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सिंगापुर यात्रा से बड़ा फायदा... CM योगी को मिले 1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर यात्रा कई मायने में फायदेमंद साबित हुई. उन्होंने सिर्फ 48 घंटे में 1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिल गए.

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सिंगापुर यात्रा के दौरान सीएम योगी को मिले एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रपोजल (Photo - PTI)
सिंगापुर यात्रा के दौरान सीएम योगी को मिले एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रपोजल (Photo - PTI)

वैश्विक निवेश प्रतिस्पर्धा के दौर में राज्यों की सफलता केवल निवेश राशि से नहीं, बल्कि उस निवेश को आकर्षित करने की गति, विश्वसनीयता और रणनीतिक तैयारी से मापी जाती है. इसी कसौटी पर देखें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर यात्रा एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय बनकर उभरती है.

 सिर्फ 48 घंटे के संक्षिप्त प्रवास में 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव हासिल करना न केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि है, बल्कि यह नीति स्थिरता, निवेशक विश्वास और नेतृत्व की परिणाम केंद्रित कार्यशैली का संकेत भी है.

अर्थशास्त्रीय दृष्टि से निवेश आकर्षण तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित होता है - भरोसा, नीति स्पष्टता और निर्णय की गति. सिंगापुर यात्रा के दौरान योगी आदित्यनाथ ने इन तीनों तत्वों को एक साथ साधने का प्रयास किया. यह यात्रा पारंपरिक औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सरकार से व्यवसाय तक सीधा संवाद स्थापित करने का माध्यम बनी.

निवेशकों के साथ राउंड टेबल बैठकें, क्षेत्रवार प्रस्तुतियां और त्वरित फॉलोअप ने यह संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश केवल संभावनाओं की बात नहीं करता, बल्कि परियोजनाओं को क्रियान्वयन तक ले जाने की क्षमता भी रखता है.

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विपक्ष शासित राज्यों से तुलना
तुलनात्मक दृष्टि से यह उपलब्धि और स्पष्ट हो जाती है. तेलंगाना को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस जैसे वैश्विक मंच पर तीन दिन में 1.78 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले थे, जबकि पश्चिम बंगाल ने अपने राज्य में आयोजित ग्लोबल समिट के माध्यम से 4.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया. इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश का ₹1 लाख करोड़ का आंकड़ा किसी बड़े समिट के बजाय दो दिन की द्विपक्षीय निवेश कूटनीति से प्राप्त हुआ.

अगर अन्य उदाहरण देखें तो तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे औद्योगिक राज्यों ने भी यूरोप और दावोस यात्राओं के दौरान निवेश प्रस्ताव हासिल किए, लेकिन समय अवधि लंबी रही और निवेश राशि तुलनात्मक रूप से सीमित रही. इस संदर्भ में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन निवेश आकर्षण की नई कार्यशैली को रेखांकित करता है, जिसमें संक्षिप्त लेकिन केंद्रित दौरे, पूर्व तैयारी और लक्षित सेक्टर आधारित संवाद प्रमुख भूमिका निभाते हैं.

सिंगापुर मिशन की एक और विशेषता यह रही कि इसमें निवेश को केवल एमओयू के रूप में नहीं, बल्कि औद्योगिक पारिस्थितिकी के विस्तार के रूप में प्रस्तुत किया गया. डेटा सेंटर, हरित ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और शहरी अवसंरचना जैसे क्षेत्रों पर चर्चा ने संकेत दिया कि राज्य अब श्रम प्रधान उद्योगों से आगे बढ़कर तकनीक आधारित और कैपिटल इंटेंसिव सेक्टर्स में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है. यह परिवर्तन दीर्घकालिक आर्थिक संरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है.

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सबसे रोचक पहलू समय का प्रबंधन
अर्थशास्त्रियों के लिए इस पूरी प्रक्रिया का सबसे रोचक पहलू समय का प्रबंधन है. 48 घंटे की यात्रा में लगातार बैठकों और निवेशकों से प्रत्यक्ष संवाद ने यह संकेत दिया कि नेतृत्व की व्यक्तिगत भागीदारी निवेश निर्णयों को गति दे सकती है. जब शीर्ष नेतृत्व स्वयं निवेश वार्ताओं का हिस्सा बनता है, तो निर्णय प्रक्रिया में अनिश्चितता नहीं रहती.

दीर्घकालिक प्रभाव के संदर्भ में यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश की निवेश कूटनीति को एक नए चरण में ले जाती है. प्रस्तावों का क्रियान्वयन समयबद्ध ढंग से होता है, तो इससे रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और औद्योगिक विविधीकरण को गति मिलती है. साथ ही यह अन्य राज्यों के लिए भी एक संकेत होगा कि वैश्विक निवेश प्रतिस्पर्धा में सफलता केवल बड़े आयोजनों से नहीं, बल्कि रणनीतिक तैयारी और नेतृत्व की सक्रिय भूमिका से हासिल की जा सकती है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर यात्रा बता रही है कि राज्य सरकारें स्पष्ट दृष्टि, नीति स्थिरता और परिणाम केंद्रित नेतृत्व के साथ आगे बढ़ें, तो सीमित समय में भी बड़े आर्थिक परिणाम संभव हैं.

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