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2002 में हत्या करके भागा था, 22 साल बाद पकड़ा गया तो हुई आजीवन कारावास की सजा  

मुजफ्फरनगर में एक स्थानीय अदालत ने 2002 की हत्या के एक मामले में कई सालों से फरार शख्स को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. आरोपी 22 साल पहले एक हत्या करके भागा था .

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22 साल बाद पकड़ा गया हत्यारा तो हुई आजीवन कारावास की सजा  
22 साल बाद पकड़ा गया हत्यारा तो हुई आजीवन कारावास की सजा  

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक स्थानीय अदालत ने 2002 की हत्या के एक मामले में कई सालों से फरार शख्स को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक सरकारी वकील ने शुक्रवार को ये जानकारी दी है.

अधिकारी ने कहा, मुख्य आरोपी कृष्ण को 2003 में दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। लेकिन उसका एक साथी नौशाद 22 सालों से फरार था जो कि अब पकड़ा गया है. 

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कनिष्क कुमार सिंह ने आरोपी नौशाद को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या की सजा) के तहत दोषी ठहराते हुए उस पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

शख्स को सितंबर 2002 में इस जिले में दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे एक होटल में पेंशन को लेकर हुए विवाद के बाद एक दिवंगत सेना जवान की विधवा की गोली मारकर हत्या करने का दोषी ठहराया गया था। पीड़िता, मुख्य आरोपी कृष्ण की भाभी थी, जिसे 2003 में सजा सुनाई गई थी.

कई बार ऐसा हुआ है कि हत्या के मामले में फरार आरोपी सालों या दशकों के बाद पकड़ा गया हो. इसी साल महाराष्ट्र के ठाणे जिले से 34 साल से फरार चल रहे 61 वर्षीय हत्या के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था. आरोपी ने एक पार्टी के दौरान एक शख्स की चाकू से मारकर हत्या कर दी थी. उसके बाद से फरार चल रहा था. इसी बीच मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने उसे धर दबोचा. आरोपी जहांगीर दीनमोहम्मद शेख दिसंबर 1990 में मुंबई के मीरा रोड में एक घर में पार्टी में मौजूद था जहां उसने हत्या को अंजाम दिया था.

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