
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके ग्लोबल रेसिप्रोकल टैरिफ फैसले पर बड़ा कानूनी झटका लगा है. यूएस सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए इमरजेंसी कानून के तहत लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दिया. बहुमत में शामिल छह जजों में वे दो न्यायाधीश भी थे, जिन्हें खुद ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान नियुक्त किया था.
ब्रेट कैवनॉघ ट्रंप के अकेले अपॉइंटेड जज थे जिन्होंने राष्ट्रपति के आदेश के पक्ष में फैसला सुनाया, जबकि जस्टिस गोरसच और जस्टिस बैरेट ने इसे खारिज करने के लिए मेजॉरिटी का साथ दिया. कोर्ट के इस फैसले से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि कोर्ट ने राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमा स्पष्ट करने का संदेश दिया है.
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चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स द्वारा लिखे गए फैसले के कुछ घंटे बाद व्हाइट हाउस में ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, "टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बहुत निराशाजनक है. मुझे कोर्ट के कुछ सदस्यों पर शर्म आ रही है कि उनमें देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है."

विरोध में फैसला देने वाले जजों पर क्या बोले राष्ट्रपति ट्रंप?
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें कोर्ट के तीन डेमोक्रेटिक नियुक्त जजों से ऐसे फैसले की उम्मीद थी, "उनकी निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता" लेकिन जब उनसे खास तौर पर उनके द्वारा नियुक्त जस्टिस Neil Gorsuch और Amy Coney Barrett के बारे में पूछा गया, जो बहुमत के पक्ष में थे, तो ट्रंप ने कहा, "सच कहूं तो यह उनके परिवारों के लिए भी शर्म की बात है."
कानूनी चुनौती सिर्फ डेमोक्रेटिक खेमे से नहीं आई थी. लिबर्टेरियन झुकाव वाले लिबर्टी जस्टिस सेंटर ने इस मामले में अहम याचिका दायर की थी, जबकि व्यापारिक हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूएस चैम्बर ऑफ कॉमर्स जैसे समूहों ने भी टैरिफ का विरोध किया.
ट्रंप और सुप्रीम कोर्ट के बीच रहा तनावपूर्ण संबंध लेकिन मिला फायदा
राष्ट्रपति ट्रंप और सुप्रीम कोर्ट के बीच संबंध पहले भी तनावपूर्ण रहे हैं. हालांकि, 2024 में उन्हें एक बड़ी कानूनी जीत मिली थी, जब कोर्ट ने राष्ट्रपति पद से जुड़ी प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) पर फैसला सुनाते हुए 2020 चुनाव नतीजों को पलटने की कोशिशों को लेकर उनके खिलाफ अभियोजन को रोका था.
अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में ट्रंप को इमीग्रेशन नीति और अन्य फैसलों पर आपात अपीलों में भी राहत मिली थी. लेकिन इस बार कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल असीमित नहीं है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, एक लॉ एक्सपर्ट ने कहा कि किसी राष्ट्रपति का कोर्ट के फैसले की आलोचना करना सामान्य है, लेकिन यह कहना कि जजों ने साहस की कमी के कारण ऐसा किया, "अनुचित" है.
ट्रंप और चीफ जस्टिस के बीच कैसे हैं रिश्ते?
राष्ट्रपति ट्रंप और चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी तनाव रहा है. रॉबर्ट्स पहले भी संघीय जजों पर ट्रंप के हमलों को लेकर सार्वजनिक रूप से असहमति जता चुके हैं. ट्रंप ने शुक्रवार को चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ जज "राजनीतिक रूप से सही दिखने" की कोशिश कर रहे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप इसी सप्ताह स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन देंगे, जहां सुप्रीम कोर्ट के जज भी मौजूद रहेंगे. 2012 में ओबामाकेयर पर फैसले के बाद जैसा माहौल बना था, वैसी ही प्रतीकात्मक स्थिति फिर बन सकती है.
कुल मिलाकर, यह फैसला न केवल ट्रंप की व्यापार नीति के लिए झटका है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अमेरिकी न्यायपालिका राष्ट्रपति के अधिकारों पर जरूरत पड़ने पर लगाम लगाने की क्षमता रखती है.
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