कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में अलगाववादी आंदोलन को बड़ा झटका लगा है. अदालत ने उस याचिका पर रोक लगा दी है, जिसके जरिए अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने के लिए जनमत संग्रह कराने की मांग की जा रही थी. फैसले के बाद प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अल्बर्टा का बेहतर भविष्य कनाडा के भीतर ही है.
कार्नी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी सरकार पूरे देश को सुचारू रूप से चलाने और सभी प्रांतों के साथ मिलकर काम करने पर ध्यान दे रही है. उन्होंने कहा कि मजबूत अल्बर्टा, मजबूत कनाडा की पहचान है.
दरअसल, अल्बर्टा में अलगाववादी संगठन “स्टे फ्री अल्बर्टा” ने प्रांत को कनाडा से अलग करने के लिए जनमत संग्रह कराने की मांग वाली याचिका दायर की थी लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि प्रांतीय सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया कानूनी मानकों पर खरी नहीं उतरती. अदालत ने यह भी माना कि सरकार ने फर्स्ट नेशंस समुदायों से जरूरी परामर्श नहीं किया.
फैसले के बाद अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने नाराजगी जताई और इसे “लोकतंत्र विरोधी” करार दिया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अदालत के इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी. स्मिथ का तर्क है कि लाखों अल्बर्टावासियों की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
वहीं, फर्स्ट नेशंस समूहों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि अलगाव की किसी भी प्रक्रिया से पहले स्वदेशी समुदायों के अधिकारों और संधियों का सम्मान किया जाना जरूरी है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले महीनों में और गहरा सकता है. हालांकि कार्नी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि आर्थिक सहयोग और ऊर्जा समझौते के जरिए अल्बर्टा और संघीय सरकार के रिश्तों को मजबूत किया जा सकता है.