पश्चिम बंगाल में सोमवार से महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना की शुरुआत हो गई है. राज्य सरकार ने पहले ही इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा कर दी थी और अब इसे जमीनी स्तर पर लागू कर दिया गया है. सरकार का दावा है कि इस योजना से लाखों महिलाओं को रोजमर्रा की यात्रा में आर्थिक राहत मिलेगी और उन्हें शिक्षा, रोजगार तथा अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने में सुविधा होगी.
योजना की शुरुआत होने पर महिलाओं ने खुशी जताई है और कहा है कि यह योजना बहुत लाभदायक साबित होगी. इससे महीने के कन्वेंस खर्च में काफी बचत होगी.
बस में मिलेगा जीरो वैल्यू टिकट
इस योजना के तहत महिलाओं को बस में यात्रा के दौरान टिकट लेना होगा, लेकिन यह टिकट 'जीरो वैल्यू टिकट' होगा. यानी टिकट जारी किया जाएगा, लेकिन इसके लिए कोई किराया नहीं देना पड़ेगा. राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार सरकारी बसों में सफर करने वाली महिलाओं को यात्रा के दौरान अपने निवास संबंधी दस्तावेज दिखाने होंगे. दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें जीरो वैल्यू टिकट जारी किया जाएगा. इससे यात्रियों का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा और योजना के लाभार्थियों का सही आंकड़ा भी सरकार के पास उपलब्ध रहेगा.

सिर्फ राज्य की महिलाओं को मिलेगा लाभ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल केवल पश्चिम बंगाल की स्थायी निवासी महिलाएं ही इस योजना का लाभ उठा सकेंगी. दूसरे राज्यों या देशों की महिला यात्रियों को यह सुविधा नहीं मिलेगी. इसके लिए महिलाओं को अपने साथ कोई वैध पहचान पत्र रखना होगा.
ये 12 डॉक्यूमेंट सफर में आएंगे काम
योजना का लाभ लेने के लिए 12 प्रकार के दस्तावेजों में से किसी एक को दिखाना पर्याप्त होगा. इनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज, राज्य या केंद्र सरकार द्वारा जारी कर्मचारी पहचान पत्र, स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय का पहचान पत्र तथा सरकार द्वारा जारी अन्य वैध पहचान पत्र शामिल हैं.
इस योजना के तहत राज्य के विभिन्न हिस्सों में चलने वाली सरकारी बसों में महिलाएं निशुल्क यात्रा कर सकेंगी. इसका लाभ उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक मिलेगा. यानी कोई महिला कोलकाता से सिलीगुड़ी, दीघा या राज्य के किसी अन्य हिस्से तक सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा कर सकती है.
राज्य सरकार के परिवहन की बसों में मिलेगी सुविधा
राज्य सरकार के परिवहन उपक्रमों की बसों में यह सुविधा उपलब्ध होगी. इनमें सीएसटीसी (CSTC), डब्ल्यूबीटीसी (WBTC), डब्ल्यूबीएसटीसी (WBSTC), एनबीएसटीसी (NBSTC) और एसबीएसटीसी (SBSTC) की बसें शामिल हैं. इन सभी सरकारी बस सेवाओं में महिलाओं को किराया नहीं देना होगा.
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में इस योजना को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए स्मार्ट कार्ड व्यवस्था शुरू की जाएगी. शुरुआती चरण में महिलाएं पहचान पत्र दिखाकर यात्रा कर सकेंगी, लेकिन बाद में स्मार्ट कार्ड अनिवार्य किया जा सकता है.

स्मार्ट कार्ड बनवाना होगा आसान
स्मार्ट कार्ड बनवाने के लिए भी वही दस्तावेज मान्य होंगे, जिनके आधार पर फिलहाल मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जा रही है. आधार कार्ड, वोटर कार्ड, मनरेगा कार्ड, पैन कार्ड, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, भारतीय पासपोर्ट, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज, सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों द्वारा जारी पहचान पत्र, शैक्षणिक संस्थानों के आईडी कार्ड और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी अन्य पहचान पत्र इसके लिए मान्य होंगे.
स्मार्ट कार्ड प्राप्त करने के लिए महिलाओं को अपने क्षेत्र के बीडीओ (ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) या एसडीओ (सब-डिविजनल ऑफिसर) कार्यालय में आवेदन करना होगा. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उन्हें स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएगा.
क्या बोली महिलाएं?
इस योजना के शुरू होने के बाद एक लाभार्थी महिला आद्रिजा दत्त ने मीडिया बातचीत में कहा कि इस योजना से काफी सुविधा होगी और साथ ही बचत भी होगी. क्योंकि हर रोज 50-60 किलोमीटर जाना होता है. वह भी एक ही साधन से नहीं होता. यानी सिर्फ बस से डेस्टिनेशन तक नहीं जाया जा सकता, हर जगह के लिए अलग-अलग सवारी लगती है. ब्रेक कर-करके आने-जाने में 9000 रुपये महीने तक का खर्च हो जाता है. तो इससे बड़ी बचत होगी और सुविधा भी होगी.
राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें दैनिक यात्रा के खर्च से राहत मिलेगी. खासतौर पर नौकरीपेशा महिलाओं, छात्राओं और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को इसका सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है.