नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की हादसे में हुई मौत के मामले में जांच ने अब रफ्तार पकड़ ली है. SIT के गठन के बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम घटना के पांच दिन बाद मौके पर पहुंची. टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और मौके पर मौजूद हालात की बारीकी से जांच की जा रही है. फोरेंसिक विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें लापरवाही कहां हुई.
इस मामले में आरोपी बिल्डर अभय को एक दिन की रिमांड खत्म होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की शुरुआती जांच पर नाराजगी जाहिर की और लापरवाही को लेकर जमकर फटकार लगाई. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि लापरवाही किसकी है. अगर नाली टूटी हुई थी तो उसका जिम्मेदार कौन है और अगर वहां बैरिकेट नहीं लगाया गया था तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है.
घटना के पांच दिन बाद मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सभी बिंदु जांच का अहम हिस्सा होने चाहिए. खासतौर पर तब, जब इस समस्या को लेकर पिछले कई सालों से शिकायतें की जा रही थीं. ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई. कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जाए और किसी भी स्तर की लापरवाही को नजरअंदाज न किया जाए.
कोर्ट ने लापरवाही को लेकर पुलिस को लगाई कड़ी फटकार
इंजीनियर युवराज की मौत के इस मामले ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. अब पुलिस और फोरेंसिक टीम की जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि हादसे के पीछे असल में कौन जिम्मेदार है और आगे किसके खिलाफ कार्रवाई होगी.