उत्तर प्रदेश शासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए संघ लोक सेवा आयोग को पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेज दिया है. साल 2022 में मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद से राज्य में अब तक पांच कार्यवाहक डीजीपी तैनात किए जा चुके हैं. वर्तमान में राजीव कृष्ण इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. डीजी ग्रेड के 1994 बैच तक के अधिकारियों के नाम इस प्रक्रिया के लिए विचारधीन हैं. यूपीएससी इन नामों में से तीन सबसे योग्य अधिकारियों का चयन कर राज्य सरकार को वापस भेजेगा, जिनमें से एक को प्रदेश पुलिस का नया और स्थाई मुखिया चुना जाएगा.
कार्यवाहक कप्तानों का लंबा दौर
मई 2022 में मुकुल गोयल की रवानगी के बाद से यूपी पुलिस में अस्थाई नियुक्तियों का सिलसिला शुरू हुआ था. सबसे पहले डीजी इंटेलिजेंस डीएस चौहान को कार्यवाहक जिम्मेदारी मिली, जो मार्च 2023 तक पद पर रहे.
उनके बाद आरके विश्वकर्मा ने एक महीने और विजय कुमार ने नौ महीने तक काम देखा. इसके बाद सरकार के भरोसेमंद अफसर प्रशांत कुमार सबसे लंबे समय (एक साल चार महीने) तक कार्यवाहक डीजीपी रहे. उनके रिटायरमेंट के बाद अब राजीव कृष्ण कमान संभाल रहे हैं.
इन दिग्गजों के नामों पर चर्चा
सीनियरिटी लिस्ट में सबसे ऊपर 1990 बैच की रेणुका मिश्रा का नाम है, लेकिन सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले के चलते वह सरकार की 'गुड बुक' से बाहर मानी जा रही हैं. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात आलोक शर्मा का कार्यकाल 6 महीने से कम बचा है, जिससे उनका दावा कमजोर है. एनडीआरएफ के डीजी पीयूष आनंद भी पुराने विवादों के कारण रेस में पीछे दिख रहे हैं. ऐसे में वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण का दावा सबसे मजबूत नजर आ रहा है.
राजीव कृष्ण क्यों हैं सबसे मजबूत दावेदार?
राजीव कृष्ण न केवल वर्तमान में कार्यवाहक डीजीपी हैं, बल्कि उनके पास जून 2029 तक का लंबा कार्यकाल भी है. उन्होंने पुलिस ट्रेनिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक टूल्स (यक्ष ऐप) पर विशेष जोर दिया है. उनका सौम्य व्यवहार और काम करने की दृढ़ता उन्हें सरकार की पहली पसंद बनाती है. यदि यूपीएससी ने मुकुल गोयल को हटाए जाने के पुराने कारणों पर दोबारा पेंच नहीं फंसाया, तो जल्द ही राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लग सकती है.