और कानून से ऊपर मानने वाली सोच का आदमी था. उसे पुलिस से गहरी नाराजगी थी. सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि उसे जंगल में जिंदा रहने की माहिर जानकारी थी.
पुलिस को डर था कि वह जंगल में अनिश्चित काल तक छिपा रह सकता है. विक्टोरिया राज्य के घने जंगलों में उसकी तलाश में बड़े पैमाने पर अभियान चला लेकिन कोई पक्की सुराग नहीं मिला. कुछ महीने पहले पुलिस को यहां तक शक होने लगा था कि शायद उसने खुद अपनी जान ले ली हो.
सोमवार को कैसे पकड़ा?
सोमवार को पुलिस को किसी सूचना के आधार पर पोरेपुंका से करीब दो घंटे उत्तर में थोलोगोलोंग के पास एक दूरदराज जगह पर उसके होने की जानकारी मिली. वहां पहुंचने पर संदिग्ध एक शिपिंग कंटेनर जैसी जगह में बंद था. पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस टीम ने उसे घेर लिया. तीन घंटे तक दोनों तरफ से गतिरोध बना रहा. पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण का मौका दिया लेकिन उसने मना कर दिया. इसके बाद पुलिस ने गोली चला दी और वह मारा गया.
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अभी क्या हो रहा है?
विक्टोरिया पुलिस के चीफ कमिश्नर माइक बुश ने कहा कि उनका पूरा यकीन है कि मारा गया शख्स फ्रीमैन ही है लेकिन आधिकारिक पहचान के लिए फिंगरप्रिंट समेत कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी जिसमें 48 घंटे तक लग सकते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पूरी कोशिश थी कि इस मामले को जितना हो सके शांतिपूर्ण तरीके से खत्म किया जाए लेकिन संदिग्ध ने सहयोग नहीं किया.
पुलिस ने इस मामले में जानकारी देने वाले के लिए 10 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी करीब 5 करोड़ रुपये का इनाम रखा था. अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी ने फ्रीमैन को इन 7 महीनों में छिपने में मदद की थी.
दो पुलिसकर्मियों की मौत के 7 महीने बाद यह मामला आखिरकार एक अंजाम तक पहुंचा लेकिन उन परिवारों का दर्द जिनके अपनों को इस शख्स ने छीन लिया, शायद इतनी आसानी से नहीं भरेगा.