महोबा के चरखारी में शुक्रवार को एक हैरतअंगेज नजारा देखने को मिला. भाजपा के ही विधायक बृजभूषण राजपूत ने अपनी ही सरकार के दिग्गज मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोक लिया. विधायक अपने साथ करीब 100 ग्राम प्रधानों को लेकर पहुंचे थे और उनकी नाराजगी जल जीवन मिशन व नमामि गंगे योजना को लेकर थी.
बृजभूषण राजपूत ने दिया 20 दिन का अल्टीमेटम
विधायक का आरोप है कि पिछले 6 सालों में न तो घरों तक पानी पहुंचा है और न ही सड़कें दुरुस्त हुई हैं, उल्टे पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है. मौके पर काफी हंगामा हुआ और मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे और अगर लापरवाही मिली तो अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड करेंगे. बाद में विधायक और मंत्री एक ही गाड़ी में बैठकर डीएम कार्यालय पहुंचे, जहां लंबी बैठक हुई. विधायक बृजभूषण राजपूत ने अब 20 दिन का अल्टीमेटम दिया है.
कौन हैं बृजभूषण राजपूत?
यूपी विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, चरखारी (महोबा) से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत का जन्म 28 मई, 1982 को जालौन के उरई में हुआ था. वह एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता गंगा चरण राजपूत तीन बार लोकसभा सांसद (1989, 1996, 1998) और राज्यसभा सांसद (2009) रह चुके हैं. बृजभूषण राजपूत उच्च शिक्षित हैं, उन्होंने स्नातकोत्तर के साथ ऑस्ट्रेलिया की मदर टेरेसा यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है. व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनका विवाह 9 मई, 2005 को कनक लोधी के साथ हुआ और उनके दो बेटे हैं.
कैसा है राजनीतिक करियर?
उनका राजनीतिक सफर काफी सक्रिय रहा है, जहां वे वर्ष 2017 में पहली बार सत्रहवीं विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए. इस दौरान उन्होंने विधान पुस्तकालय परामर्शदात्री समिति के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं. इसके बाद वह मार्च 2022 में लगातार दूसरी बार 18वीं विधानसभा के लिए विधायक चुने गए. राजनीति के अलावा वह कृषि और व्यापार (स्वराज ट्रैक्टर डीलर) से भी जुड़े हुए हैं और उनका मुख्य आवास महोबा के चरखारी स्थित 'ओल्ड पैलेस' में है.
बृजभूषण राजपूत बुंदेलखंड के मुद्दों पर मुखर रहने के लिए जाना जाता है. वह 'बुंदेलखंड अधिकार क्षेत्र' के सेना प्रमुख के रूप में 2011 से ही राजनैतिक आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं, जिसके लिए उन्हें लखनऊ में 18 दिनों तक बंदी भी रहना पड़ा था. उन्होंने बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली-पानी की आपूर्ति और पृथक बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग को लेकर चक्का जाम और आमरण अनशन जैसे कड़े कदम भी उठाए हैं. गौसेवा, खेल, संगीत और समाज सेवा में उनकी विशेष रुचि है.