scorecardresearch
 

'अहंकार चरम पर था, इसलिए हार हुई', TMC के पूर्व विधायक का बड़ा बयान, ममता बनर्जी पर भी साधा निशाना

हुगली में TMC के पूर्व विधायक असित मजूमदार ने पार्टी की हार के लिए अहंकार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि लोगों का भरोसा सरकार से उठ गया था और टिकट वितरण में बड़ी गलती हुई. ममता बनर्जी पर भी उन्होंने अप्रत्यक्ष निशाना साधा और कहा कि पुराने नेताओं को नजरअंदाज करने का नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा.

Advertisement
X
असित मजूमदार TMC की अंदरूनी कमजोरी पर खुलासा किया. (Photo: Screengrab)
असित मजूमदार TMC की अंदरूनी कमजोरी पर खुलासा किया. (Photo: Screengrab)

पश्चिम बंगाल के हुगली में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक असित मजूमदार ने पार्टी की हार को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी का अहंकार ही उसकी हार की सबसे बड़ी वजह बना. उनके इस बयान से राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है.

असित मजूमदार ने कहा कि हमारा अहंकार चरम पर पहुंच गया था, इसी वजह से यह हार हुई. उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी भी इस हार में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि उनके लिए बुरा लगता है, लेकिन जब पार्टी के भीतर उन्हें नजरअंदाज किया गया तब किसी को बुरा नहीं लगा.

राज्य में भगवा लहर के बीच तृणमूल को बड़ा झटका लगा है, और भाजपा सरकार बनाने जा रही है. इस पर असित मजूमदार ने अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों का भरोसा तृणमूल सरकार से उठ चुका था. उनके मुताबिक, यह हार अचानक नहीं हुई, बल्कि लंबे समय से बन रही स्थिति का नतीजा है.

TMC की अंदरूनी कमजोरी सामने आई 

उन्होंने टिकट वितरण को लेकर भी नाराजगी जताई. असित मजूमदार ने कहा कि करीब 74 विधायकों को बिना किसी चर्चा के टिकट नहीं दिया गया. उनका कहना है कि अगर उन्हें मौका मिलता तो पार्टी को फायदा हो सकता था. उन्होंने इसे पार्टी की बड़ी गलती बताया.

Advertisement

चुंचुड़ा सीट को लेकर भी असित मजूमदार नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि वह 15 साल तक इस क्षेत्र के विधायक रहे हैं और इलाके की हर गली से परिचित हैं. इसके बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया और टिकट देबांशु भट्टाचार्य को दिया गया.

असित मजूमदार ने अपने पुराने संघर्षों को याद करते हुए कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के शासनकाल में उन्होंने संघर्ष किया और मार खाकर भी बदलाव लाया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब वे संघर्ष कर रहे थे तब नए नेताओं का जन्म भी नहीं हुआ था.

गलत फैसलों का नतीजा हार, टिकट बंटवारे पर उठे सवाल

उन्होंने देबांशु भट्टाचार्य पर निशाना साधते हुए कहा कि वो सोशल मीडिया की राजनीति करते हैं, जबकि पुराने नेता जमीन पर काम करते रहे हैं. उनके मुताबिक, पार्टी आम लोगों तक विकास का संदेश नहीं पहुंचा पाई, जिसकी वजह से जनता ने तृणमूल को नकार दिया.
 

---- समाप्त ----
रिपोर्ट- पार्था राहा
Live TV

Advertisement
Advertisement