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विश्व

खुकरी का खौफः नेपाली सेना से मौत भी कांपती है, Indian Army से खास रिश्ता

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नेपाल की सेना ब्रिटिश गवर्मेंट की ओर से पहले और दूसरे विश्व युद्ध में भी दो-दो हाथ कर चुकी है. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ के कहने पर नेपाली सेना ने सोमालिया, सिएरा लेओन, इथियोपिया और सूडान के गृह युद्ध में भी हालातों को काबू करने के लिए उतर चुकी है. नेपाली सेना का हेड क्वार्टर भद्रकाली काठमांडू में है. नेपाली सेना के चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा हैं. नेपाली सेना का सर्वोच्च कमांडर देश का राष्ट्रपति होता है. (फोटोः गेटी)

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गोरखाओं की बहादुरी से प्रभावित होकर ईस्ट इंडिया कंपनी ने दिया था ईनाम

नेपाल की सेना काफी बहादुर मानी जाती है. इनकी बहादुरी का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इनकी लड़ने की शैली को देखकर ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी सेनाओं में नेपालियों की नियुक्ति करनी शुरू कर दी थी. भारतीय सेना में भी इनका शौर्य देखने को मिलता है. भारत में नेपाली सेना की एक विंग है जिसे गोरखा रेजीमेंट के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि इनकी नियुक्ति अंग्रेजी शासन से होती रही है. तब से अब तक गोरखा रेजीमेंट भारतीय सेना की शान बढ़ाता रहा है.  (फोटोः गेटी)

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भारत-नेपाल के सैन्य संबंधों की शुरुआत कब हुई 

नेपाल से भारत का सैन्य संबंध महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल के वक्त से चला आ रहा है, जिन्होंने अपनी सेना में नेपाली सैनिकों को शामिल किया था, जिन्हें लाहौरी या Soldiers of Fortune कहा गया. पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक (रिटायर्ड) ने अपनी किताब India’s Military Conflicts & Diplomacy में पूरा एक चैप्टर नेपाल पर लिखा है. इसमें इस बात का जिक्र है. ब्रिटिश भारत ने 24 अप्रैल, 1815 को नासिक रेजिमेंट के रूप में गोरखा रेजिमेंट की पहली बटालियन का गठन किया. प्रथम विश्वयुद्ध शुरू होने तक, ब्रिटिश भारतीय सेना में 10 गोरखा रेजिमेंट थे. (फोटोः गेटी)

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कौन हैं गोरखा?

नेपाल की पहाड़ी ‘लड़ाका’ जाति. गोरखाओं को दो बातों के लिए ख़ास तौर पर जाना जाता रहा है- साहस और वफादारी. ये फिज़िकली और मेंटली काफी स्ट्रॉन्ग होते हैं. यही वजह थी कि अंग्रेजों ने 1857 के भी पहले से गोरखा सैनिकों की अपनी सेना में प्रमुखता से भर्ती शुरू कर दी थी. 1814 की बात है. ईस्ट इंडिया कंपनी की जड़ें भारत में गहरा रही थीं. अब उनकी नज़र नेपाल पर थी. धीरे-धीरे उन्होंने सरहदों पर खिसकना शुरू किया. लेकिन नंगी खुकरियां लेकर गोरखे टूट पड़े. अंग्रेजों ने ऐसा युद्ध पहले कभी न देखा था. एक साल के भीतर ही उन्हें समझ आ गया कि ये दांव उल्टा पड़ रहा है. (फोटोः गेटी)

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लिहाज़ा 1815 में संधि हुई. सुगौली संधि. ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के राजा के बीच. इस संधि के मुताबिक, नेपाल के कुछ हिस्सों को ब्रिटिश भारत में शामिल करने, काठमांडू में एक ब्रिटिश प्रतिनिधि की नियुक्ति तय हुई. साथ ही ये तय हुआ कि ब्रिटेन की सैन्य सेवाओं में गोरखाओं की भर्ती की जाएगी. इसके बाद अंग्रेजी सेना में गोरखाओं की भर्ती होने लगी. 1857 में जब प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हुआ, तो गोरखा अंग्रेजों की तरफ से भारतीय क्रांतिकारियों के ख़िलाफ लड़े थे, क्योंकि उस समय गोरखे ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन थे. इसके बाद गोरखे अंग्रेजों की फौज में रहे. उनकी तरफ से दो विश्वयुद्ध भी लड़े. और क्या हिम्मत से लड़े कि अंग्रेजों ने इन्हें नया नाम दे डाला- मार्शल रेस (Martial Race).  (फोटोः गेटी)

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ऐसी है नेपाल सेना की सैन्य क्षमता

दुनियाभर के तमाम देशों की सैन्य क्षमता की जानकारी देने वाली साइट ग्लोबल फायर पॉवरके अनुसार, 26 अप्रैल 2022 में नेपाल की सेना का स्थान पूरी दुनिया में 119वां है.  नेपाली आर्मी में करीब 1 लाख 05 हजार जवान हैं. वहीं, नेपाल के पास कुल 14 एयरक्राफ्ट हैं जबकि मात्र 9 हेलिकॉप्टर्स हैं. पैदल सेना के पास 214 सैन्य बख्तरबंद वाहन हैं , नेपाली सेना के पास कोई टैंक नहीं है. हालांकि उसके पास खींची जाने वाली 84 तोपें हैं. नेपाल के पास अपनी कोई नौसेना नहीं है. (फोटोः गेटी)

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नेपाल में कौन तय करता है सेना का कामकाज

नेपाल में सेना का कामकाज वहां की नेशनल डिफेंस काउंसिल देखती है. ये काउंसिल कामकाज के अलावा सेना की नीतियों को बनाती और लागू करती है. इस काउंसिल में प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, सेनाध्यक्ष, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, गृह मंत्री और चीफ सेक्रेट्री समेत कुल 7 सदस्य होते हैं. नेपाल में कुल सात राज्य हैं, जो आठ डिविजन में बंटी हुई है. सात डिविजन सात राज्यों में जबकि एक डिविजन काठमांडू वैली में है. (फोटोः गेटी)

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चीन से भी लोहा ले चुकी है नेपाल की सेना

सात राज्यों वाले नेपाल की सेना चीन जैसे महाशक्तिशाली देश से दो-दो हाथ कर चुकी है. 1974 में चीन की सेना ने तिब्बत से लगी नेपाल की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी जिसके बाद नेपाली सेना ने चीन की सेना के खिलाफ गोरिल्ला युद्ध लड़ा था. हालांकि बाद में मामले में समझौता हो गया था. (फोटोः गेटी)

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भारत-अमेरिका से मुख्य रूप से होती है हथियारों की सप्लाई

नेपाल को अमेरिका हथियारों की सप्लाई करता है. इसके अलावा अमेरिकी विशेषज्ञ नेपाली सेना को ट्रेंड भी करते हैं. इसके अलावा भारत बड़े पैमाने पर नेपाल को हथियार की सप्लाई करता है. इसके अलावा जर्मनी, बेल्जियम, इजरायल और साउथ कोरिया नेपाल को हथियार, कारतूस और आधुनिक उपकरण की मदद देता है. (फोटोः गेटी)