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'अगर डील नहीं हुई तो...', ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की खुली चेतावनी, 10 दिन का दिया अल्टीमेटम

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के जिनेवा में परोक्ष वार्ता जारी है. अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मध्यस्थों के जरिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरकची से बातचीत कर रहे हैं, ताकि परमाणु विवाद खुले टकराव में न बदले.

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने शांति बोर्ड की मीटिंग के दौरान ईरान को अल्टीमेटम दिया. (File Photo: Reuters)
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने शांति बोर्ड की मीटिंग के दौरान ईरान को अल्टीमेटम दिया. (File Photo: Reuters)

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त अल्टीमेटम दिया है. वाशिंगटन में गाजा पीस बोर्ड की पहली बैठक के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तेहरान को एक सार्थक परमाणु समझौते पर सहमत होना होगा, वरना उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा. इशारों-इशारों में ट्रंप ने ईरान को 10 दिन का अल्टीमेटम भी दे दिया है.

ट्रंप ने कहा, 'हमें ईरान के साथ एक सार्थक समझौता करना है. बातचीत चल रही है, लेकिन अगर डील नहीं हुई तो नतीजे अच्छे नहीं होंगे. अब समय है कि ईरान हमारे साथ शांति के रास्ते पर आए. अगर वे शामिल होते हैं तो अच्छा होगा, अगर नहीं होते तो भी एक अलग रास्ता होगा, लेकिन वे पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में नहीं डाल सकते.'

उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले करीब 10 दिनों में कुछ बड़ा हो सकता है. उन्होंने कहा, 'हमें एक कदम और आगे जाना पड़ सकता है, या शायद नहीं. हो सकता है हम समझौता कर लें. आप अगले 10 दिनों में जान जाएंगे. ईरान पर किसी न किसी तरह डील हो जाएगी. अगर ईरान से डील नहीं हुई तो बहुत बुरी चीज़ें होंगी.'

महायुद्ध के मुहाने पर खड़ा मिडिल ईस्ट 

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बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के जिनेवा में परोक्ष वार्ता जारी है. अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मध्यस्थों के जरिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरकची से बातचीत कर रहे हैं, ताकि परमाणु विवाद खुले टकराव में न बदले. स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है और एक्सपर्ट्स अंदेशा जता रहे हैं कि कभी भी युद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.

दरअसल, अमेरिका ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने या उसमें बड़ा कटौती करने की मांग कर रहा है. वॉशिंगटन का तर्क है कि यूरेनियम एनरिंचमेंट और बढ़ते भंडार से परमाणु प्रसार का खतरा पैदा होता है. वहीं ईरान लगातार कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ नागरिक ऊर्जा और शोध के लिए है, न कि हथियार बनाने के लिए. तेहरान ने एनरिंचमेंट पूरी तरह छोड़ने की मांग को संप्रभु अधिकार के खिलाफ बताया है.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान जल्द ही एक लिखित प्रस्ताव सौंप सकता है, जिसमें वह बताएगा कि अमेरिकी चिंताओं को कैसे संबोधित किया जाएगा. यही दस्तावेज तय करेगा कि बातचीत किसी फ्रेमवर्क एग्रीमेंट की ओर बढ़ेगी या ठहराव की स्थिति बनेगी.

ईरान के आसपास अमेरिकी सैन्य जमावड़ा

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गौरतलब है कि कूटनीतिक कोशिशों के समानांतर क्षेत्र में सैन्य हलचल भी तेज है. अमेरिका ने हाल के दिनों में मध्य पूर्व में 50 से अधिक एडवांस फाइटर जेट्स जिनमें F-22, F-35 और F-16 शामिल हैं, तैनात किए हैं. इसके अलावा अतिरिक्त नौसैनिक संसाधन और एयर डिफेंस सिस्टम भी भेजे गए हैं. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह तैनाती डिटरेंस यानी निवारक रणनीति का हिस्सा है, ताकि अमेरिकी बलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और क्षेत्रीय सहयोगियों को भरोसा दिलाया जा सके.

दूसरी ओर, ईरान ने भी सैन्य अभ्यास किए हैं और अपने परमाणु ठिकानों पर किसी भी हमले की स्थिति में कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. ईरानी नेतृत्व का कहना है कि किसी भी हमले से खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता गंभीर रूप से प्रभावित होगी.

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा स्थिति बेहद नाजुक है. दोनों पक्ष पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन बढ़ती सैन्य तैनाती और सख्त सार्वजनिक बयानबाजी से गलती की गुंजाइश कम हो गई है. समुद्र, हवाई क्षेत्र या क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों के जरिए किसी भी गलत आकलन से स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है.

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