सहारनपुर में सपा सांसद इकरा हसन और पुलिस वालों के बीच जमकर नोंकझोक हुई. पुलिसकर्मियों के दिए पानी को लेने से इनकार करते हुए भड़क उठीं. थाने के अंदर बैठे हुए इकरा हसन का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह कहती सुनाई दे रही हैं कि हमें इनका पानी नहीं पीना. हम भी ऐसे ही हो जाएंगे. अपना मंगा लो. पुलिस को खरी-खोटी सुनाने के सांसद के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए.
दरअसल पूरा विवाद दशाले गांव में युवक मोनू की हत्या के बाद शुरू हुआ. परिवार लगातार आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा था. इसी सिलसिले में मृतक की मां और परिवार के कुछ लोग सांसद इकरा हसन के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंचे थे. सांसद का कहना है कि वे अधिकारियों से सिर्फ न्याय की गुहार लगाने गए थे. उनके मुताबिक मृतक की बुजुर्ग मां बेहद दुखी हालत में वहां पहुंची थी और अधिकारियों से अपने बेटे के लिए इंसाफ मांग रही थी. लेकिन आरोप है कि वहां उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस ने गलत तरीके से बात की. सांसद का केहना है कि मृतक की मां वही रोने लगी. हम लोग कार्यालय के बाहर ही खड़े थे, तभी हमारे कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया गया. बाद में उन पर 151 की कार्रवाई करते हुए जेल भेजे जाने की बात सामने आई.
इंसाफ मांगना क्या जुर्म हो गया ?
जैसे ही इकरा हसन को जानकारी मिली कि कुछ लोगों हिरासत में लेकर कार्रवाई की जा रही है, वह सीधे सदर बाजार थाने पहुंच गईं. उनके साथ समर्थकों की भीड़ भी पहुंचने लगी. थाने के अंदर बैठकर सांसद लगातार पुलिस अधिकारियों से सवाल पूछती रहीं. उनका सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर पीड़ित परिवार को ही क्यों परेशान किया जा रहा है. इकरा हसन ने कहा, जिस मां का बेटा मारा गया, उसकी सुनवाई करने के बजाय उसे बेइज्जत किया गया. वो रोती रही लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी. उन्होंने पुलिस प्रशासन पर संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि अगर कोई पीड़ित अधिकारी के पास जाकर अपनी बात भी नहीं रख सकता, तो फिर आम आदमी आखिर जाएगा कहां. सांसद ने गुस्से में कहा, इतना भी इन्हें मंजूर नहीं हुआ कि बाहर गेट पर खड़े हो जाएं. इंसाफ मांगना क्या जुर्म हो गया?
ये जनता की जगह है, किसी के बाप-दादा की जागीर नहीं
धरने के दौरान सांसद का गुस्सा लगातार बढ़ता दिखाई दिया. उन्होंने दावा किया कि वहां किसी तरह का जाम नहीं लगाया गया था और न ही भीड़ इकट्ठा की गई थी. उनके मुताबिक डीआईजी कार्यालय के बाहर सिर्फ पांच से सात लोग मौजूद थे और वे सड़क पर नहीं बल्कि पार्किंग एरिया में खड़े थे. इसके बावजूद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी. इकरा हसन ने कहा, क्या अधिकारी के पास अपनी बात रखने जाना भी अपराध है? वो जगह जनता की है, किसी के बाप-दादा की जागीर नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए जिले के कई इलाकों में बैरिकेडिंग कर दी थी. हसनपुर चुंगी समेत कई रास्तों पर पुलिस तैनात थी, लेकिन इसके बावजूद वह थाने तक पहुंचीं. उन्होंने कहा, ये हमारा घर है. हम अपने रास्ते जानते हैं. और इंसाफ लेकर ही जाएंगे.
महिला दारोगा से भी हुई बहस
सांसद एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक महिला दारोगा सांसद की पीठ पर हाथ रखती दिखाई देती हैं. इस पर इकरा हसन तुरंत नाराज हो जाती हैं और कहती हैं कि हाथ मत लगाइए. यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया गया. समर्थकों ने इसे सांसद के साथ गलत व्यवहार बताया, जबकि पुलिस की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.
अगर उनका चालान हुआ तो मेरा भी करो
थाने के अंदर बैठे हुए इकरा हसन बार-बार यही मांग दोहराती रहीं कि मृतक परिवार के लोगों को तुरंत छोड़ा जाए. उन्होंने साफ कहा कि अगर परिवार के लोगों पर 151 की कार्रवाई हुई है, तो उनका भी चालान किया जाए क्योंकि वह हर समय उनके साथ मौजूद थीं. सांसद ने कहा कि अगर उनके खिलाफ कार्रवाई हुई है तो मेरा भी 151 में चालान करो. मैं भी उनके साथ थी. सिर्फ पीड़ित परिवार को जेल भेजना गलत है. उनका यह बयान भी देर रात तक सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा.
हमें इनका पानी नहीं पीना
पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा उस बयान की हुई, जिसमें सांसद पुलिसवालों के दिए पानी को लेने से इनकार करती नजर आईं. थाने के भीतर माहौल पहले से ही गर्म था. पुलिस और समर्थकों के बीच लगातार बहस चल रही थी. इसी दौरान किसी ने पानी ऑफर किया, लेकिन इकरा हसन ने नाराजगी में कहा कि हमें इनका पानी नहीं पीना. अपना मंगा लो. इसके बाद उन्होंने पुलिस प्रशासन पर तंज कसते हुए कई और बातें कहीं. वहां मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
कश्यप समाज का भी किया जिक्र
धरने के दौरान इकरा हसन ने इस पूरे मामले को सामाजिक और राजनीतिक एंगल से भी जोड़ने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि मृतक का परिवार कश्यप समाज से आता है और हमेशा भाजपा का समर्थन करता रहा है. इसके बावजूद अगर उनके साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो आम लोगों की स्थिति समझी जा सकती है. सांसद ने कहा कि वो लोग मुसलमान भी नहीं थे. कश्यप समाज से थे. अगर उनके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो सोचिए बाकी लोगों का क्या हाल होगा.
देर रात तक थाने में चलता रहा हंगामा
रात बढ़ने के साथ सदर बाजार थाने के बाहर समर्थकों की भीड़ भी बढ़ती गई. पुलिस लगातार स्थिति संभालने की कोशिश करती रही. कई घंटे तक बातचीत का दौर चलता रहा. सूत्रों के मुताबिक पुलिस अधिकारियों ने सांसद को भरोसा दिया कि हिरासत में लिए गए लोगों को सुबह छोड़ दिया जाएगा. इसके बाद देर रात इकरा हसन धरने से उठीं और समर्थकों के साथ वहां से रवाना हो गईं. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि अगर पीड़ित परिवार को राहत नहीं मिली, तो वह दोबारा थाने पहुंचेंगी.