अफगानिस्तान में तालिबान की ताकत लगातार बढ़ती जा रही है. देश के कई इलाकों पर अपना कब्जा जमा चुका तालिबान अभी भी अफगान सेना के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है. उनकी महिलाओं और अल्पसंख्यकों को लेकर जो नीति है, वो भी विवाद का विषय बनी हुई है. अब इसी कड़ी में तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद सोहेल ने आजतक से हर मुद्दे पर खुलकर बात की है.
महिलाओं पर तालिबान नीति
उन्होंने बताया है कि अफगानिस्तान में महिलाओं को काम करने से नहीं रोका जा रहा है. लेकिन उन्हें हिजाब पहनना पड़ेगा. वे कहते हैं कि हम महिलाओं की शिक्षा के खिलाफ नहीं हैं. हमने ने हर बार अपना स्टैंड साफ किया है. हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि महिलाएं हिजाब पहनें. अभी जो भी इलाके हमारे कंट्रोल में हैं, वहां पर लड़कियां स्कूल जा रही हैं. किसी को भी नहीं रोका गया है.
वहीं जब सवाल पूछा गया कि क्या पहनना है और क्या नहीं, ये निजी फैसला रहना चाहिए, इस पर तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि इस्लाम के मुताबिक महिलाओं का हिजाब पहनना जरूरी है. जो भी महिला बाहर जाकर काम करती हैं, उन्हें ये पालन करना होगा.
वापस क्यों लौट रहे भारतीय राजनयिक?
वैसे अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते कब्जे की वजह से कई भारतीय राजनयिक वापस हिंदुस्तान लौट रहे हैं. सभी जल्द से जल्द अफगानिस्तान छोड़ने पर जोर दे रहे हैं. अब तालिबान ने इसे भारत का निजी फैसला बता दिया है. उनकी नजरों में तालिबान सभी राजनियकों को संपूर्ण सुरक्षा देगा,लेकिन अगर कोई उन्हें वापस बुलाना चाहता है तो ये उनकी इच्छा है. तालिबान ने जोर देकर कहा है कि जो भी अफगान के भले के लिए काम करना चाहता है, उन सभी का स्वागत किया जाएगा.
गुरुद्वारे से क्यों हटा निशान साहेब का ध्वज?
हाल ही में अफगानिस्तान में एक गुरुद्वारे से निशान साहेब के ध्वज को भी नुकसान पहुंचाया गया था. उसे वहां से हटा दिया गया था. मीडिया खबरों के मुताबिक इस कार्रवाई को तालिबान ने अंजाम दिया था. लेकिन अब जब यही सवाल तालिबानी प्रवक्ता से पूछा गया तो उन्होंने इस विवाद से खुद को बिल्कुल दूर रखा. उनके मुताबिक ये एक ऐसा झूठ है जो मीडिया द्वारा फैलाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि तालिबान ने कोई ध्वज नहीं हटाया था. जब हमने लोगों से उस घटना के बारे में जानने का प्रयास किया, कई को तो जगह तक नहीं पता थी. हमे बताया गया कि डर की वजह से वो ध्वज लोगों ने खुद हटाया था. लेकिन तालिबान की तरफ से सभी को कहा गया कि डरने की जरूरत नहीं है. अल्पसंख्यकों को पूरी सुरक्षा दी जाएगी.
दानिश के सवाल पर तालिबान
वहीं सवाल जब दानिश सिद्दीकी की हत्या पर पूछा गया तब भी तालिबान ने तमाम आरोपों से खुद को मुक्त कर लिया. खबरें आई थी कि तालिबान ने ही बड़ी ही क्रूरता से दानिश की हत्या कर दी थी. वहीं बाद में शव के साथ भी छेड़छाड़ की गई. अब इस पर तालिबानी प्रवक्ता ने कहा है कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं. उनके मुताबिक गोलीबारी के दौरान दानिश की हत्या हुई थी. वहीं प्रवक्ता ने इस पर दुख जाहिर किया कि एक पत्रकार को अपनी जान देनी पड़ी.
भारत को शांति वार्ता में शामिल?
जानकारी के लिए बता दें कि भारत ने हमेशा से अफगानिस्तान में शांति की पैरवी की है. लेकिन फिर भी अफगानिस्तान को लेकर जितनी भी शांति वार्ता होती हैं, उनमें भारत को नहीं शामिल किया जाता है. इसी वजह से तालिबानी प्रवक्ता से भी सवाल पूछा गया कि एक पड़ोसी होने के नाते भारत को इन शांति वार्ता का हिस्सा क्यों नहीं बनाया जाता है? इस सवाल पर मोहम्मद सोहेल ने जोर देकर कहा कि भारत को पहले पक्षपात करना छोड़ना होगा.
अभी काबुल प्रशासन को भारत से पूरी मदद मिलती है. कई बार उनकी तरफ से जो हथियार दिए जाते हैं, उनका इस्तेमाल तालिबान के खिलाफ किया जाता है. ऐसे में फैसला भारत को करना है कि उन्हें अफगान के लोगों के साथ रहना है या फिर वहां की सरकार के साथ.