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पश्चिम बंगाल में पोस्ट पोल हिंसा के आरोपों के बीच TMC ने शुरू की हेल्पलाइन, CM शुभेंदु अधिकारी ने कहा - जानकारी नहीं

पश्चिम बंगाल में पोस्ट पोल हिंसा के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. TMC ने पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जबकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार के पास ऐसी घटनाओं की जानकारी नहीं है.

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बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हिंसा की पुष्टि होने पर कार्रवाई होगी (Photo: PTI)
बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हिंसा की पुष्टि होने पर कार्रवाई होगी (Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है. विधानसभा के नए सत्र के दौरान टीएमसी ने दावा किया कि चुनाव के बाद राज्य के कई इलाकों में हिंसा हुई और कई लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े. वहीं मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को लेकर कहा कि सरकार के पास अभी ऐसी घटनाओं की कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर शिकायत सही पाई जाती है तो कार्रवाई जरूर होगी. इसी बीच टीएमसी ने अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया है ताकि चुनाव के बाद हिंसा से जुड़ी शिकायतें सीधे पार्टी तक पहुंच सकें.

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा का नया सत्र शुरू हुआ. इस दौरान सदन में चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा का मुद्दा जोर-शोर से उठा. विपक्ष के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने विधानसभा में कहा कि राज्य के कई हिस्सों में हिंसा की घटनाएं हुई हैं. उन्होंने दावा किया कि कई लोग डर की वजह से अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं.

टीएमसी नेता ने सदन में कहा कि राज्य में कई जगहों पर माहौल खराब हुआ है और सरकार को इस पर सख्त कदम उठाने चाहिए. उनका कहना था कि जिन लोगों को नुकसान हुआ है या जिन्हें घर छोड़ना पड़ा है, उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए.

इन आरोपों पर मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि सरकार के पास अभी तक ऐसी घटनाओं की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने घर से विस्थापित हुआ है तो पुलिस और प्रशासन उसे वापस घर पहुंचाने का काम करेंगे.

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उन्होंने साफ कहा कि अगर जांच में हिंसा की घटनाएं सही पाई जाती हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा.

इस पूरे विवाद के बीच विधानसभा में हंगामा भी देखने को मिला. बीजेपी विधायकों ने सदन में 'चोर-चोर' के नारे लगाए, जिसके बाद टीएमसी विधायकों ने कुछ समय के लिए वॉकआउट किया. यानी टीएमसी के सदस्य विरोध में सदन से बाहर चले गए.

स्पीकर के चुनाव के दौरान भी विपक्षी सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे, हालांकि बाद में वे वापस लौट आए. बीजेपी विधायक रथिंद्र बोस को बिना किसी विरोध के पश्चिम बंगाल विधानसभा का स्पीकर चुना गया. खास बात यह रही कि वह राज्य के उत्तरी हिस्से से आने वाले पहले विधायक बने जो इस पद पर पहुंचे हैं.

स्पीकर चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने कहा कि अब विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाएगा. यानी लोग लाइव देख सकेंगे कि सदन के अंदर क्या हो रहा है और कौन क्या बोल रहा है.

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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हिंसा की पुष्टि होने पर कार्रवाई की जाएगी (Photo: PTI)

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मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा जनता की उम्मीदों को पूरा करने का बड़ा मंच है और इसे संविधान और नियमों के मुताबिक चलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से सदन चलाना चाहती है.

उन्होंने यह भी कहा कि सदन में मजबूत और रचनात्मक विपक्ष होना बहुत जरूरी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में अलग राय रखने वालों की भी अहम भूमिका होती है. उन्होंने कहा कि विधानसभा लड़ाई का मंच नहीं है.

शुवेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि सदन में बोलने का समय सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बराबर बांटा जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि किसी विधायक को लंबे समय तक निलंबित किया जाए. साथ ही उन्होंने सभी नेताओं से भाषा और व्यवहार को लोकतांत्रिक मर्यादा में रखने की अपील की.

बीजेपी विधायक तपस रॉय ने सदन में कहा कि अब विधानसभा 'डर से मुक्त' हो चुकी है. उन्होंने विपक्ष पर चुनाव बाद हिंसा के आरोपों को लेकर निशाना साधा. जब टीएमसी नेताओं ने विरोध किया तो उन्होंने उन्हें शांत रहने को कहा और अपनी बात खत्म करते हुए 'जय श्री राम' का नारा लगाया.

वहीं आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी चुनाव बाद हिंसा का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि पिछली बार चुनाव के बाद हुई हिंसा से लोगों के बीच डर का माहौल बन गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया गया.

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नौशाद सिद्दीकी ने सरकार से मांग की कि विपक्षी दलों को सदन में सम्मान और अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध नहीं करेगा, बल्कि जनता के मुद्दे उठाने का काम करेगा.

इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है. एक तरफ टीएमसी हिंसा के आरोप लगा रही है और शिकायतें दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन शुरू कर रही है, वहीं सरकार का कहना है कि अभी तक ऐसी घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है.

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