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मनमानी खत्म, नियम लागू! गंगा में नावों के लिए अलग-अलग रूट तय, बिना लाइफ जैकेट सवारी पर सख्त प्रतिबंध

वाराणसी में गंगा में बढ़ती नाव दुर्घटनाओं के बाद पुलिस ने नया रूट प्लान लागू किया है. अब नावों के आने-जाने के रास्ते अलग होंगे और बीच धारा में नाव चलाने पर रोक रहेगी. राजघाट से अस्सी घाट तक नावें किनारे से जाएंगी और वापसी उस पार से होगी. सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया गया है.

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गंगा में लापरवाही पर लगा ब्रेक!(Photo: Screengrab)
गंगा में लापरवाही पर लगा ब्रेक!(Photo: Screengrab)

वाराणसी में गंगा नदी में बढ़ती नावों की संख्या और हाल के दिनों में हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है. अब गंगा में नाव संचालन के लिए नया रूट प्लान लागू कर दिया गया है. इस नए नियम के तहत नावों के आने और जाने के रास्ते अलग-अलग कर दिए गए हैं, ताकि टकराव और हादसों को रोका जा सके.

दरअसल, नए रूट प्लान के अनुसार अब राजघाट से अस्सी घाट जाने वाली नावें पक्के घाट के किनारे-किनारे चलेंगी. वहीं, वापसी के समय नावों को गंगा के उस पार से होकर वापस आना होगा. इसका मतलब है कि अब नाव चालक गंगा के बीचोबीच अपनी मर्जी से नाव नहीं चला सकेंगे और उन्हें तय रास्ते का ही पालन करना होगा.

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हाल की दुर्घटना के बाद लिया गया फैसला

यह नया रूट प्लान दो दिन पहले तुलसी घाट के सामने गंगा में हुई नाव टक्कर की घटना के बाद लागू किया गया है. इस दुर्घटना में नावों के आपस में टकराने से खतरे की स्थिति पैदा हो गई थी. इस घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नाव संचालन के नियमों में बदलाव किया है.

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प्रशासन का मानना है कि अलग-अलग रूट तय होने से नावों के आमने-सामने आने की संभावना कम होगी और हादसों को रोका जा सकेगा. इससे गंगा में नाव संचालन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकेगा.

लाइफ जैकेट अनिवार्य, नियम तोड़ने पर कार्रवाई

एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि अब सभी नाव चालकों को तय रूट का सख्ती से पालन करना होगा. साथ ही नाव में बैठने वाले 100 प्रतिशत यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके अलावा प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा.

उन्होंने बताया कि हाल की दुर्घटना के मामले में भेलूपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है और संबंधित नाव को जब्त कर लिया गया है. इसके साथ ही गंगा पार घुड़सवारी कराने वाले लोगों का भी सत्यापन कराया जाएगा. प्रशासन का उद्देश्य गंगा में नाव संचालन को सुरक्षित बनाना और भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है.

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